SC Updates: अमृतपाल के चुनाव के खिलाफ दायर याचिका खारिज; श्री कृष्ण जन्मभूमि विवाद पर टली सुनवाई
मुख्य न्यायाधीश डीवाई चंद्रचूड़ ने शुक्रवार को कहा कि सुप्रीम कोर्ट दूसरी हैकाथान का आयोजन करेगा। जिसमें शीर्ष अदालत के कामकाज को कृत्रिम बुद्धिमत्ता की मदद से बेहतर करने की कोशिश की जाएगी।
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याचिका पर सुनवाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट की न्यायमूर्ति बीआर गवई और न्यायमूर्ति केवी विश्वनाथन की पीठ ने कहा कि आपने एक चुनाव याचिका दायर की है और संविधान में जनप्रतिनिधि कानून के तहत इसके प्रावधान है। ऐसे में यह याचिका खारिज की जाती है। अमृतपाल सिंह फिलहाल असम की डिब्रूगढ़ स्थित जेल में बंद है। अमृतपाल सिंह पर राष्ट्रीय सुरक्षा कानून के तहत आरोप लगे हैं। अमृतपाल सिंह ने बीते लोकसभा चुनाव में बतौर निर्दलीय खडूर साहिब सीट से चुनाव जीता था।
सुप्रीम कोर्ट करेगा हैकाथान का आयोजन
श्री कृष्ण जन्मभूमि मामले पर दायर याचिका पर सुनवाई टली
सुप्रीम कोर्ट ने अवमानना मामले में पूर्व जिला जज की याचिका पर बार नेता से मांगा जवाब
सुप्रीम कोर्ट ने अवमानना मामले में बार नेता राजीव खोसला से जवाब मांगा है। कोर्ट ने दिल्ली जिला अदालत की पूर्व न्यायाधीश सुजाता कोहली की याचिका पर आदेश दिया। उच्च न्यायालय ने फरवरी में दिल्ली उच्च न्यायालय बार एसोसिएशन (डीएचसीबीए) के पूर्व अध्यक्ष खोसला को अवमानना मामले में बरी कर दिया था। जो अदालती कार्यवाही में बाधा डालने के लिए उनके खिलाफ शुरू किया गया था।
30 नवंबर 2021 को दिल्ली की तीस हजारी अदालत में एक अदालत कक्ष में अराजकता फैल गई थी। कोहली ने आरोप लगाया था कि अगस्त 1994 में खोसला ने उन्हें बाल पकड़कर घसीटा था। घटना के समय वह तीस हजारी कोर्ट में वकील थीं और बाद में दिल्ली न्यायपालिका में जज बन गईं। वह 2020 में जिला एवं सत्र न्यायाधीश के पद से सेवानिवृत्त हुईं। मामले की सुनवाई के दौरान कोर्ट में खोसला के समर्थक वकीलों ने अराजकता फैलाई थी और नारेबाजी की थी। वकीलों की नारेबाजी के बीच ट्रायल कोर्ट ने खोसला को दोषी ठहराया था और उन्हें राज्य और कोहली को कुल 40,000 रुपये का मुआवजा देने का निर्देश दिया था।
मुख्य न्यायाधीश डी वाई चंद्रचूड़ और न्यायमूर्ति जेबी पारदीवाला और न्यायमूर्ति मनोज मिश्रा की पीठ ने कोहली की ओर से पेश वरिष्ठ वकील इंदिरा जयसिंह की दलील सुनने के बाद खोसला को नोटिस जारी कर जवाब मांगा। वहीं पीठ ने दिल्ली उच्च न्यायालय के रजिस्ट्रार जनरल को 30 नवंबर 2021 की घटना के बारे में तत्कालीन जिला न्यायाधीश की रिपोर्ट सीलबंद कवर में देने को कहा। अब इस मामले की सुनवाई तीन सप्ताह बाद की जायेगी।
महाराष्ट्र के निजी स्कूलों की EWS छात्रों को प्रवेश देने से छूट देने की याचिका खारिज
सुप्रीम कोर्ट ने बॉम्बे हाईकोर्ट के आदेश के खिलाफ दायर महाराष्ट्र के निजी स्कूलों की ईडब्ल्यूएस छात्रों को प्रवेश से छूट देने की याचिका खारिज कर दी। महाराष्ट्र सरकार ने सरकारी स्कूलों के एक किमी के दायरे में स्थित निजी स्कूलों में कमजोर वर्ग के छात्रों को 25 फीसदी सीटों पर प्रवेश देने से छूट दी थी। कोर्ट ने कहा कि गरीब बच्चों को भी अच्छे स्कूलों में पढ़ने का अधिकार है। चीफ जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़, जस्टिस जेबी पारदीवाला और जस्टिस मनोज मिश्रा की पीठ ने कहा कि जब निजी स्कूलों में पढ़ने वाले बच्चे ईडब्ल्यूएस छात्रों से बातचीत करेंगे, तो उन्हें समझ आएगा कि देश वास्तव में क्या है? सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि सरकारी स्कूल कभी भी निजी स्कूलों से प्रतिस्पर्धा नहीं कर सकते। जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़ ने कहा कि वह अपने परिवार में अंग्रेजी माध्यम के स्कूल में पढ़ने वाले पहले व्यक्ति थे। बॉम्बे हाईकोर्ट ने महाराष्ट्र सरकार की अधिसूचना रद्द करते हुए कहा था कि यह संविधान के अनुच्छेद 21 और बच्चों के मुफ्त और अनिवार्य शिक्षा के अधिकार अधिनियम, 2009 के प्रावधानों के खिलाफ है।
सुप्रीम कोर्ट ने दिया सुझाव, एमईएफ के निकाय का दोबारा गठन करे केंद्र सरकार
मौलाना आजाद एजुकेशन फाउंडेशन को लेकर दिल्ली हाईकोर्ट के फैसले के खिलाफ दायर याचिका पर सुनवाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि केंद्र सरकार मौलाना आजाद एजुकेशन फाउंडेशन (एमएईएफ) को भंग करने के बाद नए सिरे से निर्णय लेने के लिए आम निकाय का दोबारा गठन करे। सीजेआई जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़ की पीठ हाईकोर्ट के उस फैसले के खिलाफ सुनवाई कर रही थी जिसमें केंद्र के एमएईएफ को इस आधार पर भंग करने के फैसले को बरकरार रखा गया था कि फाउंडेशन के निकाय के लगभग सभी नामित सदस्य सरकारी अधिकारी हैं। याचिका में आरोप लगाया गया कि सदस्य अलग-अलग क्षेत्रों से नहीं आते हैं। केंद्र की ओर से पेश सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने इसका विरोध किया। मेहता ने कहा कि सदस्य विभिन्न क्षेत्रों से जुड़े हुए हैं और अयोग्य नहीं हैं। पीठ ने सुझाव दिया कि मामले को दिल्ली हाईकोर्ट में वापस भेजने के बजाय केंद्र निकाय का पुनर्गठन करें। वे नए सिरे से निर्णय ले सकते हैं। पीठ मामले में अब 14 अगस्त को सुनवाई करेगी। अप्रैल में हाईकोर्ट ने एमएईएफ के फैसले के खिलाफ जनहित याचिका को खारिज कर दिया था और कहा था कि यह आम निकाय की ओर से लिया गया था।