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SC Updates: सुप्रीम कोर्ट में स्वास्थ्य केंद्र का CJI ने किया उद्घाटन; UAPA मामले में यूपी सरकार से मांगा जवाब

Tue, 17 Sep 2024 02:21 PM IST
बशु जैन न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: बशु जैन Updated Tue, 17 Sep 2024 02:21 PM IST
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supreme court news and updates today 17 september: CJI inaugurates health center in Supreme Court
सुप्रीम कोर्ट - फोटो : अमर उजाला

भारत के मुख्य न्यायाधीश डीवाई चंद्रचूड़ ने मंगलवार को सुप्रीम कोर्ट में दिल्ली सरकारी स्वास्थ्य केंद्र (डीजीएचसी) का उद्घाटन किया। उन्होंने कहा कि यह स्वास्थ्य केंद्र दिल्ली सरकार के सहयोग से वकीलों, वादियों को बुनियादी चिकित्सा उपचार प्रदान करने के लिए स्थापित किया गया है। यहां ब्लड रिपोर्ट, ईएनटी, बिस्तर जैसी अन्य सुविधाएं भी हैं। वहीं सुप्रीम कोर्ट बार एसोसिएशन के अध्यक्ष कपिल सिब्बल ने कहा कि यह लंबे समय से मांग थी क्योंकि वकील सुबह से शाम तक अदालत में काम करते हैं और बहुत तनाव होता है। प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र इसलिए जरूरी है। इसमें दो डॉक्टर और बुनियादी सुविधाएं हैं। इस पहल के लिए भारत के मुख्य न्यायाधीश को बधाई देता हूं।

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केरल के पत्रकार की याचिका पर यूपी सरकार से जवाब-तलब
सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को केरल के पत्रकार सिद्दीकी कप्पन की याचिका पर उत्तर प्रदेश सरकार से जवाब मांगा। पत्रकार ने अपने खिलाफ दर्ज यूएपीए मामले में हर हफ्ते पुलिस को रिपोर्ट करने की जमानत शर्त में छूट देने की मांग की है। न्यायमूर्ति पीएस नरसिम्हन और न्यायमूर्ति आर महादेवन की पीठ ने राज्य सरकार से कप्पन की याचिका पर अपना जवाब दाखिल करने को कहा। कप्पन को अक्तूबर 2020 में हाथरस में एक दलित महिला से सामूहिक दुष्कर्म के बाद मौत के मामले में हाथरस जाते समय गिरफ्तार किया गया था। पीठ मामले की सुनवाई अब दो सप्ताह बाद करेगी। 9 सितंबर 2022 को शीर्ष अदालत ने कप्पन को जमानत दे दी थी। जमानत के लिए कई शर्तें रखी गई थीं। इसमें शामिल था कि जेल से रिहा होने के बाद उन्हें अगले छह सप्ताह तक दिल्ली में रहना होगा और हर हफ्ते सोमवार को यहां निज़ामुद्दीन पुलिस स्टेशन में रिपोर्ट करना होगा। छह महीने के बाद वह केरल में अपने मूल स्थान मलप्पुरम की यात्रा कर सकता है और वहां भी उसे हर सोमवार को स्थानीय पुलिस स्टेशन में रिपोर्ट करना होगा। 
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केरल में अभिनेत्री से मारपीट मामले में मुख्य आरोपी को मिली जमानत  
उच्चतम न्यायालय ने केरल में 2017 में अभिनेत्री से मारपीट मामले में मुख्य आरोपी सुनील एनएस को मंगलवार को जमानत दे दी। मामले में अभिनेता दिलीप भी आरोपी हैं। न्यायमूर्ति एएस ओका और न्यायमूर्ति पंकज मिथल की पीठ ने जमानत याचिका खारिज करने के केरल उच्च न्यायालय के आदेश को चुनौती देने वाली सुनील की याचिका पर सुनवाई कर रही थी। पीठ ने उनकी सात साल से अधिक लंबी कैद की अवधि पर विचार किया। कोर्ट ने माना कि मामले में मुकदमे की कार्यवाही जल्द ही समाप्त होने की संभावना नहीं है।शीर्ष अदालत ने कहा कि सुनील को उसकी रिहाई के लिए जमानत की शर्तें लगाने के लिए एक सप्ताह के भीतर ट्रायल कोर्ट में पेश किया जाना चाहिए।
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ममता बनर्जी के इस्तीफे की मांग वाली याचिका खारिज
कोलकाता के आरजी कर मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल में जूनियर डॉक्टर की हत्या के विरोध में पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के इस्तीफे की मांग करने वाली याचिका सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को खारिज कर दी। मुख्य न्यायाधीश डी वाई चंद्रचूड़, न्यायमूर्ति जेबी पारदीवाला और न्यायमूर्ति मनोज मिश्रा की पीठ ने वकील को याचिका के लिए फटकार लगाई और कहा कि उसे इस तरह का आदेश पारित करने की छूट नहीं है। पीठ ने कहा कि यह कोई राजनीतिक मंच नहीं है। आप बार के सदस्य हैं। हम जो कहते हैं उसके लिए हमें आपकी पुष्टि की आवश्यकता नहीं है। आप जो कहते हैं उसे कानूनी अनुशासन के नियमों का पालन करना होगा। हम यहां देखने के लिए नहीं हैं कि आप एक राजनीतिक पदाधिकारी के बारे में क्या महसूस करते हैं। हम डॉक्टरों की विशिष्ट शिकायतों से निपट रहे हैं। यदि आप मुझसे यह निर्देश देने के लिए कहते हैं कि सीएम को इस्तीफा दे देना चाहिए, तो यह हमारे अधिकार क्षेत्र का हिस्सा नहीं है।
 

