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केंद्र सरकार व सेना को कोर्ट की फटकार: निजी संस्था को रक्षा भूमि के उपयोग की अनुमति देने का मामला

Sun, 12 Dec 2021 06:36 AM IST
Jeet Kumar अमर उजाला ब्यूरो, नई दिल्ली।
अमर उजाला ब्यूरो, नई दिल्ली। Published by: Jeet Kumar Updated Sun, 12 Dec 2021 06:36 AM IST
सार

अदालत ने मामले में स्वयं संज्ञान लेते हुए केंद्र सरकार के वकील को सरकार से निर्देश प्राप्त कर जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया। अदालत ने सुनवाई 16 दिसंबर तय की है।

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Supreme Court reprimands Central Government and the Army for allowing the use of defense land to a private entity
सुप्रीम कोर्ट - फोटो : Social Media

विस्तार

उच्च न्यायालय ने सेना और केंद्र सरकार को एक निजी खेल संस्था को दिल्ली के छावनी क्षेत्र में रक्षा भूमि से अपना कार्यालय चलाने की अनुमति देने पर फटकार लगाई।

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न्यायमूर्ति रेखा पल्ली राजस्थान इक्वेस्ट्रियन फाउंडेशन व इक्वेस्ट्रियन फाउंडेशन ऑफ इंडिया के साथ कई विवादों के मामलों की सुनवाई कर रही है। अदालत ने इस बात पर आपत्ति जताई कि फाउंडेेशन के कार्यालय का पता दिल्ली कैंट स्थित बी स्क्वाड्रन, 61 कैवेलरी, करियप्पा मार्ग बताया गया है।
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अदालत ने आश्चर्य जताते हुए कहा कि सेना एक निजी संस्था को अपनी भूमि के उपयोग की अनुमति कैसे दे सकती है? अदालत ने मामले में स्वयं संज्ञान लेते हुए केंद्र सरकार के वकील को सरकार से निर्देश प्राप्त कर जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया। अदालत ने सुनवाई 16 दिसंबर तय की है।
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अदालत को बताया गया कि केंद्रीय युवा मामले और खेल मंत्रालय की ओर से जमीन की मांग की गई थी। इसी कारण यह जमीन आवंटित की गई है। ब्रिगेडियर समीर लांबा ने अदालत को बताया कि सेना की एक समृद्ध खेल परंपरा रही है और इसने कई ओलंपियन पैदा किए हैं और घुड़सवारी के संरक्षक रहे हैं।

अदालत ने इस तर्क को खारिज करते हुए कहा कि यदि वह इंडिया गेट मांगेंगे तो क्या आप इंडिया गेट भी दे देंगे? यह आपका अच्छा आचरण हो सकता है, लेकिन इससे कोई फर्क नहीं पड़ता। आप एक निजी निकाय को अपनी जमीन का उपयोग करने की अनुमति कैसे देते हैं?

अदालत ने कहा एक स्वतंत्र निकाय को रक्षा उद्देश्यों के लिए निर्धारित भूमि का उपयोग करने की अनुमति नहीं दी जा सकती है। हालांकि सरकार की ओर से अपने निर्णय को सही ठहराने का प्रयास करते हुए बताया गया कि फाउंडेशन को उसके कार्यालय के लिए केवल एक छोटा 20 फीट गुणा 12 फीट स्थान दिया गया है, लेकिन अदालत ने इस तर्क को खारिज कर दिया। अदालत ने अधिकारियों को मामले से संबंधित फाइलें पेश करने के अलावा कार्यवाही के दौरान एक सक्षम अधिकारी को मौजूद रहने का निर्देश दिया है।


11वीं जमानत याचिका दायर करने पर 25 हजार रुपये जुर्माना
अदालत ने एक व्यक्ति पर एक साल में 11 जमानत याचिकाएं दाखिल करने पर 25 हजार रुपये जुर्माना लगाते हुए याचिका खारिज कर दी। अदालत ने कहा इस तरह की ‘तुच्छ’ याचिकाओं के लंबित रहने से अदालतों में मुकदमों की बाढ़ आ जाती है और कीमती न्यायिक समय बर्बाद होता है। अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश रविंदर बेदी ने धोखाधड़ी और साजिश के मामले में आरोपी पर जुर्माना लगाते हुए कहा कि उसने परिस्थितियों में कोई बदलाव न होने पर भी 11वीं बार जमानत याचिका दायर की है।

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