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शीर्ष अदालत: कोर्ट सांसदों को मुकदमे से छूट देने के फैसले पर पुनर्विचार करेगा; सात सदस्यीय पीठ गठित की जाएगी
Wed, 20 Sep 2023 04:26 PM IST
अभिषेक दीक्षित
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: अभिषेक दीक्षित
Updated Wed, 20 Sep 2023 04:26 PM IST
सार
शीर्ष कोर्ट की पांच सदस्यीय पीठ ने पीवी नरसिम्हा राव बनाम सीबीआई मामले में 1998 में दिए अपने फैसले में कहा था कि सांसदों को सदन के भीतर कोई भी भाषण तथा वोट देने के लिए आपराधिक मुकदमा चलाने से संविधान में छूट मिली हुई है।
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सुप्रीम कोर्ट
- फोटो : अमर उजाला
विस्तार
सुप्रीम कोर्ट ने पीवी नरसिम्हा राव मामले में अपने 1998 के फैसले पर पुनर्विचार करने पर सहमति जता दी है। सुप्रीम कोर्ट ने इसके लिए सात न्यायाधीशों की एक बड़ी पीठ गठित करने का फैसला किया है। पीठ यह देखेगी कि क्या कोई सांसद या विधायक सदन में भाषण देने या किसी विशेष तरीके से वोट देने के लिए रिश्वत लेने के लिए अभियोजन से छूट का दावा कर सकता है।
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नए सिरे से सुनवाई होगी?
प्रधान न्यायाधीश डीवाई चंद्रचूड़ की अगुवाई वाली पांच सदस्यीय संविधान पीठ ने कहा कि वह मामले पर नए सिरे से सुनवाई के लिए सात सदस्यीय पीठ गठित करेगी। दरअसल, 2019 में तत्कालीन प्रधान न्यायाधीश रंजन गोगोई की अगुवाई वाली पीठ ने इस अहम प्रश्न को पांच सदस्यीय पीठ के पास भेजते हुए कहा था कि इसके व्यापक प्रभाव हैं। यह सार्वजनिक महत्व का सवाल है।
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तीन सदस्यीय पीठ ने क्या कहा था?
तब तीन सदस्यीय पीठ ने तब कहा था कि वह झारखंड में जामा निर्वाचन क्षेत्र से झारखंड मुक्ति मोर्चा की विधायक सीता सोरेन की अपील पर सनसनीखेज झामुमो रिश्वत मामले में अपने फैसले पर पुनर्विचार करेगी।
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क्या था 1998 का फैसला?
शीर्ष कोर्ट की पांच सदस्यीय पीठ ने पीवी नरसिम्हा राव बनाम सीबीआई मामले में 1998 में दिए अपने फैसले में कहा था कि सांसदों को सदन के भीतर कोई भी भाषण तथा वोट देने के लिए आपराधिक मुकदमा चलाने से संविधान में छूट मिली हुई है।