सुप्रीम कोर्ट ने 30 सेना अधिकारियों के खिलाफ आपराधिक कार्यवाही बंद की
उच्चतम न्यायालय ने नागालैंड के मोन जिले में 2021 में आतंकवादियों पर किए गए हमले में 13 नागरिकों की हत्या के आरोपी 30 सैन्यकर्मियों के खिलाफ आपराधिक कार्यवाही बंद कर दी। कोर्ट ने कहा कि अगर केंद्र सैन्य कर्मियों के खिलाफ मुकदमा चलाने की मंजूरी दे तो मामले को अंत तक ले जाया जा सकता है। न्यायमूर्ति विक्रम नाथ और पीबी वराले की पीठ ने कहा कि आदेश सेना को कर्मियों के खिलाफ कोई अनुशासनात्मक कार्रवाई करने से नहीं रोकेगा। नागालैंड सरकार ने अलग-अलग कार्यवाही में सेना के जवानों पर मुकद्मा चलाने की मंजूरी से इनकार को चुनौती दी है। शीर्ष अदालत ने एक प्रमुख रैंक के अधिकारी सहित कर्मियों की पत्नियों द्वारा दायर दो अलग-अलग याचिकाओं पर कार्यवाही बंद कर दी। इन्होंने नागालैंड पुलिस ने दर्ज मामले को बंद करने की मांग की थी। पत्नियां इस आधार पर आपराधिक कार्यवाही बंद करने की मांग कर रही थीं कि सशस्त्र बल विशेष अधिकार अधिनियम (एएफएसपीए) के तहत दी गई छूट के कारण राज्य सरकार के पास कर्मियों पर मुकदमा चलाने का कोई अधिकार नहीं है। याचिका में तर्क दिया गया कि यदि क्षेत्र एएफएसपीए के अंतर्गत आता है तो सेना कर्मियों के खिलाफ कोई भी कानूनी कार्यवाही शुरू करने के लिए केंद्र से पूर्व मंजूरी की आवश्यकता है।

सुप्रीम कोर्ट ने डीके शिवकुमार से मांगा जवाब

सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को कर्नाटक के उपमुख्यमंत्री डीके शिवकुमार और राज्य सरकार से उनके खिलाफ आय से अधिक संपत्ति मामले की जांच के लिए केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) को दी गई सहमति वापस लेने के खिलाफ याचिका पर जवाब मांगा। न्यायमूर्ति सूर्यकांत और न्यायमूर्ति उज्जल भुइयां की पीठ ने भाजपा विधायक बसंगौड़ा आर पाटिल (यतनाल) की तरफ से दायर याचिका पर उन्हें नोटिस जारी किया, जिसमें उन्होंने सहमति वापस लेने के खिलाफ उनकी याचिका को खारिज करने के कर्नाटक उच्च न्यायालय के 29 अगस्त के आदेश को चुनौती दी है।

वहीं इस मामले की सुनवाई के दौरान डीके शिवकुमार की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता अभिषेक सिंघवी ने कहा कि सीबीआई, जिसे उच्च न्यायालय के आदेश से सबसे अधिक व्यथित होना चाहिए, अपील में शीर्ष अदालत के समक्ष नहीं आई है। उन्होंने कहा, बल्कि, याचिका एक निजी व्यक्ति की तरफ से उच्च न्यायालय के समक्ष दायर की गई है। जबकि भाजपा विधायक की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता सिद्धार्थ दवे ने कहा कि फैसले में याचिकाकर्ता के अधिकार क्षेत्र के बारे में एक शब्द भी नहीं कहा गया है।
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