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Supreme Court: वायुसेना को देना होगा 1.54 करोड़ का मुआवजा; सुप्रीम कोर्ट ने खारिज की समीक्षा याचिका
Fri, 12 Apr 2024 05:27 PM IST
श्वेता महतो
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: श्वेता महतो
Updated Fri, 12 Apr 2024 05:27 PM IST
सार
सुप्रीम कोर्ट ने याचिका खारिज करते हुए कहा कि समीक्षा याचिका में जिस राहत की मांग की गई है उस मांग के लिए कोई पर्याप्त आधार नहीं दिया गया है। इसलिए यह याचिका खारिज कर दी गई है।
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सुप्रीम कोर्ट
- फोटो : ANI
विस्तार
जम्मू कश्मीर के सांबा में साल 2002 में एक सैन्य अस्पताल में संक्रमित रक्त चढ़ाने के कारण एक बुजुर्ग को एचआईवी हो गया था। इस मामले में सुप्रीम कोर्ट ने भारतीय वायु सेना (आईएएफ) को एचआईवी से पीड़ित बुजुर्ग को मुआजवे के तौर पर लगभग 1.54 करोड़ रुपये का भुगतान करने का निर्देश दिया था। हलांकि, अदालत ने इस मामले पर अपने फैसले की समीक्षा की मांग वाली याचिका को खारिज कर दिया है। जस्टिस दिपांकर दत्ता और पीबी वराले की पीठ ने कहा कि पिछले साल सितंबर के फैसले में ऐसी कोई गलती नहीं है कि इस पर पुनर्विचार किया जाए।
सुप्रीम कोर्ट ने की याचिका खारिज
पीठ ने तीन अप्रैल को जारी अपने आदेश में कहा, "हमने 26 सितंबर 2023 के फैसले और आदेश की समीक्षा याचिका का अध्ययन किया। इसमें कोई ऐसी गलती नहीं है, जिसपर हमें पुनर्विचार करना पड़े।" सुप्रीम कोर्ट ने याचिका खारिज करते हुए कहा, "समीक्षा याचिका में जिस राहत की मांग की गई है उस मांग के लिए कोई पर्याप्त आधार नहीं दिया गया है। इसलिए यह याचिका खारिज कर दी गई है।"
13 दिसंबर 2001 में भारतीय संसद भवन पर आतंकी हमले के बाद शुरू किए गए ऑपरेशन पराक्रम के दौरान कॉम्बटेंट रैंक पर कार्यरत व्यक्ति के बीमार होने के बाद उन्हें अस्पताल में भर्ती कराया गया। उन्हें एक यूनिट रक्त चढ़ाना पड़ा था।
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छह महीने के भीतर देना होगा मुआवजा
सुप्रीम कोर्ट ने अपने सितंबर के फैसले में कहा कि अपीलकर्ता मुआवजे का हकदार है। इसी के साथ चिकित्सा लापरवाही के कारण मुआवजे के तौर पर 1,54,73,000 रुपये देने को कहा गया है। अदालत ने कहा कि इस मामले में किसी पर व्यक्तिगत तौर पर दायित्व नहीं सौंपा जा सकता है। आईएएफ और भारतीय सेना दोनों ही उत्तरदायी है। आईएएफ द्वारा अपीलकर्ता को छह महीनों के भीतर मुआवजा देने को कहा गया है।
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सुप्रीम कोर्ट ने की याचिका खारिज
पीठ ने तीन अप्रैल को जारी अपने आदेश में कहा, "हमने 26 सितंबर 2023 के फैसले और आदेश की समीक्षा याचिका का अध्ययन किया। इसमें कोई ऐसी गलती नहीं है, जिसपर हमें पुनर्विचार करना पड़े।" सुप्रीम कोर्ट ने याचिका खारिज करते हुए कहा, "समीक्षा याचिका में जिस राहत की मांग की गई है उस मांग के लिए कोई पर्याप्त आधार नहीं दिया गया है। इसलिए यह याचिका खारिज कर दी गई है।"
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13 दिसंबर 2001 में भारतीय संसद भवन पर आतंकी हमले के बाद शुरू किए गए ऑपरेशन पराक्रम के दौरान कॉम्बटेंट रैंक पर कार्यरत व्यक्ति के बीमार होने के बाद उन्हें अस्पताल में भर्ती कराया गया। उन्हें एक यूनिट रक्त चढ़ाना पड़ा था।
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छह महीने के भीतर देना होगा मुआवजा
सुप्रीम कोर्ट ने अपने सितंबर के फैसले में कहा कि अपीलकर्ता मुआवजे का हकदार है। इसी के साथ चिकित्सा लापरवाही के कारण मुआवजे के तौर पर 1,54,73,000 रुपये देने को कहा गया है। अदालत ने कहा कि इस मामले में किसी पर व्यक्तिगत तौर पर दायित्व नहीं सौंपा जा सकता है। आईएएफ और भारतीय सेना दोनों ही उत्तरदायी है। आईएएफ द्वारा अपीलकर्ता को छह महीनों के भीतर मुआवजा देने को कहा गया है।