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फारूक अब्दुल्ला के खिलाफ याचिका खारिज, सुप्रीम कोर्ट ने कहा- सरकार से अलग विचार होना देशद्रोह नहीं

Wed, 03 Mar 2021 12:21 PM IST
दीप्ति मिश्रा न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: दीप्ति मिश्रा Updated Wed, 03 Mar 2021 12:21 PM IST
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Supreme Court refusing to entertain a PIL against former Jammu Kashmir CM Farooq Abdullah  government  seditious
फारूक अब्दुल्ला - फोटो : बासित जरगर

सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार को अनुच्छेद 370 को हटाए जाने को लेकर दिए गए बयान पर जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री और नेशनल कॉन्फ्रेंस के अध्यक्ष फारूक अब्दुल्ला के खिलाफ देशद्रोह का मुकदमा चलाए जाने की मांग करने वाली याचिका खारिज कर दी। शीर्ष अदालत ने कहा कि सरकार की राय से अलग राय रखने वाले विचारों की अभिव्यक्ति को देशद्रोह नहीं कहा जा सकता है।

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न्यायमूर्ति संजय किशन कौल की अध्यक्षता वाली सर्वोच्च न्यायालय की एक पीठ ने जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री फारूक अब्दुल्ला के खिलाफ जनहित याचिका पर विचार करने से इनकार करते हुए कहा कि सरकार की राय से भिन्न विचारों की अभिव्यक्ति को देशद्रोही नहीं कहा जा सकता है।  याचिका में मांग की गई थी कि फारूक अब्दुल्ला के बयान को देखते हुए उन पर देशद्रोह का मामला दर्ज किया जाए। सुप्रीम कोर्ट ने फारूक अब्दुल्ला के खिलाफ देशद्रोह का मुकदमा चलाने वाली याचिका को खारिज कर दिया। साथ ही पीठ ने फारूक अब्दुल्ला के खिलाफ आरोपों को साबित नहीं कर पाने पर याचिकाकर्ता पर 50 हजार रुपये का जुर्माना भी लगाया है।

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याचिकाकर्ता ने आरोप लगाया था कि अब्दुल्ला ने अनुच्छेद-370 पर भारत के खिलाफ चीन और पाकिस्तान की मदद मांगी थी। इस आरोप को नेशनल कॉन्फ्रेंस ने खारिज कर दिया था। पार्टी ने कहा कि अब्दुल्ला ने कभी भी नहीं कहा कि चीन के साथ मिलकर हम अनुच्छेद 370 की वापसी कराएंगे, उनके बयानों को गलत तरीके से और तोड़-मरोड़ कर पेश किया गया।

 




बता दें कि केंद्र सरकार ने 5 अगस्त, 2019 को जम्मू-कश्मीर को विशेष राज्य का दर्जा देने वाला अनुच्छेद-370 को निष्प्रभावी कर दिया था, जिसका देश की कई राजनीतिक पार्टियों ने विरोध किया था। इसी को लेकर फारूक अब्दुल्ला के एक बयान के विरोध में जनहित याचिका दायर कर देशद्रोह का मुकदमा चलाने की मांग की गई थी। 

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