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Indian Army: IIT मद्रास में सेना का 'अग्निशोध' रिसर्च सेल शुरू, रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भरता की ओर बड़ा कदम

Mon, 04 Aug 2025 07:49 PM IST
शुभम कुमार न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चेन्नई
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चेन्नई Published by: शुभम कुमार Updated Mon, 04 Aug 2025 07:49 PM IST
सार

भारतीय सेना ने आत्मनिर्भर रक्षा तकनीक की दिशा में बड़ा कदम उठाते हुए आईआईटी मद्रास में ‘अग्निशोध’ नाम से रिसर्च सेल शुरू किया है। सेना प्रमुख जनरल उपेंद्र द्विवेदी ने इसका उद्घाटन किया। यह पहल आधुनिक तकनीकों जैसे एआई, रोबोटिक्स व ड्रोन पर शोध को बढ़ावा देगी। साथ ही सेना की परिवर्तन रणनीति के स्तंभ को भी मजबूती देगी।

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Indian Army's 'Agnishodh' research cell started in IIT Madras General Upendra Dwived News In Hindi
आईआईटी मद्रास के छात्रों के साथ सेना प्रमुख जनरल उपेंद्र द्विवेदी - फोटो : एक्स@ANI

विस्तार

भारतीय सेना ने रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भरता (आत्मनिर्भर भारत) की दिशा में एक बड़ा कदम उठाया है। इसके तहत भारतीय सेना ने आईआईटी मद्रास के साथ मिलकर 'अग्निशोध' नाम से एक रिसर्च सेल (आईएआरसी) की स्थापना की है। इस रिसर्च सेंटर का औपचारिक उद्घाटन सेना प्रमुख जनरल उपेंद्र द्विवेदी ने अपनी दो दिवसीय चेन्नई यात्रा के दौरान किया।

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क्या है  'अग्निशोध' रिसर्च सेल
बता दें कि ‘अग्निशोध’ भारतीय सेना और आईआईटी मद्रास के बीच साझेदारी का प्रतीक है, जिसका उद्देश्य रक्षा तकनीक में नई खोज और नवाचार को बढ़ावा देना है। यह रिसर्च सेल आधुनिक युद्ध प्रणाली, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, रोबोटिक्स, ड्रोन टेक्नोलॉजी और अन्य उन्नत तकनीकों पर फोकस करेगा, जिससे भारतीय सेना को भविष्य की जरूरतों के अनुसार तकनीकी रूप से और मजबूत बनाया जा सके।

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भारतीय सेना की अहम रणनीति का हिस्सा
इस रिसर्च सेल की स्थापना के बारे में रक्षा मंत्रालय ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पोस्ट कर जानकारी दी। पोस्ट में बताया गया कि यह पहल भारतीय सेना की ‘पांच स्तंभों की परिवर्तन रणनीति’ का हिस्सा है, जिसे सेना प्रमुख ने तैयार किया है। ‘अग्निशोध’ खासतौर पर आधुनिकीकरण और तकनीकी समावेशन वाले स्तंभ को आगे बढ़ाता है।


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शोध और सेना के बीच सेतु बनेगा ‘अग्निशोध’
रक्षा मंत्रालय ने आगे बताया कि इस पहल का उद्देश्य शैक्षणिक अनुसंधान और सेना की वास्तविक जरूरतों के बीच एक सीधा और प्रभावी संबंध स्थापित करना है। यह भारतीय सेना को अत्याधुनिक तकनीक के साथ तेजी से जुड़ने का मौका देगा। गौरतलब है कि हाल के वर्षों में भारतीय सेना ने देश के प्रमुख तकनीकी संस्थानों के साथ अपने संबंध मजबूत किए हैं ताकि नई तकनीकें तेजी से विकसित की जा सकें और उन्हें जमीनी स्तर पर लागू किया जा सके।

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