Supreme Court: सिंगापुर के मुख्य न्यायाधीश सुप्रीम कोर्ट की पीठ के साथ बैठे, पढ़ें अदालत की अहम खबरें
सिक्किम के नेपाली समुदाय को अप्रवासी बताने वाली सुप्रीम कोर्ट की टिप्पणी के मुद्दे पर सिक्किम के एक मंत्री के इस्तीफा देने के बाद मुख्यमंत्री प्रेम सिंह तमांग ने कहा है कि उनकी सरकार ने इसमें सुधार के लिए शीर्ष अदालत में एक पुनर्विचार याचिका पहले ही दायर कर दी है। आइए पढ़ते हैं सुप्रीम कोर्ट की अहम खबरें...
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सिंगापुर के मुख्य न्यायाधीश सुंदरेश मेनन शुक्रवार को भारत के प्रधान न्यायाधीश डीवाई चंद्रचूड़ की अगुवाई वाली सुप्रीम कोर्ट की पीठ के साथ बैठे। सिंगापुर में 2012 से चौथे मुख्य न्यायाधीश के तौर पर सेवा दे रहे न्यायाधीश मेनन शीर्ष कोर्ट की स्थापना की 73वीं वर्षगांठ का जश्न मनाने के लिए भारत आए हैं। वे शनिवार को होने वाले एक समारोह में मुख्य अतिथि के तौर पर शामिल होंगे। वे सिंगापुर के मुख्य न्यायाधीश समारोह में ‘बदलते विश्व में न्यायपालिका की भूमिका’ पर एक व्याख्यान देंगे। इस कार्यक्रम को न्यायमूर्ति एसके कौल और प्रधान न्यायाधीश भी संबोधित करेंगे। भारत के सुप्रीम कोर्ट स्थापन 28 जनवरी 1950 को स्थापना हुई थी।
सिक्किम के नेपाली समुदाय को अप्रवासी बताने वाली सुप्रीम कोर्ट की टिप्पणी के मुद्दे पर सिक्किम के एक मंत्री के इस्तीफा देने के बाद मुख्यमंत्री प्रेम सिंह तमांग ने कहा है कि उनकी सरकार ने इसमें सुधार के लिए शीर्ष अदालत में एक पुनर्विचार याचिका पहले ही दायर कर दी है। तमांग ने कहा कि राज्य के अतिरिक्त महाधिवक्ता और कानून सचिव कानूनी विशेषज्ञों के साथ राष्ट्रीय राजधानी में इस मामले को देख रहे हैं।
उन्होंने बताया कि सिक्किम सरकार ने 13 जनवरी, 2023 को सुनाए गए फैसले में कुछ टिप्पणियों के संबंध में सिक्किम के लोगों की शिकायतों और भावनाओं को उपयुक्त रूप से संबोधित करने के लिए भारत के माननीय सर्वोच्च न्यायालय के समक्ष एक समीक्षा याचिका दायर की है। इससे पहले सिक्किम के स्वास्थ्य मंत्री मणि कुमार शर्मा ने सुप्रीम कोर्ट द्वारा अपनी टिप्पणियों में सिक्किमी नेपाली समुदाय को आप्रवासियों के रूप में चित्रित करने से संबंधित मुद्दे से निपटने के राज्य सरकार के तरीके पर सवाल उठाने के बाद गुरुवार को अपने पद से इस्तीफा दे दिया था।
हिंदू संगठन के कार्यक्रम में न हो अभद्र भाषा का प्रयोग: सुप्रीम कोर्ट
सुप्रीम कोर्ट ने महाराष्ट्र पुलिस को आदेश दिया है कि मुंबई में हिंदू संगठन की ओर से होने वाले कार्यक्रम में किसी भी तरह की अभद्र भाषा का प्रयोग न किया जाए। कोर्ट ने कहा है कि यदि मुंबई पुलिस के अधिकारी पांच फरवरी को मुंबई में हिंदू जन आक्रोश मोर्चा को कार्यक्रम आयोजित करने की अनुमति देते हैं तो कोई नफरत फैलाने वाला भाषण न दिया जाए।