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फैसला: सुप्रीम कोर्ट ने मद्रास हाईकोर्ट की टिप्पणियां हटाने से किया इनकार, कहा- मीडिया संस्थानों की शिकायत न करे चुनाव आयोग

Thu, 06 May 2021 04:53 PM IST
कुमार संभव न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: कुमार संभव Updated Thu, 06 May 2021 04:53 PM IST
सार

न्यायमूर्ति डी वाई चंद्रचूड़ और न्यायमूर्ति एमआर शाह की पीठ ने माना कि उच्च न्यायालय की टिप्पणियां कठोर थीं। हालांकि, उन्हें हटाने से इनकार करते हुए कहा कि यह न्यायिक आदेश का हिस्सा नहीं है।

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Supreme Court refuses to remove Madras High Court comments says Election Commission should not complain to media institutions
सर्वोच्च न्यायालय - फोटो : ANI

विस्तार

उच्चतम न्यायालय ने देश में कोविड-19 के मामले बढ़ने के लिए चुनाव आयोग को जिम्मेदार ठहराने वाली मद्रास उच्च न्यायालय की टिप्पणियों को हटाने से गुरुवार (6 मई) को इनकार कर दिया। साथ ही, मीडिया को न्यायिक कार्यवाही के दौरान टिप्पणियों की रिपोर्टिंग करने से रोकने का अनुरोध भी ठुकरा दिया। न्यायालय ने कहा कि यह एक प्रतिगामी कदम होगा।

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न्यायमूर्ति डी वाई चंद्रचूड़ और न्यायमूर्ति एमआर शाह की पीठ ने माना कि उच्च न्यायालय की टिप्पणियां कठोर थीं। हालांकि, उन्हें हटाने से इनकार करते हुए कहा कि यह न्यायिक आदेश का हिस्सा नहीं है। पीठ ने कहा कि मीडिया को अदालत की कार्यवाही की रिपोर्टिं करने का अधिकार है। अदालत ने कहा, 'बिना सोचे-समझे की गईं टिप्पणियों की गलत व्याख्या किए जाने की आशंका होती है।'
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शीर्ष अदालत ने कोविड-19 के दौरान सराहनीय काम करने के लिए उच्च न्यायालयों की प्रशंसा की। साथ ही, कहा कि वे महामारी प्रबंधन पर प्रभावी रूप से नजर रख रहे हैं। पीठ ने कहा कि मीडिया को सुनवाई के दौरान की गई टिप्पणियों की रिपोर्टिंग करने से रोका नहीं जा सकता।
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उच्चतम न्यायालय ने कहा, 'उच्च न्यायालयों को टिप्पणियां करने और मीडिया को टिप्पणियों की रिपोर्टिंग करने से रोकना प्रतिगामी कदम होगा।' पीठ ने कहा कि अदालतों को मीडिया की बदलती प्रौद्योगिकी को लेकर सजग रहना होगा। उसने कहा कि यह अच्छी बात नहीं है कि उसे न्यायिक कार्यवाही की रिपोर्टिंग करने से रोका जाए। बता दें कि यह फैसला मद्रास उच्च न्यायालय की टिप्पणी के खिलाफ निर्वाचन आयोग की एक अपील पर आया है।


उच्च न्यायालय ने कोविड-19 महामारी की दूसरी लहर के दौरान संक्रमण के मामले बढ़ने के लिए 26 अप्रैल को चुनाव आयोग की आलोचना करते हुए उसे इस संक्रामक रोग के फैलने के लिए जिम्मेदार बताया था और उसे ‘‘सबसे गैरजिम्मेदार संस्थान’’ बताया और यहां तक कि यह भी कहा था कि उसके अधिकारियों पर हत्या का मुकदमा चलाना चाहिए।

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