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SC Updates: महाराष्ट्र में विधायकों की अयोग्यता के मामले में 22 जनवरी को सुनवाई, उद्धव गुट ने डाली है याचिका
Wed, 17 Jan 2024 03:36 PM IST
कीर्तिवर्धन मिश्र
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: कीर्तिवर्धन मिश्र
Updated Wed, 17 Jan 2024 03:36 PM IST
सार
विधानसभा अध्यक्ष राहुल नार्वेकर ने जून 2022 में विभाजन के बाद महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे के नेतृत्व वाले शिवसेना के गुट को वास्तविक शिवसेना घोषित किया था। इस आदेश को चुनौती देते हुए शिवसेना के उद्धव ठाकरे गुट ने सोमवार को सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया था।
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सुप्रीम कोर्ट
- फोटो : अमर उजाला
विस्तार
महाराष्ट्र विधानसभा स्पीकर के विधायकों की अयोग्यता से जुड़े फैसले के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट गई उद्धव शिवसेना की याचिका पर अब 22 जनवरी को सुनवाई होगी। उद्धव गुट की तरफ से सोमवार को दायर याचिका पर पहले 19 जनवरी को सुनवाई तय की गई थी, हालांकि अब इस पर 22 जनवरी को सुनवाई होगी।
बताया गया है कि उद्धव गुट की तरफ से पेश हुए वकील कपिल सिब्बल ने चीफ जस्टिस डीवाई चंद्रचूड, जस्टिस जेबी पारदीवाला और जस्टिस मनोज मिश्रा की बेंच से मांग की थी कि इस याचिका पर शुक्रवार (19 जनवरी) की जगह सोमवार (22 जनवरी) को सुनवाई हो। इस पर सीजेआई ने हामी भर दी।
गौरतलब है कि विधानसभा अध्यक्ष राहुल नार्वेकर ने जून 2022 में विभाजन के बाद महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे के नेतृत्व वाले शिवसेना के गुट को वास्तविक शिवसेना घोषित किया था। इस आदेश को चुनौती देते हुए शिवसेना के उद्धव ठाकरे गुट ने सोमवार को सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया था।
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विधानसभाध्यक्ष ने शिंदे सहित सत्तारूढ़ खेमे के 16 विधायकों को अयोग्य ठहराने की ठाकरे गुट की याचिका को भी खारिज कर दिया था। अयोग्यता याचिकाओं पर अपने फैसले में 10 जनवरी को विधानसभा अध्यक्ष ने प्रतिद्वंद्वी खेमों के किसी भी विधायक को अयोग्य नहीं ठहराया था। इस फैसले ने मुख्यमंत्री के रूप में शिंदे की स्थिति को और मजबूत कर दिया। शिंदे ने 18 महीने पहले ठाकरे के खिलाफ विद्रोह का नेतृत्व किया था। गर्मियों में लोकसभा चुनाव और 2024 की दूसरी छमाही में होने वाले राज्य विधानसभा चुनावों से पहले सत्तारूढ़ गठबंधन में इस फैसले से उनकी राजनीतिक ताकत बढ़ गई है।
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बताया गया है कि उद्धव गुट की तरफ से पेश हुए वकील कपिल सिब्बल ने चीफ जस्टिस डीवाई चंद्रचूड, जस्टिस जेबी पारदीवाला और जस्टिस मनोज मिश्रा की बेंच से मांग की थी कि इस याचिका पर शुक्रवार (19 जनवरी) की जगह सोमवार (22 जनवरी) को सुनवाई हो। इस पर सीजेआई ने हामी भर दी।
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गौरतलब है कि विधानसभा अध्यक्ष राहुल नार्वेकर ने जून 2022 में विभाजन के बाद महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे के नेतृत्व वाले शिवसेना के गुट को वास्तविक शिवसेना घोषित किया था। इस आदेश को चुनौती देते हुए शिवसेना के उद्धव ठाकरे गुट ने सोमवार को सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया था।
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विधानसभाध्यक्ष ने शिंदे सहित सत्तारूढ़ खेमे के 16 विधायकों को अयोग्य ठहराने की ठाकरे गुट की याचिका को भी खारिज कर दिया था। अयोग्यता याचिकाओं पर अपने फैसले में 10 जनवरी को विधानसभा अध्यक्ष ने प्रतिद्वंद्वी खेमों के किसी भी विधायक को अयोग्य नहीं ठहराया था। इस फैसले ने मुख्यमंत्री के रूप में शिंदे की स्थिति को और मजबूत कर दिया। शिंदे ने 18 महीने पहले ठाकरे के खिलाफ विद्रोह का नेतृत्व किया था। गर्मियों में लोकसभा चुनाव और 2024 की दूसरी छमाही में होने वाले राज्य विधानसभा चुनावों से पहले सत्तारूढ़ गठबंधन में इस फैसले से उनकी राजनीतिक ताकत बढ़ गई है।
