फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   India News ›   Supreme Court rejects Gujarat electricity body pleas Says Can't be guided only by own commercial interests

Supreme Court: 'सिर्फ मुनाफे की नहीं, राज्य सरकार की नीति की भी माने', सुप्रीम कोर्ट ने GUVNL को लगाई फटकार

Mon, 04 Aug 2025 09:25 PM IST
शुभम कुमार न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: शुभम कुमार Updated Mon, 04 Aug 2025 09:25 PM IST
सार

सुप्रीम कोर्ट ने गुजरात ऊर्जा विकास निगम लिमिटेड (जीयूवीएनएल) को एक मामले में फटकार लगाई है। कोर्ट ने कहा कि एक सरकारी संस्था को सिर्फ अपने फायदे नहीं, बल्कि सरकार की नीतियों का पालन करते हुए आदर्श नागरिक की तरह व्यवहार करना चाहिए।

विज्ञापन
Supreme Court rejects Gujarat electricity body pleas Says Can't be guided only by own commercial interests
सुप्रीम कोर्ट - फोटो : एएनआई

विस्तार

सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार एक मामले में सुनवाई के दौरान गुजरात ऊर्जा विकास निगम लिमिटेड (जीयूवीएनएल) को कड़ी फटकार लगाई। कोर्ट ने कहा कि जीयूवीएनएल एक सरकारी संस्था है, इसलिए उसे सिर्फ अपने फायदे के बारे में नहीं सोचना चाहिए। उसे सरकार की नीति का भी पालन करना चाहिए और ऐसा व्यवहार करना चाहिए जैसा एक आदर्श नागरिक करता है।

विज्ञापन

बता दें कि यह मामला चार कंपनियों से जुड़ा था, जिन्होंने अपनी पवन ऊर्जा परियोजनाओं से बिजली बेचने के लिए उचित दाम (टैरिफ) तय करने की मांग की थी। इन कंपनियों ने गुजरात इलेक्ट्रिसिटी रेगुलेटरी कमीशन (जीईआरसी) से शिकायत की थी। जीईआरसी और फिर अपीलीय बिजली ट्रिब्यूनल (एपीटीईएल) ने इन कंपनियों के पक्ष में फैसला दिया था।

विज्ञापन


ये भी पढ़ें:- Mizoram: मिजोरम सरकार ने राजधानी स्थानांतरित करने के दावे को किया खारिज, कहा– कागजी गलती से फैला भ्रम
विज्ञापन
विज्ञापन


सुप्रीम कोर्ट ने जीयूवीएनएल की मांग को बताया गलत
हालांकि जीयूवीएनएल ने इन फैसलों को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी थी। मामले में जीयूवीएनएल का कहना था कि कंपनियों ने जो बिजली बेचने का समझौता किया था, उसमें तय दाम से अलग टैरिफ नहीं मांगा जा सकता। लेकिन सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि जीयूवीएनएल की बात गलत है, क्योंकि कंपनियों ने एक टैक्स योजना का लाभ नहीं लिया था। इसलिए उन पर कम टैरिफ लागू नहीं किया जा सकता।

ये भी पढ़ें:- Indian Army: IIT मद्रास में सेना का 'अग्निशोध' रिसर्च सेल शुरू, रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भरता की ओर बड़ा कदम

कोर्ट ने जीयूवीएनएल को बताया लालची
कोर्ट ने आगे जीयूवीएनएल के व्यवहार को 'शाइलॉक' जैसे लालची किरदार से तुलना करते हुए कहा कि यह तरीका एक सरकारी संस्था के लिए ठीक नहीं है। कोर्ट ने साफ किया कि जीयूवीएनएल को सिर्फ मुनाफा नहीं देखना चाहिए, बल्कि सरकार की नीतियों, खासकर नवीकरणीय ऊर्जा को बढ़ावा देने की नीति का पालन करना चाहिए। इसके साथ ही कोर्ट ने 2023 में दिया गया एक पुराना आदेश भी रद्द कर दिया, जिसमें कहा गया था कि टैरिफ पर फैसला सुप्रीम कोर्ट की इजाजत के बिना नहीं हो सकता। ऐसे में ये अब साफ हो गया कि जीईआरसी इस पर अंतिम फैसला ले सकती है।

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News apps, iOS Hindi News apps और Amarujala Hindi News apps अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed