फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   India News ›   Supreme Court refuses to entertain plea to declare Law Commission as statutory body

Supreme Court: विधि आयोग को वैधानिक निकाय बनाने की मांग वाली PIL खारिज, अदालत ने कहा- कानून बनाना विधायी मामला

Fri, 13 Jan 2023 06:00 PM IST
गुलाम अहमद न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: गुलाम अहमद Updated Fri, 13 Jan 2023 06:00 PM IST
सार

Supreme Court:  सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि यह स्थापित नियम है कि कानून बनाने के लिए संसद को निर्देश जारी नहीं किया जा सकता है। यह मामला विशेष रूप से विधायिका के दायरे में आता है। हम याचिका पर विचार करने से इनकार करते हैं।

विज्ञापन
Supreme Court refuses to entertain plea to declare Law Commission as statutory body
सुप्रीम कोर्ट - फोटो : सोशल मीडिया

विस्तार

सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को विधि आयोग को वैधानिक निकाय घोषित करने की मांग वाली जनहित याचिका पर सुनवाई करने से इनकार कर दिया। प्रधान न्यायाधीश (सीजेआई) डीवाई चंद्रचूड़ और न्यायमूर्ति पीएस नरसिम्हा की पीठ ने अटार्नी जनरल आर वेंकटरमणि की इस दलील पर गौर किया कि 22वां विधि आयोग पहले ही गठित किया जा चुका है।

विज्ञापन


शीर्ष अदालत ने कहा कि यह स्थापित नियम है कि कानून बनाने के लिए संसद को निर्देश जारी नहीं किया जा सकता है। यह मामला विशेष रूप से विधायिका के दायरे में आता है। हम याचिका पर विचार करने से इनकार करते हैं। शीर्ष अदालत ने याचिकाकर्ता अधिवक्ता अश्विनी कुमार उपाध्याय की इस दलील पर भी गौर किया कि वह विधि आयोग के समक्ष इस मुद्दे को उठाएंगे।
विज्ञापन


कानून एवं न्याय मंत्रालय ने दिसंबर 2021 में दायर जनहित याचिका (पीआईएल) के जवाब में कहा था कि विधि आयोग को वैधानिक निकाय बनाने का कोई प्रस्ताव विचाराधीन नहीं है। मंत्रालय ने अपने हलफनामे में कहा था कि उपाध्याय द्वारा दायर याचिका में सुनवाई के लिए लायक कोई गुण नहीं है।
विज्ञापन
विज्ञापन


इस याचिका में गृह मंत्रालय और कानून एवं न्याय मंत्रालय के साथ-साथ भारत के विधि आयोग को पक्षकार बनाया गया था और कहा गया था कि 21वें विधि आयोग का कार्यकाल समाप्त होने के बाद भी जारी है, लेकिन केंद्र सरकार ने न तो इसके अध्यक्ष और सदस्यों का कार्यकाल बढ़ाया है और न ही 22वें विधि आयोग को अधिसूचित किया गया है।

याचिकाकर्ता की क्या थी मांग
उपाध्याय ने अधिवक्ता अश्विनी कुमार दुबे के जरिए दायर याचिका में कहा था कि 19 फरवरी, 2020 को केंद्र ने 22वें विधि आयोग के गठन को मंजूरी दे दी, लेकिन आज तक अध्यक्ष और सदस्यों की नियुक्ति नहीं की गई है। 22वें विधि आयोग के अध्यक्ष और सदस्यों को नियुक्त करने के लिए केंद्र को निर्देश देने की मांग करने वाली याचिका में शीर्ष अदालत से खुद ही कार्रवाई करने का आग्रह किया गया था।


पीआईएल में कहा गया था कि वैकल्पिक रूप से, संविधान के संरक्षक और मौलिक अधिकारों के रक्षक होने के नाते सुप्रीम कोर्ट को 22वें विधि आयोग के अध्यक्ष और सदस्यों की नियुक्ति के लिए अपनी संवैधानिक शक्तियों का इस्तेमाल करना चाहिए और विधि आयोग को वैधानिक निकाय घोषित करना चाहिए।

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News apps, iOS Hindi News apps और Amarujala Hindi News apps अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed