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कश्मीर में दिलबाग सिंह को कार्यकारी डीजीपी बनाने पर दखल से सुप्रीम कोर्ट का इनकार

Wed, 12 Sep 2018 03:41 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो, नई दिल्ली
अमर उजाला ब्यूरो, नई दिल्ली Updated Wed, 12 Sep 2018 03:41 AM IST
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Supreme Court refuses to interfere with Dilbag Singh in making Executive DGP in jammu and Kashmir
supreme court
सुप्रीम कोर्ट ने पिछले हफ्ते जम्मू एवं कश्मीर सरकार द्वारा कार्यवाहक पुलिस महानिदेशक नियुक्त करने के निर्णय पर फिलहाल दखल देने से इनकार किया है। शीर्ष अदालत उस याचिका पर सुनवाई कर रही है जिसमें राज्य सरकार सुप्रीम कोर्ट में उस आदेश में बदलाव करने की गुहार की गई है कि जिसमें कार्यवाहक महानिदेशक की नियुक्ति पर रोक लगाई गई थी। मालूम हो कि गत छह सितंबर को राज्य सरकार ने दिलबाग सिंह को कार्यवाहक पुलिस महानिदेशक नियुक्त किया था।  
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चीफ जस्टिस दीपक मिश्रा की अध्यक्षता वाली तीन सदस्यीय पीठ केसमक्ष मंगलवार को सुनवाई केदौरान जम्मू एवं कश्मीर सरकार की ओर से पेश वकील शोएब आलम ने बताया कि कार्यवाहक पुलिस महानिदेशक की नियुक्ति अंतरिम व्यवस्था है। ऐसा राज्य के हालात और कानून व्यवस्था के मद्देनजर किया गया है। उन्होंने कहा कि स्थायी पुलिस महानिदेशक की नियुक्ति संघ लोक सेवा आयोग(यूपीएससी) की सलाह पर ही होगी। 
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शोएब आलम ने यह भी कि राज्य को बिना पुलिस प्रमुख केनहीं छोड़ा जा सकता। साथ ही उन्होंने बताया कि डीजीपी एसपी वैद्य के तबादले के 12 घंटे के भीतर यूपीएससी सलाह लेने की कवायद शुरू कर दी गई थी। इसकेबाद पीठ ने राज्य सरकार को याचिका की प्रति केंद्र सरकार को देने केलिए कहा है। साथ ही शीर्ष अदालत ने अटॉर्नी जनरल को इस मामले में सहयोग करने के लिए कहा है। 
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मालूम हो कि प्रकाश सिंह मामले में सुप्रीम कोर्ट ने सभी राज्यों को निर्देश दिया था कि वह कार्यवाहक पुलिस महानिदेशक नियुक्त न करें। साथ ही तमाम राज्य सरकारों को पुलिस महानिदेशक या पुलिस आयुक्त पद केदावेदारों के नाम संघ लोक सेवा आयोग(यूपीएससी) केपास विचार के लिए भेजने के लिए कहा था। नियुक्ति यूपीएससी की सलाह-मश्विरा केबाद करने केलिए कहा गया था।  

वहीं प्रकाश सिंह की ओर से पेश वकील प्रशांत भूषण ने कहा कि बिना राज्य सुरक्षा आयुक्त की सलाह से डीजीपी को नहीं हटाया जा सकता। उन्होंने कहा कि कार्यवाहक डीजीपी वरिष्ठता केहिसाब से पांचवे नंबर पर हैं, ऐसे में उनकी नियुक्त सही नहीं है। उन्होंने यह भी आरोप लगाया गया कि कार्यवाहक डीजीपी दिलबाग सिंह एक भर्ती घोटाले में निलंबित भी हो चुके हैं। आगे की सुनवाई अगले हफ्ते होगी। 

मालूम हो कि गत जुलाई में शीर्ष अदालत ने सभी राज्यों को निर्देश दिया था कि वह किसी भी पुलिस अधिकारी को कार्यवाहक पुलिस महानिदेशक नियुक्त न करें। साथ ही तमाम राज्य सरकारों को पुलिस महानिदेशक या पुलिस आयुक्त पद केदावेदारों के नाम संघ लोक सेवा आयोग(यूपीएससी) केपास विचार के लिए भेजने के लिए कहा था। यूपीएसपी इन नामों पर विचार करने केबाद तीन नामों को शार्टलिस्ट करेगा। 


राज्य या केंद्रशासित प्रदेश इन तीन नामों में से एक पर अपनी मुहर लगा सकती है। पीठ ने साथ ही यह भी कहा था कि राज्य सरकार पुलिस महानिदेशक या पुलिस आयुक्त का नाम तय करने केलिए पहले यह सुनिश्चित कर ले कि उनका कार्यकाल पर्याप्त बचा हो। पीठ ने यह भी साफ किया था कि अगर किसी राज्य में पुलिस महानिदेशक या पुलिस आयुक्त की नियुक्ति को लेकर कोई कानून या प्रावधान है तो उस पर रोक होगी।  
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