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Supreme Court: धमकाकर जमीन बेचने के लिए मजबूर किया, सुप्रीम कोर्ट ने खारिज की अग्रिम जमानत याचिका
Thu, 17 Jul 2025 03:43 PM IST
नितिन गौतम
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: नितिन गौतम
Updated Thu, 17 Jul 2025 03:43 PM IST
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सुप्रीम कोर्ट (फाइल)
- फोटो : एएनआई (फाइल)
एक व्यक्ति को बंदूक के दम पर डराकर उसे जमीन बेचने के लिए मजबूर करने के मामले में सुप्रीम कोर्ट ने आरोपियों की अग्रिम जमानत याचिका खारिज कर दी है। जस्टिस जेबी पारदीवाला और जस्टिस आर महादेवन की पीठ ने याचिकाकर्ताओं ललित मोहन राय और ललित राय की याचिका खारिज करते हुए याचिकाकर्ताओं के वकील से कहा कि आपके मुवक्किल गुंडे लग रहे हैं।
दरअसल याचिकाकर्ताओं ने साल 2023 में 60 खाता जमीन को धोखाधड़ी से खरीदा और जमीन के मालिक को बंदूक के दम पर डराकर उसके हस्ताक्षर कराए गए। इस मामले में 26 नवंबर 2023 को पटना के गांधी मैदान पुलिस थाने में एफआईआर दर्ज कराई गई थी। आरोपियों ने इसके खिलाफ उच्च न्यायालय में अपील की और अग्रिम जमानत देने की अपील की। हालांकि उच्च न्यायालय ने अग्रिम जमानत देने से इनकार कर दिया। उच्च न्यायालय के आदेश के खिलाफ दोनों आरोपी सुप्रीम कोर्ट गए, लेकिन अब वहां से भी उन्हें निराशा हाथ लगी है।
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दरअसल याचिकाकर्ताओं ने साल 2023 में 60 खाता जमीन को धोखाधड़ी से खरीदा और जमीन के मालिक को बंदूक के दम पर डराकर उसके हस्ताक्षर कराए गए। इस मामले में 26 नवंबर 2023 को पटना के गांधी मैदान पुलिस थाने में एफआईआर दर्ज कराई गई थी। आरोपियों ने इसके खिलाफ उच्च न्यायालय में अपील की और अग्रिम जमानत देने की अपील की। हालांकि उच्च न्यायालय ने अग्रिम जमानत देने से इनकार कर दिया। उच्च न्यायालय के आदेश के खिलाफ दोनों आरोपी सुप्रीम कोर्ट गए, लेकिन अब वहां से भी उन्हें निराशा हाथ लगी है।
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रूसी महिला के खिलाफ लुकआउट नोटिस जारी
चार साल के बच्चे की कस्टडी से जुड़े एक विवाद में, सुप्रीम कोर्ट ने विदेश मंत्रालय और गृह मंत्रालय को एक रूसी महिला का पता लगाने के लिए लुकआउट नोटिस जारी करने का निर्देश दिया है। महिल कथित तौर पर अपने चार साल के बच्चे को लेकर फरार हो गई है। यह बच्चा विवाहेतर संबंधों से पैदा हुआ था। जस्टिस सूर्यकांत और जस्टिस जॉयमाल्या बागची की बेंच ने दिल्ली पुलिस कमिश्नर और डिफेंस कॉलोनी पुलिस स्टेशन के SHO को बिना समय गंवाए लापता बच्चे का पता लगाने और उसकी कस्टडी प्रतिवादी को सौंपने का निर्देश दिया है। सुप्रीम कोर्ट ने भारतीय अधिकारियों को रूसी महिला का पासपोर्ट जब्त करने का भी निर्देश दिया है और एयरपोर्ट और माइग्रेशन अथॉरिटीज को देश भर के सभी एयरपोर्ट्स के प्रवेश और निकास पर नजर रखने का निर्देश दिया है।
