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देशभर के थानों में सीसीटीवी फुटेज सुरक्षित रखने वाली याचिका पर फैसला सुरक्षित

Wed, 25 Nov 2020 02:49 AM IST
Jeet Kumar न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: Jeet Kumar Updated Wed, 25 Nov 2020 02:49 AM IST
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Supreme Court reserves order in plea for CCTVs in police stations
सुप्रीम कोर्ट - फोटो : ANI

सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को देश भर के पुलिस थानों में सीसीटीवी कैमरों का मजबूत तंत्र स्थापित करने की से जुड़े एक मामले आदेश सुरक्षित रख लिया।

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जस्टिस आरएफ नरीमन, जस्टिस केएम जोसेफ और जस्टिस अनिरुद्ध बोस की पीठ ने 45 दिनों से अधिक के सीसीटीवी फुटेज को सुरक्षित रखने और एकत्रित करने की मांग पर शुक्रवार तक न्यायमित्र वरिष्ठ अधिवक्ता सिद्धार्थ दवे को एक व्यापक नोट प्रस्तुत करने का निर्देश दिया।
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पीठ ने कहा,  हम इस संदर्भ में आदेश जारी करेेंगे जिससे सीसीटीवी कैमरे लगाने और फुटेज सुरक्षित रखने का एक मजबूत तंत्र बनेगा। सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में बढ़ती हिरासत यातना के मामले से निपटनने और थानों में मानवाधिकार उल्लंघन रोकने के लिए देश के हर  थाने में सीसीटीवी कैमरे लगाने का निर्देश दिया था।
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न्यायमित्र सिद्धार्थ दवे ने कोर्ट को बताया कि उसके 2018 के आदेश के अनुपालन पर कई राज्यों ने हलफनामा दाखिल कर दिया है। उन्होंने बताया कि मध्य प्रदेश के 1117 थानों में 859 कैमरे लगे हैं। वहीं मिजोरम के 40 थानों में 147 सीसीटीवी कैमरे लगे हैं। जबकि मणिपुर ने 87 और सिक्किम की जेल में दो कैमरे लगे हैं। यहां थानों में कैमरे नहीं है।


पीठ ने इसके बाद सभी राज्यों को एक अतिरिक्त हलफनामा दाखिल कर हर जिले में थानों की संख्या और उनमें लगे कैमरों का विवरण देने को कहा। साथ ही यह भी बताना होगा कि कितने कैमरे सही काम कर रहे हैं और लापरवाही के लिए जिम्मेदारी भी तय करनी होगी।

जस्टिस नरीमन ने कहा, सीसीटीवी कैमरे में 45 दिनों से अधिक समय के फुटेज अपने आप डिलीट हो जाते हैं। यदि कोई अत्याचार होता है, तो उसे तुरंत रिपोर्ट किया जाना चाहिए और फुटेज को संरक्षित करने का प्रयास किया जाना चाहिए। उन्होंने कहा, अगले आदेशों में समिति में नागरिकों और मानवाधिकार कार्यकर्ताओं की उपस्थिति पर विचार किया जाएगा।

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