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सुप्रीम कोर्ट ने लगाई रोक हिमाचल प्रदेश केवन क्षेत्रों में पेड़ों के काटने पर रोक
Thu, 14 Mar 2019 02:22 AM IST
Avdhesh Kumar
अमर उजाला ब्यूरो, नई दिल्ली
अमर उजाला ब्यूरो, नई दिल्ली
Published by: Avdhesh Kumar
Updated Thu, 14 Mar 2019 02:22 AM IST
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tree cutting
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सुप्रीम कोर्ट ने हिमाचल प्रदेश में विकास कार्य के लिए वन क्षेत्रों में पेड़ों केकाटने पर पूरी तरह से पाबंदी लगा दी है। साथ ही शीर्ष अदालत ने राज्य सरकार को वन भूमि को गैर वानिकी उद्देश्य के लिए डायर्वट करने पर रोक लगा दी है।
न्यायमूर्ति अरूण मिश्रा की अध्यक्षता वाली पीठ ने अथॉरिटी के उस अधिकार पर रोक लगा दी है जिसके तहत उसे सड़क अस्पताल, स्कूल आदि विकास कार्यों के लिए प्रति हेक्टर जमीन से 75 पेड़ों को काटने की इजाजत मिली हुई है। वन अधिकार अधिनियम(एफआरए) के तहत अथॉरिटी को यह अधिकार प्राप्त है।
पीठ ने अगले आदेश तक जिला वन अधिकारियों को एफआरए की धारा-3(2) के तहत मिले इस अधिकार का इस्तेमाल करने पर रोक लगा दी है। अगली सुनवाई एक अप्रैल को होगी।
साथ ही शीर्ष अदालत ने कहा है कि जिन परियोजनाओं को अनुमति दे दी गई है लेकिन अब तक वहां पेड़ों को नहीं काटा गया है, तो वहां भी अगले आदेश पर पेड़ों को नहीं काटा जा सकता। इसकेअलावा पीठ ने अगली तारीख तक वन भूमि को गैर वानिकी उद्देश्य के लिए डायर्वट करने पर रोक लगा दी है।
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वास्तव में सुप्रीम कोर्ट ने हिमाचल प्रदेश में बड़े पैमाने पर पेड़ों की कटाई संबंधी रिपोर्ट देखने पर यह निर्णय लिया। सुप्रीम कोर्ट ने इस रिपोर्ट पर राज्य सरकार को जवाब दाखिल करने के लिए कहा है। पीठ ने राज्य सरकार को यह सुनिश्चित करने के लिए वन को और किसी तरह का नुकसान नहीं होना चाहिए। पीठ ने स्पष्ट शब्दों में कहा है कि हिमाचल प्रदेश के अनमोल और बेशकीमती वन को किसी तरह का नुकसान नहीं होना चाहिए।
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न्यायमूर्ति अरूण मिश्रा की अध्यक्षता वाली पीठ ने अथॉरिटी के उस अधिकार पर रोक लगा दी है जिसके तहत उसे सड़क अस्पताल, स्कूल आदि विकास कार्यों के लिए प्रति हेक्टर जमीन से 75 पेड़ों को काटने की इजाजत मिली हुई है। वन अधिकार अधिनियम(एफआरए) के तहत अथॉरिटी को यह अधिकार प्राप्त है।
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पीठ ने अगले आदेश तक जिला वन अधिकारियों को एफआरए की धारा-3(2) के तहत मिले इस अधिकार का इस्तेमाल करने पर रोक लगा दी है। अगली सुनवाई एक अप्रैल को होगी।
साथ ही शीर्ष अदालत ने कहा है कि जिन परियोजनाओं को अनुमति दे दी गई है लेकिन अब तक वहां पेड़ों को नहीं काटा गया है, तो वहां भी अगले आदेश पर पेड़ों को नहीं काटा जा सकता। इसकेअलावा पीठ ने अगली तारीख तक वन भूमि को गैर वानिकी उद्देश्य के लिए डायर्वट करने पर रोक लगा दी है।
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वास्तव में सुप्रीम कोर्ट ने हिमाचल प्रदेश में बड़े पैमाने पर पेड़ों की कटाई संबंधी रिपोर्ट देखने पर यह निर्णय लिया। सुप्रीम कोर्ट ने इस रिपोर्ट पर राज्य सरकार को जवाब दाखिल करने के लिए कहा है। पीठ ने राज्य सरकार को यह सुनिश्चित करने के लिए वन को और किसी तरह का नुकसान नहीं होना चाहिए। पीठ ने स्पष्ट शब्दों में कहा है कि हिमाचल प्रदेश के अनमोल और बेशकीमती वन को किसी तरह का नुकसान नहीं होना चाहिए।