फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   India News ›   Supreme Court restrains decision on allowing food and beverage items to be taken in cinemas

सिनेमाघरों में खाने-पीने का सामान ले जाने की इजाजत देने के फैसले पर सुप्रीम कोर्ट ने लगाई रोक 

Fri, 10 Aug 2018 07:58 PM IST
राजीव सिन्हा, नई दिल्ली
राजीव सिन्हा, नई दिल्ली Updated Fri, 10 Aug 2018 07:58 PM IST
विज्ञापन
Supreme Court restrains decision on allowing food and beverage items to be taken in cinemas
- फोटो : reuters

सिनेमाघरों में बाहर से खाने-पीने की चीजों को ले जाने की इजाजत देने से जम्मू एवं हाईकोर्ट के फैसले पर सुप्रीम कोर्ट ने रोक लगा दी है। शीर्ष अदालत को प्रथम दृष्टया हाईकोर्ट का यह फैसला वाजिब नहीं नजर आ रहा है।  

विज्ञापन


न्यायमूर्ति रोहिंग्टन एफ नरीमन और न्यायमूर्ति इंदू मल्होत्रा की पीठ ने शुक्रवार को हाईकोर्ट के इस निर्देश पर रोक लगाते हुए दो वकीलों (हाईकोर्ट में याचिकाकर्ता) को नोटिस जारी करते हुए जवाब दाखिल करने के लिए कहा है।
विज्ञापन


इससे पहले सुनवाई के दौरान मल्टीप्लेक्स एसोसिएशन ऑफ इंडिया की ओर से पेश वरिष्ठ वकील मुकुल रोहतगी ने हाईकोर्ट के इस आदेश पर दरनिकार करने की गुहार करते हुए कहा 'क्या हम ताज होटल या किसी फाइव स्टार होटल में अपने साथ शराब ले जाए और वहां सिर्फ सोडा का ऑर्डर कर सकते हैं।’ 
विज्ञापन
विज्ञापन


उन्होंने कहा कि अगर जम्मू एवं कश्मीर हाईकोर्ट के इस आदेश के समान देश के सभी राज्यों में इस तरह का आदेश जारी हो जाए तो इस तरह की निजी कंपनियों का अस्तित्व ही खत्म हो जाएगा। रोहतगी ने आश्चर्य व्यक्त किया कि घर की खाने की चीजों को सिनेमाघर में ले जाने की मांग करने वाली एक गर्भवती महिला का हवाला देते हुए हाईकोर्ट इस तरह का आदेश कैसे पारित कर सकता है। 

सिनेमाघरों में कई बार धमाके हो चुके हैं

Supreme Court restrains decision on allowing food and beverage items to be taken in cinemas

रोहतगी ने कहा के अगर ऐसा है तो वे फिल्म देखे बगैर भी आनंद उठा सकते हैं। रोहतगी के इन दलीलों से पीठ प्रथम दृष्टया वाजिब महसूस करते हुए जम्मू एवं कश्मीर हाईकोर्ट के इस आदेश पर रोक लगाते हुए हाईकोर्ट के समक्ष याचिकाकर्ता रहे दो वकीलों को नोटिस जारी करते हुए चार हफ्ते में जवाब दाखिल करने के लिए कहा है।
  
सुनवाई के दारौन पीठ ने उस वाक्या का भी जिक्र किया जब एक विमानन कंपनी ने यात्रियों को अपना भोजन-पानी साथ रखने पर पाबंदी लगा दी थी। न्यायमूर्ति रोहिंग्टन  ने यह जानना चाहा कि क्या ऐसा कोई वैधानिक नियम है जो इस पर पाबंदी लगाता हो। 

जवाब में रोहतगी ने कहा कि ये सिनेमाघर हैं। लिहाजा नियम फिल्म को लेकर है न कि खाने-पीने को लेकर। उन्होंने कहा कि कोई नियम न होने का यह कतई मतलब नहीं है कि लोग कुछ भी लेकर सिनेमाघर जाए।  

रोहतगी ने यह भी कहा कि हाईकोर्ट ने आदेश देते वक्त सुरक्षा के पहलुओं को पूरी तरह नजरअंदाज कर दिया। उन्होंने कहा कि सिनेमाघरों में कई बार धमाके हो चुके हैं। चंद मिनटों में सिनेमाघरों में प्रवेश करने वाले सैकड़ों लोगों की सघनता से जांच नहीं की जा सकती।

इसके अलावा एसोसिएशन की ओर से पेश दूसरे वरिष्ठ वकील अभिषेक मनु सिंघवी ने कहा कि टिकटों पर स्पष्ट तौर पर लिखा होता है कि दर्शक क्या लेकर सिनेमाघरों में नहीं प्रवेश कर सकते। 

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News apps, iOS Hindi News apps और Amarujala Hindi News apps अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed