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Supreme Court: 'अदालतों को नैतिक पुलिसिंग नहीं करनी चाहिए', सुप्रीम कोर्ट ने उच्च न्यायालय के आदेश को पलटा
Tue, 08 Apr 2025 01:21 PM IST
नितिन गौतम
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: नितिन गौतम
Updated Tue, 08 Apr 2025 01:21 PM IST
सार
हाईकोर्ट ने ददलानी और पूनावाला को उनके खिलाफ दर्ज एफआईआर को रद्द करवाने के लिए 10-10 लाख रुपए का भुगतान करने को कहा था। हाईकोर्ट ने यह भी कहा था कि जुर्माना इसलिए लगाया गया है ताकि यह संदेश दिया जा सके कि कोई भी धार्मिक संप्रदायों के प्रमुखों का मजाक न उड़ाए
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सुप्रीम कोर्ट
- फोटो : एएनआई (फाइल)
विस्तार
सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को अपने एक अहम फैसले में कहा कि अदालतों को नैतिक पुलिसिंग नहीं करनी चाहिए और इसके साथ पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट का आदेश को पलट दिया। अपने इस आदेश से सुप्रीम कोर्ट ने राजनीतिक विश्लेषण तहसीन पूनावाला को बड़ी राहत दी और उच्च न्यायालय द्वारा पूनावाला पर 10 लाख रुपये का जुर्माना लगाने के आदेश पर रोक लगा दी। तहसीन पूनावाला और गायक और संगीतकाल विशाल ददलानी पर जैन मुनि तरुण सागर के खिलाफ आपत्तिजनक टिप्पणी करने का मामला था।
सुप्रीम कोर्ट ने उच्च न्यायालय के आदेश की आलोचना की
जस्टिस अभय एस ओक और जस्टिस उज्जल भुइयां की पीठ ने उच्च न्यायालय के 2019 के उस आदेश को खारिज कर दिया जिसमें पूनावाला और विशाल ददलानी को जुर्माना भरने का निर्देश दिया गया था। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि उच्च न्यायालय इस तथ्य से प्रभावित था कि याचिकाकर्ता ने एक विशेष धर्म के पुजारी की आलोचना की थी। पीठ ने कहा, 'यह किस तरह का आदेश है? जुर्माना लगाने का सवाल ही नहीं उठता। न्यायालय ने अपीलकर्ताओं को बरी कर दिया, लेकिन जुर्माना लगाया। न्यायालयों को नैतिक पुलिसिंग नहीं करनी चाहिए।'
ये भी पढ़ें- Supreme Court: सुप्रीम कोर्ट की तमिलनाडु राज्यपाल को फटकार, कहा- गवर्नर के पास वीटो का अधिकार नहीं
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अपने आदेश में हाईकोर्ट ने ददलानी और पूनावाला को उनके खिलाफ दर्ज एफआईआर को रद्द करवाने के लिए 10-10 लाख रुपए का भुगतान करने को कहा था। हाईकोर्ट ने यह भी कहा था कि जुर्माना इसलिए लगाया गया है ताकि यह संदेश दिया जा सके कि कोई भी धार्मिक संप्रदायों के प्रमुखों का मजाक न उड़ाए। पूनावाला ने हाईकोर्ट के फैसले के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया था।
ये भी पढ़ें- SC: सुप्रीम कोर्ट ने धमकी मामले में हाईकोर्ट के आदेश में दखल देने से किया इनकार, हिमाचल सरकार की याचिका खारिज
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सुप्रीम कोर्ट ने उच्च न्यायालय के आदेश की आलोचना की
जस्टिस अभय एस ओक और जस्टिस उज्जल भुइयां की पीठ ने उच्च न्यायालय के 2019 के उस आदेश को खारिज कर दिया जिसमें पूनावाला और विशाल ददलानी को जुर्माना भरने का निर्देश दिया गया था। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि उच्च न्यायालय इस तथ्य से प्रभावित था कि याचिकाकर्ता ने एक विशेष धर्म के पुजारी की आलोचना की थी। पीठ ने कहा, 'यह किस तरह का आदेश है? जुर्माना लगाने का सवाल ही नहीं उठता। न्यायालय ने अपीलकर्ताओं को बरी कर दिया, लेकिन जुर्माना लगाया। न्यायालयों को नैतिक पुलिसिंग नहीं करनी चाहिए।'
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अपने आदेश में हाईकोर्ट ने ददलानी और पूनावाला को उनके खिलाफ दर्ज एफआईआर को रद्द करवाने के लिए 10-10 लाख रुपए का भुगतान करने को कहा था। हाईकोर्ट ने यह भी कहा था कि जुर्माना इसलिए लगाया गया है ताकि यह संदेश दिया जा सके कि कोई भी धार्मिक संप्रदायों के प्रमुखों का मजाक न उड़ाए। पूनावाला ने हाईकोर्ट के फैसले के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया था।
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