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Supreme Court: वंचित वर्गों की याचिकाओं को प्राथमिक सुनवाई, सुप्रीम कोर्ट ने चार श्रेणियों में किया वर्गीकरण

Fri, 02 Jan 2026 07:07 AM IST
शिवम गर्ग अमर उजाला ब्यूरो, नई दिल्ली
अमर उजाला ब्यूरो, नई दिल्ली Published by: शिवम गर्ग Updated Fri, 02 Jan 2026 07:07 AM IST
सार

सुप्रीम कोर्ट ने वंचित वर्गों को न्याय तक त्वरित पहुंच दिलाने के लिए उनकी याचिकाओं को चार श्रेणियों में बांटकर प्राथमिक सुनवाई का फैसला लिया है।

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Supreme Court Prioritises Petitions of Marginalised Sections, Introduces Four Fast-Track Categories
सुप्रीम कोर्ट (फाइल फोटो) - फोटो : ANI

विस्तार

सीजेआई जस्टिस सूर्यकांत ने सामाजिक, शारीरिक और आर्थिक रूप से वंचित वर्गों के लिए न्याय तक त्वरित पहुंच सुनिश्चित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाया है। उन्होंने सुप्रीम कोर्ट में ऐसी याचिकाओं की सूचीबद्धता और सुनवाई को प्राथमिकता देने के लिए चार नई श्रेणियां निर्धारित की हैं।

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इन श्रेणियों में दिव्यांगजन और एसिड अटैक पीड़ितों द्वारा दायर मामले, 80 वर्ष से अधिक आयु के वरिष्ठ नागरिकों से संबंधित याचिकाएं, गरीबी रेखा से नीचे जीवन यापन करने वाले व्यक्तियों के मामले तथा विधिक सेवा प्राधिकरणों के माध्यम से निःशुल्क कानूनी सहायता प्राप्त कर रहे लोगों की याचिकाएं शामिल की गई हैं। न्यायालय का कहना है कि इन वर्गों की याचिकाएं अक्सर भारी संख्या में सूचीबद्ध मामलों के बीच दब जाती थीं।
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आमतौर पर सोमवार और शुक्रवार को सुप्रीम कोर्ट की 16 पीठों के समक्ष लगभग 800 नए मामले सुनवाई के लिए आते हैं, जिनमें यह तय किया जाता है कि किन मामलों पर विस्तृत सुनवाई आवश्यक है। नई व्यवस्था का उद्देश्य यह है कि कमजोर और वंचित तबकों से जुड़े मामलों को प्राथमिकता के साथ जल्द सुनवाई का अवसर मिल सके। सुप्रीम कोर्ट रजिस्ट्री की ओर से जारी परिपत्र में वकीलों, पक्षकारों और अन्य हितधारकों से कहा गया है कि नई याचिका दाखिल करते समय यह स्पष्ट रूप से उल्लेख करें कि वह किस श्रेणी में आती है। साथ ही संबंधित सरकारी अथॉरिटी से जारी दस्तावेज या प्रमाणपत्र भी अनिवार्य रूप से संलग्न करना होगा। कानूनी जानकारों की माने तो न्यायपालिका की ओर से समावेशी और संवेदनशील न्याय व्यवस्था की दिशा में यह महत्वपूर्ण कदम है।
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सुप्रीम कोर्ट ने 2025 में निपटाए रिकॉर्ड 75 हजार से अधिक मामले
सुप्रीम कोर्ट ने वर्ष 2025 में इतिहास रचते हुए 75 हजार से अधिक मामलों का निपटारा किया है। आधिकारिक आंकड़ों के मुताबिक, सुप्रीम कोर्ट ने पिछले वर्ष कुल 75,280 मामलों पर सुनवाई की, जो विश्व के किसी भी शीर्ष न्यायालय द्वारा संभाले गए मामलों की संख्या से कहीं अधिक है। इनमें 51,357 दीवानी और 23,923 आपराधिक मामले शामिल थे।

अदालत ने इनमें से 65,403 मामलों का निस्तारण किया, जिनमें 42,793 दीवानी और 22,610 आपराधिक मामलों के फैसले शामिल हैं। गौरतलब है कि जहां एक ओर अमेरिका और ब्रिटेन जैसे देशों के सुप्रीम कोर्ट सालाना केवल कुछ सौ मामलों की ही सुनवाई करते हैं। वहीं भारतीय सुप्रीम कोर्ट के दिए गए विस्तृत फैसलों व आदेशों की संख्या हजारों में है।

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