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दो टूक : सुप्रीम कोर्ट ने कहा- आम्रपाली में खरीदारों को सपनों का घर दिलाना पहली प्राथमिकता
Tue, 19 Jul 2022 06:14 AM IST
योगेश साहू
एजेंसी, नई दिल्ली।
एजेंसी, नई दिल्ली।
Published by: योगेश साहू
Updated Tue, 19 Jul 2022 06:14 AM IST
सार
पीठ ने साथ ही निजी फर्म मनू बिल्डटेक प्राइवेट लिमिटेड के दावों पर विचार करने से इन्कार कर दिया। इस फर्म ने आम्रपाली समूह में तय ब्याज दर पर निवेश किया था। पीठ ने फर्म के वकील एमएल लोहाटी को बताया कि उनका दावा घर खरीदारों के दावों के सामने कहीं नहीं टिकता।
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सुप्रीम कोर्ट
- फोटो : ani
विस्तार
सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को स्पष्ट किया कि उसकी पहली प्राथमिकता आम्रपाली में खरीदारों को उनके घर दिलाना है। उसके बाद जैसे मामले हों उस आधार पर घर खरीदारों के दावों का निस्तारण किया जाएगा। शीर्ष अदालत ने सोमवार को कहा, खरीदारों को घर दिलाने और उनके दावों के निस्तारण के बाद नोएडा और ग्रेटर नोएडा जैसे प्राधिकरणों के दावे देखे जाएंगे और उसके बाद बिजली व जलकल विभाग की बारी आएगी।
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जस्टिस यूयू ललित और जस्टिस बेला एम त्रिवेदी की पीठ ने स्पष्ट किया कि कर्ज दाताओं और 2019 के पहले वित्तीय मदद देने वालों के दावों को शीर्ष अदालत सबसे आखिरी में सुनेगी। पीठ ने कहा, उनकी पहली प्राथमिकता है कि हर खरीदार को उसके सपनों का घर मिले। यूपी सरकार के बिजली विभाग से पीठ ने कहा, आपको कतार में रहना होगा, जब आपकी बारी आएगी तब हम आपके दावों को देखेंगे।
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बिजली विभाग के वकील ने पीठ को बताया कि आम्रपाली समूह पर उसका 9 करोड़ रुपये बकाया है और इसका निस्तारण होना चाहिए। पीठ ने कहा, सुप्रीम कोर्ट के 2019 में वरिष्ठ वकील आर वेकंटरमानी को कोर्ट रिसीवर नियुक्त करने के बाद से बिजली विभाग के सभी भुगतान हो चुके हैं। जो भी बकाया होगा वह 2019 से पहले का होगा।
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आम्रपाली में निवेश करने वाली निजी फर्म को भी इंतजार करने की सलाह
पीठ ने साथ ही निजी फर्म मनू बिल्डटेक प्राइवेट लिमिटेड के दावों पर विचार करने से भी इन्कार कर दिया। इस फर्म ने आम्रपाली समूह में तय ब्याज दर पर निवेश किया था। पीठ ने फर्म के वकील एमएल लोहाटी को बताया कि उनका दावा घर खरीदारों के दावों के सामने कहीं नहीं टिकता। यह स्पष्ट रूप से ब्याज के एवज में किये गए निवेश का मामला है। आपको भी कतार में इंतजार करना होगा।
अब 25 जुलाई को होगी सुनवाई
पीठ अब इस मामले में कोर्ट रिसीवर की मौजूदगी में 25 जुलाई को सुनवाई करेगी। सुप्रीम कोर्ट ने 12 जुलाई को कोर्ट द्वारा नियुक्त रिसीवर के उस सुझाव पर कुछ समय के लिए रोक लगा दी थी जिसमें समूह के आर्थिक संकट को देखते हुए घरखरीदारों से 200 रुपये प्रति वर्ग फीट के हिसाब से अतिरिक्त धन वसूलने की सलाह दी गई थी। घर खरीदारों की आपत्ति के बाद शीर्ष अदालत ने यह रोक लगाई थी।