सुप्रीम कोर्ट: पैदल चलने वालों की सुरक्षा पर अदालत सख्त; अतिक्रमणमुक्त फुटपाथ जरूरी, पांच शहरों से करें शुरुआत
देशभर में पैदल चलने वालों की सुरक्षा को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने सख्त रुख अपनाया है। शीर्ष अदालत ने केंद्र सरकार को निर्देश दिया है कि वह देश में पांच शहरों की पहचान करे, जहां हर सड़क के साथ अतिक्रमण-मुक्त और स्पष्ट रूप से चिह्नित फुटपाथ बनाने के लिए एक पायलट प्रोजेक्ट शुरू किया जा सके। जस्टिस पीएस नरसिम्हा और जस्टिस आलोक अराधे की पीठ ने मामले की सुनवाई करते हुए केंद्र सरकार से यह भी स्पष्ट करने को कहा कि इन निर्देशों को जमीन पर लागू करने के लिए कौन-सा केंद्रीय प्राधिकरण जिम्मेदार होगा। पीठ ने केंद्र की ओर से पेश हुए एडिशनल सॉलिसिटर जनरल केएम नटराज से कहा कि इस काम के लिए तय की जाने वाली अथॉरिटी के पास पर्याप्त बजट, कर्मचारी और जरूरी बुनियादी ढांचा होना अनिवार्य है, ताकि फुटपाथ निर्माण का काम बिना रुकावट पूरा हो सके। इस पर सरकारी वकील ने जल्द जानकारी पेश करने का भरोसा दिया।
सुप्रीम कोर्ट ने ग्रेट निकोबार मेगा-इन्फ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट के खिलाफ दायर जनहित याचिकाओं (पीआईएल) की वैधता को चुनौती देने वाली केंद्र सरकार की याचिका खारिज कर दी है। शीर्ष अदालत ने कलकत्ता हाईकोर्ट के उस फैसले में दखल देने से इन्कार कर दिया, जिसमें वन अधिकार कानून के कथित उल्लंघन से जुड़ी जनहित याचिकाओं को सुनवाई योग्य माना गया था। सीजेआई सूर्यकांत, जस्टिस जॉयमाल्या बागची और जस्टिस वी. मोहना की पीठ ने कहा कि मामला पहले से ही कलकत्ता हाईकोर्ट के समक्ष लंबित है और 25-26 नवंबर को सूचीबद्ध है। पीठ ने हाईकोर्ट से कहा कि वह तय तारीखों पर इस से जुड़ी सभी लंबित याचिकाओं और संबंधित पक्षों की दलीलों को सुनकर मामले का निपटारा करे।