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Supreme Court: प्रदूषण रोकथाम के लिए वैज्ञानिक अध्ययन करेगा CPCB; शीर्ष अदालत ने क्रशर पर दिए अहम दिशानिर्देश
Sun, 07 Jan 2024 07:52 PM IST
ज्योति भास्कर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: ज्योति भास्कर
Updated Sun, 07 Jan 2024 07:52 PM IST
सार
सुप्रीम कोर्ट ने केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (सीपीसीबी) से प्रदूषण पर वैज्ञानिक अध्ययन करने को कहा है। सीपीसीबी अब पत्थर तोड़ने वाली इकाइयों (क्रशर) से होने वाले प्रदूषण की स्टडी करेगा। अदालत ने क्रशर संचालन के लिए पर्यावरणीय मंजूरी पर भी जवाब मांगा है।
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सुप्रीम कोर्ट
- फोटो : ANI
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विस्तार
सुप्रीम कोर्ट ने केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (CPCB) से कहा है कि पत्थर तोड़ने वाली इकाइयों से होने वाले प्रदूषण पर डेटा जुटाने के लिए वैज्ञानिक अध्ययन किए जाएं। अदालत में दो जजों की खंडपीठ ने सवाल किया है कि क्या क्रशर संचालित करने के लिए पहले से पर्यावरणीय मंजूरी लेने की जरूरत पड़ती है? न्यायमूर्ति संजीव खन्ना और न्यायमूर्ति दीपांकर दत्ता की पीठ में इस मामले की सुनवाई हो रही है। CPCB को दिए निर्देश में सुप्रीम कोर्ट ने कहा, स्टोन क्रशिंग इकाइयों के कारण होने वाले प्रदूषण पर अपनी रिपोर्ट दाखिल करें।
सरकार की अपील पर आदेश पारित हुआ
अदालत ने पूछा कि क्या 14 सितंबर, 2006 को जारी पर्यावरण प्रभाव आकलन (ईआईए) अधिसूचना के दायरे में पत्थरों को तोड़ने वाले क्रशर को भी लाया जाना चाहिए या नहीं? गौरतलब है कि कुछ परियोजनाओं और गतिविधियों के लिए पहले पर्यावरणीय मंजूरी लेना जरूरी होता है। सुप्रीम कोर्ट की पीठ ने तीन जनवरी को यह आदेश पारित किया। गौरतलब है कि नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (एनजीटी), पूर्वी क्षेत्र ने 1 मई, 2023 को आदेश पारित किया था। शीर्ष अदालत में पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय ने इसे चुनौती दी गई। सुप्रीम कोर्ट ने सरकार की अपील पर यह आदेश पारित किया।
CPCB को स्टडी के लिए आठ सप्ताह का समय मिला
शीर्ष अदालत के मुताबिक, सीपीसीबी क्रशर से होने वाले प्रदूषण से जुड़ा जरूरी डेटा हासिल करेगा। इससे जुड़े पहलुओं पर वैज्ञानिक अध्ययन करने के बाद तीन जनवरी से आठ सप्ताह के भीतर कोर्ट में रिपोर्ट दाखिल करना होगा। कोर्ट ने साफ किया कि स्टोन क्रशिंग इकाइयों से होने वाले प्रदूषण की रोकथाम के लिए सीपीसीबी जरूरी निर्देश जारी कर सकेगा। स्टडी के लिए दी गई आठ सप्ताह की मोहलत पर वर्तमान आदेश का असर नहीं होगा।
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क्रशर के लिए अहम पर्यावरण दिशानिर्देश पर सवाल
क्रशरों से होने वाले उत्सर्जन और प्रदूषण को कम करने के लिए जुलाई 2023 में सीपीसीबी ने क्रशर के लिए अहम पर्यावरण दिशानिर्देशों जारी किए गए हैं। मामले की सुनवाई के दौरान सीपीसीबी को आवश्यक निर्देश देते हुए दो जजों की खंडपीठ ने इन दिशानिर्देशों का भी संज्ञान लिया। इसमें कहा गया है, सीपीसीबी आठ हफ्ते बाद रिपोर्ट दाखिल करते समय आवश्यक वैज्ञानिक डेटा रिकॉर्ड में रखेगा।
सीपीसीबी को बताना होगा कि उन्होंने किन पैमानों पर जांच करने के बाद क्रशर संचालन के लिए पर्यावरण मंजूरी की जरूरत नहीं होने का निर्णय लिया है।
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सरकार की अपील पर आदेश पारित हुआ
अदालत ने पूछा कि क्या 14 सितंबर, 2006 को जारी पर्यावरण प्रभाव आकलन (ईआईए) अधिसूचना के दायरे में पत्थरों को तोड़ने वाले क्रशर को भी लाया जाना चाहिए या नहीं? गौरतलब है कि कुछ परियोजनाओं और गतिविधियों के लिए पहले पर्यावरणीय मंजूरी लेना जरूरी होता है। सुप्रीम कोर्ट की पीठ ने तीन जनवरी को यह आदेश पारित किया। गौरतलब है कि नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (एनजीटी), पूर्वी क्षेत्र ने 1 मई, 2023 को आदेश पारित किया था। शीर्ष अदालत में पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय ने इसे चुनौती दी गई। सुप्रीम कोर्ट ने सरकार की अपील पर यह आदेश पारित किया।
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CPCB को स्टडी के लिए आठ सप्ताह का समय मिला
शीर्ष अदालत के मुताबिक, सीपीसीबी क्रशर से होने वाले प्रदूषण से जुड़ा जरूरी डेटा हासिल करेगा। इससे जुड़े पहलुओं पर वैज्ञानिक अध्ययन करने के बाद तीन जनवरी से आठ सप्ताह के भीतर कोर्ट में रिपोर्ट दाखिल करना होगा। कोर्ट ने साफ किया कि स्टोन क्रशिंग इकाइयों से होने वाले प्रदूषण की रोकथाम के लिए सीपीसीबी जरूरी निर्देश जारी कर सकेगा। स्टडी के लिए दी गई आठ सप्ताह की मोहलत पर वर्तमान आदेश का असर नहीं होगा।
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क्रशर के लिए अहम पर्यावरण दिशानिर्देश पर सवाल
क्रशरों से होने वाले उत्सर्जन और प्रदूषण को कम करने के लिए जुलाई 2023 में सीपीसीबी ने क्रशर के लिए अहम पर्यावरण दिशानिर्देशों जारी किए गए हैं। मामले की सुनवाई के दौरान सीपीसीबी को आवश्यक निर्देश देते हुए दो जजों की खंडपीठ ने इन दिशानिर्देशों का भी संज्ञान लिया। इसमें कहा गया है, सीपीसीबी आठ हफ्ते बाद रिपोर्ट दाखिल करते समय आवश्यक वैज्ञानिक डेटा रिकॉर्ड में रखेगा।
सीपीसीबी को बताना होगा कि उन्होंने किन पैमानों पर जांच करने के बाद क्रशर संचालन के लिए पर्यावरण मंजूरी की जरूरत नहीं होने का निर्णय लिया है।