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आधार की सांविधानिक वैधता का फैसला बरकरार, पुनर्विचार याचिकाएं खारिज
Wed, 20 Jan 2021 06:33 PM IST
गौरव पाण्डेय
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: गौरव पाण्डेय
Updated Wed, 20 Jan 2021 06:33 PM IST
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सर्वोच्च न्यायालय
- फोटो : पीटीआई
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सुप्रीम कोर्ट ने आधार की सांविधानिक वैधता को चुनौती देने वाली पुनर्विचार याचिकाओं को खारिज कर दिया है। पुनर्विचार याचिकाओं पर चैम्बर में विचार करने के बाद जस्टिस ए एम खानविलकर की अध्यक्षता वाली पांच सदस्यीय पीठ ने 4:1 के बहुमत से यह निर्णय लिया है।
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जस्टिस खानविलकर, जस्टिस अशोक भूषण, जस्टिस एस अब्दुल नजीर और जस्टिस बीआर गवई ने माना कि सितंबर, 2018 में आधार को सांविधानिक रूप से जायज ठहराए जाने के पांच सदस्यीय पीठ के फैसले पर पुनर्विचार करने की जरूरत नहीं है।
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वहीं जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़ ने एक बार फिर से बहुमत के निर्णय से अलग अपनी राय दी। उल्लेखनीय है कि 2018 में जिस पांच सदस्यीय संविधान पीठ ने आधार पर फैसला दिया था, जस्टिस चंद्रचूड़ भी उस पीठ का हिस्सा थे। तब भी जस्टिस चंद्रचूड़ ने बहुमत के फैसले से अलग आधार को असांविधानिक बताया था।
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पुनर्विचार याचिकाओं पर विचार के बाद पीठ ने फैसले में कहा, हमने 26 सितंबर 2018 के फैसले के खिलाफ दायर पुनर्विचार याचिकाओं और उनमें दिए गए तर्कों पर गौर करने के बाद पाया कि उस फैसले पर पुनर्विचार करने का कोई कारण नहीं है। बहुमत ने अपने फैसले में कहा है कि बाद में कानून में किए गए बदलाव या बड़ी पीठ द्वारा दिया गया आदेश/ फैसला, पुनर्विचार का आधार नहीं हो सकता।
पुनर्विचार का आधार न मानना सांविधानिक त्रुटि : जस्टिस चंद्रचूड़
बहुमत के फैसले से अलग राय रखने वाले जस्टिस चंद्रचूड़ का मानना है कि यह कहना कि पुनर्विचार का कोई आधार नहीं बनता, सांविधानिक त्रुटि है।
उन्होंने कहा कि अगर पुनर्विचार याचिकाओं को खारिज किया जाता है और रॉजर मैथ्यू मामले में यदि बड़ी पीठ इस फैसले से असहमत हो जाती है, तो इसके गंभीर परिणाम होंगे। यह न्यायिक आचरण के लिए सही नहीं होगा, बल्कि न्याय का अंत हो जाएगा।
पूर्व चीफ जस्टिस रंजन गोगोई की पीठ के समक्ष रॉजर मैथ्यू बनाम साउथ इंडियन बैंक लिमिटेड का मामला आया था। उस पीठ ने बहुमत से आधार बिल को धन विधेयक की तरह पारित किए जाने के आकलन पर संदेह जताया था। जिसके बाद जस्टिस गोगोई ने मैथ्यू मामले को बड़ी पीठ के पास भेज दिया था।
क्या था 2018 के फैसले में
2018 को सुप्रीम कोर्ट ने अपने फैसले में आधार की सांविधानिक वैधता को बरकरार रखा था। हालांकि पांच सदस्यीय पीठ में बहुमत वाले चार जजों ने फैसले में कहा था कि आधार बैंक खातों या मोबाइल कनेक्शन के लिए अनिवार्य नहीं होगा। न ही स्कूल में दाखिले के लिए जरूरी होगा। सुप्रीम कोर्ट ने कहा था कि आधार किसी के निजता के अधिकार का उल्लंघन नहीं करता।
हालांकि सुप्रीम कोर्ट ने अपने फैसले में आधार अधिनियम की धारा-57 को खारिज कर दिया था, जिसके तहत निजी कंपनियों और कॉरपोरेट को बायोमेट्रिक डेटा लेने और इस्तेमाल की इजाजत दी गई थी।