कन्नड़ एक्टर दर्शन को जमानत देने के हाईकोर्ट के फैसले से हम संतुष्ट नहीं: सुप्रीम कोर्ट
सुप्रीम कोर्ट ने कन्नड़ अभिनेता दर्शन को हत्या के मामले में कर्नाटक हाईकोर्ट से मिली जमानत पर कड़ी आपत्ति जताई है। जस्टिस जे. बी. पारदीवाला और जस्टिस आर. महादेवन की पीठ ने साफ कहा कि हाईकोर्ट ने जिस तरीके से विवेक का इस्तेमाल किया, उससे वे बिल्कुल भी संतुष्ट नहीं हैं। कोर्ट ने कहा कि हम ईमानदारी से कहें तो हाईकोर्ट के आदेश की भाषा और तरीका हमें स्वीकार्य नहीं है। कोर्ट ने मामले की सुनवाई जारी रखने की बात कही है।
सुप्रीम कोर्ट ने कन्नड़ अभिनेता दर्शन को हत्या के मामले में कर्नाटक हाईकोर्ट से मिली जमानत पर कड़ी आपत्ति जताई है। जस्टिस जे. बी. पारदीवाला और जस्टिस आर. महादेवन की पीठ ने साफ कहा कि हाईकोर्ट ने जिस तरीके से विवेक का इस्तेमाल किया, उससे वे बिल्कुल भी संतुष्ट नहीं हैं। कोर्ट ने कहा कि हम ईमानदारी से कहें तो हाईकोर्ट के आदेश की भाषा और तरीका हमें स्वीकार्य नहीं है। कोर्ट ने मामले की सुनवाई जारी रखने की बात कही है।
यूपी विधायक अभय सिंह की बढ़ी मुश्किलें, हत्या की कोशिश के मामले में कल सुप्रीम कोर्ट में होगी सुनवाई
सुप्रीम कोर्ट शुक्रवार 18 जुलाई को उत्तर प्रदेश के विधायक अभय सिंह और अन्य को हत्या की कोशिश के मामले में बरी किए जाने के खिलाफ याचिका पर सुनवाई करेगा। याचिका वादी विकास सिंह ने इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ पीठ के 21 मार्च 2025 के फैसले को चुनौती दी है, जिसमें विधायक अभय सिंह और अन्य को बरी कर दिया गया था।
याचिका में कहा गया है कि हाईकोर्ट ने साक्ष्यों की सही व्याख्या नहीं की। इससे पहले, दिसंबर 2024 में दो जजों की पीठ में एक ने अभय सिंह को तीन साल की सजा सुनाई थी, जबकि दूसरे ने ट्रायल कोर्ट के फैसले को सही ठहराया था। यह मामला 2010 का है जब अयोध्या में विकास सिंह पर जानलेवा हमला हुआ था। ट्रायल कोर्ट ने 2023 में सबूतों के अभाव में विधायक को बरी कर दिया था, जिसे हाईकोर्ट ने भी बरकरार रखा।
सुप्रीम कोर्ट शुक्रवार 18 जुलाई को उत्तर प्रदेश के विधायक अभय सिंह और अन्य को हत्या की कोशिश के मामले में बरी किए जाने के खिलाफ याचिका पर सुनवाई करेगा। याचिका वादी विकास सिंह ने इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ पीठ के 21 मार्च 2025 के फैसले को चुनौती दी है, जिसमें विधायक अभय सिंह और अन्य को बरी कर दिया गया था।
याचिका में कहा गया है कि हाईकोर्ट ने साक्ष्यों की सही व्याख्या नहीं की। इससे पहले, दिसंबर 2024 में दो जजों की पीठ में एक ने अभय सिंह को तीन साल की सजा सुनाई थी, जबकि दूसरे ने ट्रायल कोर्ट के फैसले को सही ठहराया था। यह मामला 2010 का है जब अयोध्या में विकास सिंह पर जानलेवा हमला हुआ था। ट्रायल कोर्ट ने 2023 में सबूतों के अभाव में विधायक को बरी कर दिया था, जिसे हाईकोर्ट ने भी बरकरार रखा।