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SC: आगरा को 'विरासत स्थल' घोषित करने की मांग वाली याचिका खारिज, कोलकाता मेट्रो परियोजना पर सुप्रीम कोर्ट सख्त

Fri, 13 Sep 2024 12:23 PM IST
काव्या मिश्रा न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: काव्या मिश्रा Updated Fri, 13 Sep 2024 12:23 PM IST
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supreme court news and updates today: Kolkata metro project,  Agra heritage city plea
Supreme Court - फोटो : PTI
सुप्रीम कोर्ट से उत्तर प्रदेश के आगरा को बड़ा झटका लगा है। अदालत ने ताजमहल सहित कई ऐतिहासिक स्मारकों वाले आगरा को विश्व विरासत स्थल (World Heritage Site) घोषित करने की मांग वाली याचिका खारिज कर दी है।
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न्यायमूर्ति अभय एस ओका और न्यायमूर्ति ऑगस्टीन जॉर्ज मसीह की पीठ ने ताजमहल और उसके आस-पास के क्षेत्रों की सुरक्षा और संरक्षण पर 1984 की जनहित याचिका में दायर याचिका को खारिज कर दिया। पीठ ने याचिका पर नाराज जताई। न्यायमूर्ति ओका ने कहा कि किसी एक शहर को विश्व विरासत स्थल कैसे घोषित किया जा सकता हैं?
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उन्होंने आगे कहा, 'आपको यह बताना होगा कि विश्व विरासत स्थल घोषणा का प्रावधान कहां है? शहर को विश्व विरासत स्थल घोषित करने के क्या फायदे हैं? क्या विश्व विरासत स्थल घोषित होने के बाद शहर और स्वच्छ हो जाएगा? आपने हमें कुछ नहीं बताया कि यह शहर की मदद कैसे करेगा। हम इसमें कुछ नहीं कर सकते।'
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वकील ने कहा कि आगरा को धरोहर स्थल घोषित करने की आवश्यकता है क्योंकि इसका 1000 साल से अधिक का इतिहास है और कई ऐतिहासिक स्मारकों को संरक्षित करने की आवश्यकता है। वकील ने आगरा को विश्व धरोहर स्थल घोषित करने की याचिका को सही ठहराने के लिए समय मांगा, लेकिन शीर्ष अदालत ने आवेदन खारिज कर दिया।

न्यायमूर्ति ओका ने कहा कि किसी शहर को 'स्मार्ट सिटी' घोषित करने के बावजूद शायद ही कुछ स्मार्ट है। इसी तरह, यह आगरा शहर को विरासत स्थल घोषित करने में कैसे मदद करेगा? क्या घोषणा से आगरा साफ-सुथरा हो जाएगा? 

कोलकाता मेट्रो परियोजना: 'सुनवाई की अगली तारीख तक कोई पेड़ नहीं काटा जाए'

supreme court news and updates today: Kolkata metro project,  Agra heritage city plea
सुप्रीम कोर्ट - फोटो : ANI

सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को मेट्रो रेल परियोजना को लेकर सख्त सुनवाई की। अदालत ने आदेश दिया कि मेट्रो रेल परियोजना के लिए कोलकाता के विक्टोरिया मेमोरिया से सटे मैदान क्षेत्र में अब से कोई पेड़ नहीं काटा जाएगा। यहां तक कि प्रतिरोपण नहीं करने का भी निर्देश दिया है।

न्यायमूर्ति बीआर गवई और न्यायमूर्ति केवी विश्वनाथन की पीठ ने पश्चिम बंगाल सरकार, रेल विकास निगम लिमिटेड (आरवीएनएल) और अन्य को नोटिस जारी कर कलकत्ता हाईकोर्ट के 20 जून के फैसले को चुनौती देने वाली याचिका पर उनके जवाब मांगे। बता दें, हाईकोर्ट ने बड़ी संख्या में पेड़ों की कथित कटाई और प्रत्यारोपण के कारण मैदान क्षेत्र में सभी निर्माण को रोकने का निर्देश देने की मांग करने वाली याचिका को खारिज कर दिया था। 
 
अब सुप्रीम पीठ ने कहा, 'अगली तारीख तक, हम निर्देश देते हैं कि कोई नया पेड़ नहीं काटा जाएगा या प्रत्यारोपित नहीं किया जाएगा।' पीठ ने आरवीएनएल की ओर से पेश वकील से कहा, 'आप काम जारी रख सकते हैं लेकिन आज से पेड़ नहीं काटें।'

याचिकाकर्ता 'पीपुल यूनाइटेड फॉर बेटर लिविंग इन कोलकाता (पब्लिक)' की ओर से पेश वकील ने पीठ से कहा कि मैदानों का क्षेत्र शहर के लिए बहुत महत्वपूर्ण है। उन्होंने कहा कि मेट्रो परियोजना के लिए चुना गया मार्ग मैदान क्षेत्र से होकर जाता है और इसके लिए कई पेड़ों को काटा जाएगा या प्रत्यारोपण किया जाएगा। याचिकाकर्ता के वकील ने आगे कहा, 'हमें लगता है कि बड़ी संख्या में पेड़ काटे जाएंगे और उन्हें (अधिकारियों को) इन पेड़ों के लिए योजना के साथ आने को कहना चाहिए।'

पीठ ने आरवीएनएल की ओर से पेश वकील से कहा कि वह बताए कि पेड़ों का प्रत्यारोपण कैसे किया जाएगा। अदालत ने कहा कि नोटिस जारी करें और तीन सप्ताह में जवाब दें। सुनवाई से पहले पेड़ की कटाई न की जाए। 