माता-पिता द्वारा महिला की हिरासत को सुप्रीम कोर्ट ने बताया अवैध
माता-पिता द्वारा 25 वर्षीय महिला को बंदी बनाए जाने को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि यह पूरी तरह से अवैध है। सुनवाई के दौरान फटकार लगाते हुए कोर्ट ने बुधवार को जल्द से जल्द रिहा करने की कहा है। सुनवाई के दौरान कर्नाटक हाईकोर्ट पर सुप्रीम कोर्ट खासा नाराज दिखा। गौरतलब है कि सुप्रीम कोर्ट एक व्यक्ति की अपील पर सुनवाई कर रही थी, जिसमें उसने अपने साथी के माता-पिता के खिलाप बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका पर कर्नाटक हाईकोर्ट के आदेश को चुनौती दी थी।
पीठ ने कहा कि मामले को 14 बार स्थगित करना और इसे 2025 में पोस्ट करना, ऐसे मामले में हाईकोर्ट की ओर से संवेदनशीलता की पूरी कमी को दर्शाता है। इस तरह के उदासीन दृष्टिकोण के कारण याचिकाकर्ता और उसके माता-पिता को बंदी की भलाई सुनिश्चित करने के लिए दुबई से बंगलूरू तक लगातार यात्राएं करने के लिए मजबूर होना पड़ा। पीठ ने कहा कि जब किसी व्यक्ति की स्वतंत्रता का प्रश्न जुड़ा हो तो एक दिन की देरी भी मायने रखती है। याचिका का निपटारा करते हुए पीठ ने युवती के माता-पिता को 48 घंटे के भीतर उसका पासपोर्ट, अन्य महत्वपूर्ण दस्तावेज और निजी सामान सौंपने का निर्देश दिया।
माता-पिता द्वारा 25 वर्षीय महिला को बंदी बनाए जाने को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि यह पूरी तरह से अवैध है। सुनवाई के दौरान फटकार लगाते हुए कोर्ट ने बुधवार को जल्द से जल्द रिहा करने की कहा है। सुनवाई के दौरान कर्नाटक हाईकोर्ट पर सुप्रीम कोर्ट खासा नाराज दिखा। गौरतलब है कि सुप्रीम कोर्ट एक व्यक्ति की अपील पर सुनवाई कर रही थी, जिसमें उसने अपने साथी के माता-पिता के खिलाप बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका पर कर्नाटक हाईकोर्ट के आदेश को चुनौती दी थी।
पीठ ने कहा कि मामले को 14 बार स्थगित करना और इसे 2025 में पोस्ट करना, ऐसे मामले में हाईकोर्ट की ओर से संवेदनशीलता की पूरी कमी को दर्शाता है। इस तरह के उदासीन दृष्टिकोण के कारण याचिकाकर्ता और उसके माता-पिता को बंदी की भलाई सुनिश्चित करने के लिए दुबई से बंगलूरू तक लगातार यात्राएं करने के लिए मजबूर होना पड़ा। पीठ ने कहा कि जब किसी व्यक्ति की स्वतंत्रता का प्रश्न जुड़ा हो तो एक दिन की देरी भी मायने रखती है। याचिका का निपटारा करते हुए पीठ ने युवती के माता-पिता को 48 घंटे के भीतर उसका पासपोर्ट, अन्य महत्वपूर्ण दस्तावेज और निजी सामान सौंपने का निर्देश दिया।
Mukhtar Ansari
- फोटो : अमर उजाला
मुख्तार अंसारी से जुड़ी याचिका पर सुप्रीम कोर्ट का निर्देश
माफिया मुख्तार अंसारी की सुरक्षा को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को उत्तर प्रदेश सरकार को सुरक्षा उपाय जारी रखने के निर्देश दिया है। गौरतलब है कि मुख्तार अंसारी वर्तमान में बांदा जेल में बंद हैं। हालांकि सुनवाई के दौरान कोर्ट ने सुरक्षा व्यवस्था से जुड़े चार्ट पर कोई खामी नहीं पाई है। न्यायमूर्ति हृषिकेष रॉय और न्यायमूर्ति प्रशांत कुमार मिश्रा की पीठ मुख्तार अंसारी के बेटे उमर अंसारी की याचिका पर सुनवाई कर रही थी, जिसमें मुख्तार अंसारी की सुरक्षा का मुद्दा उठाया गया था। उमर अंसारी ने अपनी याचिका में पिता को राज्य से बाहर किसी अन्य जेल में भेजने की मांग की थी।
माफिया मुख्तार अंसारी की सुरक्षा को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को उत्तर प्रदेश सरकार को सुरक्षा उपाय जारी रखने के निर्देश दिया है। गौरतलब है कि मुख्तार अंसारी वर्तमान में बांदा जेल में बंद हैं। हालांकि सुनवाई के दौरान कोर्ट ने सुरक्षा व्यवस्था से जुड़े चार्ट पर कोई खामी नहीं पाई है। न्यायमूर्ति हृषिकेष रॉय और न्यायमूर्ति प्रशांत कुमार मिश्रा की पीठ मुख्तार अंसारी के बेटे उमर अंसारी की याचिका पर सुनवाई कर रही थी, जिसमें मुख्तार अंसारी की सुरक्षा का मुद्दा उठाया गया था। उमर अंसारी ने अपनी याचिका में पिता को राज्य से बाहर किसी अन्य जेल में भेजने की मांग की थी।