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अवमानना केस : प्रशांत भूषण को राहत नहीं, सुप्रीम कोर्ट ने नहीं स्वीकार की माफी

Mon, 10 Aug 2020 11:43 AM IST
अनवर अंसारी न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: अनवर अंसारी Updated Mon, 10 Aug 2020 11:43 AM IST
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Supreme Court passes order and refuses to accept the expression of regret by lawyer Prashant Bhushan
प्रशांत भूषण - फोटो : फाइल फोटो

वरिष्ठ वकील प्रशांत भूषण और पत्रकार तरुण तेजपाल के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट की अवमानना के 11 साल पुराने मामले में सोमवार को सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई हुई। सुनवाई के दौरान भूषण ने अपना स्पष्टीकरण पेश किया लेकिन अदालत ने इसे स्वीकार करने से इनकार कर दिया। 

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न्यायमूर्ति अरुण मिश्रा और न्यायमूर्ति बी आर गवई और कृष्ण मुरारी की अध्यक्षता वाली पीठ ने कहा कि वह मामले को सुनेगा और यह देखेगा कि न्यायाधीशों के बारे में भ्रष्टाचार पर टिप्पणी असल में अवमानना है या नहीं। पीठ ने इस मामले में अगली सुनवाई 17 अगस्त को तय की है।
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दरअसल, सुप्रीम कोर्ट को आज यह तय करना था कि अवमानना मामले में वह वरिष्ठ वकील के स्पष्टीकरण को स्वीकार करे या इस कार्रवाई को आगे बढ़ाए। शीर्ष अदालत ने नवंबर 2009 में एक तहलका पत्रिका के साक्षात्कार में शीर्ष अदालत के कुछ मौजूदा एवं पूर्व न्यायाधीशों पर कथित तौर पर आक्षेप लगाने के लिए भूषण और तेजपाल को अवमानना नोटिस जारी किया था। तरुण तेजपाल उस समय तहलका पत्रिका के संपादक थे।
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भूषण ने इस संबंध में शीर्ष अदालत में अपना स्पष्टीकरण पेश किया है जबकि तहलका के संपादक तरुण तेजपाल ने माफी मांगी है। अदालत ने कहा कि वह इस मामले में विचार करेगा कि न्यायाधीशों के बारे में भ्रष्टाचार की टिप्पणी असल में अवमानना है या नहीं।

चार अगस्त को, शीर्ष अदालत ने भूषण और तेजपाल को स्पष्ट किया था कि वह मामले में अगर उनका स्पष्टीकरण या माफी स्वीकार नहीं करती है तो वह सुनवाई करेगी।

वहीं, इससे पहले हुई सुनवाई में भूषण ने 2009 में दिए अपने बयान पर खेद जताया था लेकिन बिना शर्त माफी नहीं मांगी थी। भूषण ने कहा कि तब मेरे कहने का तात्पर्य भ्रष्टाचार कहना नहीं था बल्कि सही तरीके से कर्तव्य न निभाने की बात थी। 


 

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