हाईकोर्ट में दायर याचिका में विक्टोरिया मेमोरियल से सटे मैदान क्षेत्र में जोका-एस्प्लेनेड मेट्रो परियोजना के निर्माण को रोकने का आदेश देने की मांग की गई थी। जोका-एस्प्लेनेड मेट्रो परियोजना कोलकाता के दक्षिण-पश्चिमी उपनगरों में जोका और माजेरहाट स्टेशनों के बीच आंशिक रूप से चालू है। 


 
 

बार काउंसिल ऑफ इंडिया से सुप्रीम कोर्ट ने मांगा जवाब

सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को बार काउंसिल ऑफ इंडिया से उस याचिका पर जवाब मांगा, जिसमें एलएलबी के अंतिम वर्ष के छात्रों को अखिल भारतीय बार परीक्षा में बैठने से रोकने के उसके फैसले को चुनौती दी गई है। अखिल भारतीय बार परीक्षा विधि स्नातकों को वकील के रूप में नामांकित करने के लिए एक योग्यता परीक्षा है।

मुख्य न्यायाधीश डीवाई चंद्रचूड़ और न्यायमूर्ति जेबी पारदीवाला और न्यायमूर्ति मनोज मिश्रा की पीठ कैंपस लॉ सेंटर और दिल्ली विश्वविद्यालय के विधि केंद्र के नौ अंतिम वर्ष के एलएलबी छात्रों की तरफ से दायर याचिका पर सुनवाई कर रही थी। मामले में नोटिस जारी करते हुए शीर्ष अदालत ने बार काउंसिल ऑफ इंडिया (बीसीआई) से निर्देश लेने को कहा और याचिका पर अगले सप्ताह सुनवाई तय की। यह याचिका निलय राय और एलएलबी के अंतिम वर्ष के आठ अन्य छात्रों ने दायर की है।
 

दुष्कर्म के दंड प्रावधानों के प्रति जागरुकता: सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र से मांगा जवाब

सुप्रीम कोर्ट ने दुष्कर्म के दंड प्रावधानों और पॉक्सो अधिनियम के बारे में लोगों को संवेदनशील बनाने के निर्देश देने की मांग वाली जनहित याचिका पर केंद्र से जवाब मांगा। वकील आबाद हर्षद पोंडा ने जनहित याचिका दाखिल की है ताकि देश को लड़कियों और महिलाओं के लिए एक बेहतर स्थान बनाया जा सके।
सीजेआई जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़, जस्टिस जेबी पारदीवाला और जस्टिस मनोज मिश्रा की पीठ ने केंद्र, केंद्रीय शिक्षा और सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय और केंद्रीय फिल्म प्रमाणन बोर्ड (सीबीएफसी) को नोटिस जारी किए। पीठ ने कहा कि कहा वह एक पॉक्सो मामले में फैसला सुनाने की प्रक्रिया में है और इस संवेदनशील मुद्दे पर दिशा-निर्देश जारी कर सकती है। हम फैसले के बाद इसे सूचीबद्ध करेंगे। पोंडा ने कहा कि लोगों को दुष्कर्म से जुड़े कानूनों और निर्भया मामले के बाद ऐसे कानूनों में हुए बदलाव के बारे में जानकारी देने की जरूरत है। याचिका में कहा गया है कि लैंगिक समानता, महिलाओं और लड़कियों के अधिकारों और सम्मान के साथ जीने की उनकी स्वतंत्रता के बारे में जागरूकता सुनिश्चित करने के लिए नैतिक प्रशिक्षण के विषय को भी शामिल किया जाना चाहिए।

अस्पताल कर्मचारियों की सुरक्षा के दिशा-निर्देश की मांग पर केंद्र और उत्तराखंड से SC ने मांगा जवाब

सुप्रीम कोर्ट ने देशभर में अस्पताल के कर्मचारियों की सुरक्षा के लिए दिशा-निर्देश तैयार करने की मांग वाली याचिका पर केंद्र और उत्तराखंड सरकार से जवाब मांगा है। सीजेआई जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़, जस्टिस जेबी पारदीवाला और जस्टिस मनोज मिश्रा की पीठ उस लड़की की याचिका पर सुनवाई कर रही थी, जिसने अपने नाना के माध्यम से अदालत का रुख किया। इसमें उत्तराखंड पुलिस की ओर से एक अस्पताल में काम करने वाली उसकी मां के दुष्कर्म और हत्या के संबंध में प्राथमिकी दर्ज करने में देरी और अन्य प्रक्रियात्मक खामियों का आरोप लगाया गया।
याचिका में यह भी मांग की गई है कि किसी महिला के लापता होने और उचित समय-सीमा के भीतर उसका पता न लगा पाने की स्थिति में केंद्रीकृत अलर्ट जारी करने का निर्देश दिया जाए। याचिकाकर्ता ने अपनी मां की मौत और यौन उत्पीड़न की स्वतंत्र जांच की मांग की है। याचिका के मुताबिक पीड़िता 30 जुलाई की शाम को लापता हो गई थी और उसका आंशिक रूप से सड़ा हुआ शव 8 अगस्त को उधम सिंह नगर के रुद्रपुर में उसके अपार्टमेंट के पास मिला था। पुलिस ने मीडिया में हंगामा और आंदोलन के बाद गुमशुदगी की रिपोर्ट और यहां तक कि एफआईआर भी देरी से दर्ज की। एफआईआर 14 अगस्त को दर्ज की गई।
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