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SC Updates: आरजी कर मामले में सुप्रीम कोर्ट ने नेशनल टास्क फोर्स से मांगी रिपोर्ट, 12 सप्ताह का दिया समय

Tue, 10 Dec 2024 03:26 PM IST
काव्या मिश्रा न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: काव्या मिश्रा Updated Tue, 10 Dec 2024 03:26 PM IST
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supreme court news and updates today SC directs National Task Force to submit its final report within twelve w
सुप्रीम कोर्ट (फाइल) - फोटो : एएनआई

सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को आदेश दिया कि सभी पक्ष डॉक्टरों और मेडिकल कर्मचारियों की सुरक्षा को लेकर अपने सुझाव राष्ट्रीय कार्यबल (एनटीएफ) के साथ साझा करें। एनटीएफ का गठन 20 अगस्त को सुप्रीम कोर्ट ने किया था और उसका काम अस्पतालों में डॉक्टरों और मेडिकल कर्मचारियों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए सुरक्षा उपायों का प्रोटोकॉल तैयार करना है। चीफ जस्टिस संजीव खन्ना और जस्टिस संजीव कुमार की बेंच ने कहा कि एनटीएफ 12 हफ्तों (तीन महीने) के भीतर अदालत में अपनी रिपोर्ट पेश करेगा। 

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आरजी कर मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल में महिला डॉक्टर के दुष्कर्म और हत्या के मामले को ध्यान में रखते हुए सुप्रीम कोर्ट ने एनटीएफ का गठन किया था। एनटीएफ सभी पक्षों की सिफारिशों के आधार पर चिकित्सा पेशेवरों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए प्रोटोकॉल तैयार करेगा। चीफ जस्टिस ने कहा कि इस मामले में अगली सुनवाई 17 मार्च 2025 से शुरू होने वाले हफ्ते में होगी। लेकिन अगर दुष्कर्म और हत्या के मामले में सुनवाई में कोई देरी होती है, तो पक्षकारों को जल्दी सुनवाई की मांग करने का अधिकार होगा। 
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एनटीएफ ने नवंबर में अपनी रिपोर्ट में कहा था कि चिकित्सा पेशेवरों के खिलाफ अपराधों को रोकने के लिए अलग से कोई केंद्रीय कानून बनाने की जरूरत नहीं है। इन कहा था कि राज्य के कानूनों में सामान्य और गंभीर अपराधों के लिए पर्याप्त प्रावधान हैं और भारतीय न्याय संहिता, 2023 के तहत भी इन मामलों को संबोधित किया जा सकता है। रिपोर्ट में कई सुझाव दिए गए थे, जिनमें कहा गया था कि 24 राज्यों ने पहले ही चिकित्सा पेशेवरों के खिलाफ हिंसा से निपटने के लिए कानून बना लिए हैं। इन कानूनों में चिकित्सा संस्थानों और चिकित्सा पेशेवरों को भी परिभाषित किय गया है। इसके अलावा दो और राज्यों ने इस संदर्भ में अपने विधेयक पेश किए हैं। 
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बैंक ऋण घोटाला मामला: सुप्रीम कोर्ट ने हाईकोर्ट के आदेश के खिलाफ सीबीआई की याचिका खारिज की
सुप्रीम कोर्ट ने करोड़ों रुपये के बैंक ऋण घोटाला मामले में डीएचएफएल के पूर्व प्रवर्तक धीरज वधावन को चिकित्सा आधार पर जमानत देने के बॉम्बे हाईकोर्ट के आदेश के खिलाफ केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) की याचिका मंगलवार को खारिज कर दी।

चीफ जस्टिस (सीजेआई) संजीव खन्ना और जस्टिस संजय कुमार की पीठ ने कहा कि इस मामले की सुनवाई 10 साल में पूरी होने की संभावना नहीं है और इसमें शामिल राशि काफी बड़ी है। पीठ ने कहा, “हम नोटिस जारी करने के पक्ष में नहीं हैं। अपील खारिज की जाती है।” हाईकोर्ट के आदेश में कहा गया कि वधावन विभिन्न बीमारियों से ग्रस्त हैं और जेल से उनकी देखभाल की व्यवस्था नहीं की जा सकती, विशेषकर आपातकालीन स्थिति में।

जमानत देते हुए हाईकोर्ट ने वधावन को निर्देश दिया कि वे कोई भी अवैध कार्य न करें, तथा गवाहों को धमकाने सहित एकत्रित साक्ष्यों के साथ छेड़छाड़ न करें। हाईकोर्ट ने कहा, “आवेदक को अधीनस्थ अदालत की अनुमति प्राप्त किए बिना अभियोजन के विषय से संबंधित किसी भी दस्तावेज पर हस्ताक्षर करने से रोका जाता है।”

एक्सप्रेसवे के लिए भूमि-अधिग्रहण मामला: कोर्ट ने मुआवजा राशि बढ़ाने का आदेश बरकरार रखा
सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को उस आदेश को बरकरार रखा जिसमें कुंडली-मानेसर-पलवल एक्सप्रेस-वे के लिए हरियाणा में अधिग्रहित की गई जमीन के कुछ मालिकों को देय मुआवजा राशि बढ़ाई गई थी। जस्टिस बी.आर. गवई और जस्टिस के.वी. विश्वनाथन की पीठ ने पंजाब एवं हरियाणा उच्च न्यायालय के नवंबर 2021 के उस फैसले को खारिज कर दिया जिसमें झज्जर के जिला राजस्व अधिकारी-सह-भूमि अधिग्रहण कलेक्टर (एलएसी) के मुआवजा राशि बढ़ाने के आदेश को रद्द कर दिया गया था।

एलएसी ने 15 सितंबर 2020 को पारित एक आदेश में मुआवज राशि बढ़ाकर 19,91,300 रुपये प्रति एकड़ कर दी थी, साथ ही एक जैसी भूमि वाले मालिकों को उच्च न्यायालय द्वारा पूर्व में दिए गए वैधानिक लाभ भी दिए। कुछ भूमि मालिकों ने उच्च न्यायालय के नवंबर 2021 के फैसले को चुनौती देते हुए उच्चतम न्यायालय में अपील की थी जिस पर ही शीर्ष अदालत ने यह फैसला सुनाया। पीठ ने इस बात पर गौर किया कि भूमि अधिग्रहण अधिनियम 1894 के तहत नवंबर 2004 को अधिसूचना जारी कर झज्जर जिले में अपीलकर्ताओं की भूमि एक्सप्रेसवे के लिए अधिग्रहित की गई थी और मार्च 2006 में मुआवजा आदेश जारी कर 12.50 लाख रुपये प्रति एकड़ का मुआवजा निर्धारित किया गया था।

केंद्र ने शीर्ष कोर्ट को बताया...राज्यों को इंटरनेट बंद करने पर कानून का पालन करने को कहा

केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट को सूचित किया है कि उसने राज्य के मुख्य सचिवों को इंटरनेट शटडाउन के मुद्दे पर शीर्ष अदालत के निर्धारित कानून का पालन करने के लिए लिखा है। केंद्र ने अनुराधा भसीन के मामले में इंटरनेट शटडाउन पर शीर्ष अदालत के फैसले के बारे में जस्टिस विक्रम नाथ और जस्टिस पीबी वराले की पीठ को सूचित किया। अनुराधा भसीन बनाम भारत संघ मामले में शीर्ष अदालत ने फैसला सुनाया था कि इंटरनेट सेवाओं पर प्रतिबंध अवैध है और इंटरनेट बंद करने के आदेश को जरूरत के हिसाब से करना चाहिए। मंगलवार को पीठ के समक्ष दायर याचिका में परीक्षाओं में नकल रोकने के लिए कुछ राज्यों में इंटरनेट सेवाएं बंद करने का आरोप लगाया गया। केंद्र का प्रतिनिधित्व करने वाले वकील ने कहा, हमने मुख्य सचिवों को विशेष पत्र जारी किए हैं कि अनुराधा भसीन का एक निर्णय है, जो कानून निर्धारित करता है, कृपया उस कानून का पालन करें। वकील ने कहा कि केंद्र ने मामले में अपना जवाबी हलफनामा दायर किया है।
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