SC Update: गंभीर बीमारियों के इलाज को NHP में शामिल करने की मांग, सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र से किया जवाब तलब
जनहित याचिका में केंद्रीय स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय और सभी राज्यों एवं केंद्र शासित प्रदेशों को पक्षकार बनाया गया है। गंभीर बीमारियों से पीड़ित लोगों के लिए विशेष चिकित्सा देखभाल को पैलिएटिव केयर कहते हैं।
विस्तार
सुप्रीम कोर्ट ने गंभीर रोग से पीड़ित मरीजों को राष्ट्रीय स्वास्थ्य कार्यक्रम (एनएचपी) के तहत ‘पैलिएटिव केयर’ (गंभीर बीमारियों का उपचार) मुहैया कराने का प्राधिकारियों को निर्देश देने संबंधी जनहित याचिका पर गुरुवार को केंद्र से जवाब तलब किया।
जयना कोठारी की दलील
प्रधान न्यायाधीश डी वाई चंद्रचूड़, न्यायमूर्ति जे बी पारदीवाला एवं न्यायमूर्ति मनोज मिश्रा की पीठ ने याचिकाकर्ता की ओर से न्यायालय में पेश हुई वरिष्ठ अधिवक्ता जयना कोठारी की इन दलीलों पर गौर किया कि ‘पैलिएटिव केयर’ को राष्ट्रीय स्वास्थ्य कार्यक्रम का हिस्सा बनाया जाना चाहिए और इसे मान्यता दी चाहिए।
मुझे नहीं लगता कि आपको यह...
न्यायमूर्ति चंद्रचूड़ ने कहा, 'आप इस बात पर परमादेश (एक रिट) चाहते हैं कि पैलिएटिव केयर अनुच्छेद 21 के अंतर्गत आती है। मुझे नहीं लगता कि आपको यह अनुरोध करने की आवश्यकता है। पैलिएटिव केयर का अधिकार स्वास्थ्य और जीवन के अधिकार का हिस्सा है। अनुच्छेद 21 मानव अस्तित्व के सभी पहलुओं को शामिल करता है।’
सिर्फ एक या दो फीसदी मरीजों को मिली केयर
पीठ ने याचिका को उचित बताते हुए केंद्र से आठ सप्ताह में जवाब देने को कहा। उसने केंद्र से देश में पैलिएटिव केयर पर मौजूदा नीति की जानकारी देते हुए एक व्यापक जवाब दाखिल करने को कहा। कोठारी ने कहा कि इस समय देश में एक से दो प्रतिशत रोगियों को पैलिएटिव केयर मिलती है।
जनहित याचिका में केंद्रीय स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय और सभी राज्यों एवं केंद्र शासित प्रदेशों को पक्षकार बनाया गया है। गंभीर बीमारियों से पीड़ित लोगों के लिए विशेष चिकित्सा देखभाल को पैलिएटिव केयर कहते हैं।
जर्मनी के संघीय संवैधानिक न्यायालय के छह न्यायाधीशों ने गुरुवार को सुप्रीम कोर्ट में भारत के मुख्य न्यायाधीश डी वाई चंद्रचूड़ के साथ पीठ साझा की। सीजेआई ने दोपहर में कार्यवाही की शुरुआत में कहा कि हम जर्मनी के संघीय संवैधानिक न्यायालय के न्यायाधीशों का स्वागत करते हैं। गौरतलब है कि आधिकारिक यात्रा पर नई दिल्ली आए जर्मन न्यायाधीशों ने पीठ साझा की और न्यायिक कार्यवाही देखी।
मानहानि मामला : आप नेता संजय सिंह की याचिका पर 11 मार्च को सुनवाई
आम आदमी पार्टी नेता संजय सिंह की याचिका पर सुप्रीम कोर्ट 11 मार्च को सुनवाई करेगा। प्रधानमंत्री की शैक्षणिक योग्यता पर टिप्पणी मामले में सिंह ने गुजरात हाईकोर्ट के उस आदेश को चुनौती दी है। क्योंकि, हाईकोर्ट ने 16 फरवरी को सिंह और दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल की मानहानि मामले में उनके खिलाफ जारी समन को रद्द करने की मांग वाली याचिका खारिज कर दी थी।
सिंह ने वकील विवेक जैन के माध्यम से शीर्ष अदालत में याचिका दायर की है। हाईकोर्ट के आदेश को चुनौती देने वाली सिंह की याचिका पर न्यायमूर्ति बी आर गवई और न्यायमूर्ति संदीप मेहता की पीठ ने बृहस्पतिवार को सुनवाई की और अगली तारीख 11 मार्च तय की।
मालूम हो कि गुजरात की एक मेट्रोपोलिटन अदालत ने केजरीवाल और संजय सिंह को पीएम मोदी की शैक्षणिक डिग्रियों के संबंध में उनके व्यंग्यात्मक और अपमानजनक बयानों पर मानहानि मामले में तलब किया था।
पैलियेटिव केयर को राष्ट्रीय स्वास्थ्य कार्यक्रम का हिस्सा बनाने की मांग पर केंद्र को नोटिस
सुप्रीम कोर्ट ने असाध्य रूप से बीमार लोगों के लिए पैलियेटिव केयर को राष्ट्रीय स्वास्थ्य कार्यक्रम का हिस्सा बनाने की मांग वाली जनहित याचिका पर केंद्र सरकार को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है। पैलियेटिव केयर कैंसर जैसी असाध्य बीमारियों में मरीज को दी जाने वाली खास देखभाल होती है, इसमें मरीज को देखभाल के साथ यह भरोसा दिलाया जाता है कि उसका ध्यान रखने वाले लोग हैं, ताकि उनका मनोबल न टूटे।
सीजेआई जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़, जस्टिस जेबी पारदीवाला और जस्टिस मनोज मिश्रा की पीठ के समक्ष याचिकाकर्ता की वकील जयना कोठारी ने जनहित याचिका का उल्लेख करते हुए बताया कि पैलियेटिव केयर को मान्यता दी जानी चाहिए और इसे राष्ट्रीय स्वास्थ्य कार्यक्रम का हिस्सा बनाया जाना चाहिए। यह जनहित याचिका बंगलूरू निवासी राजश्री नागराजी ने दाखिल की है। पीठ जनहित याचिका की उस मांग से सहमति नहीं हुई जिसमें कहा गया कि पैलियेटिव केयर पाने के अधिकार को संविधान के अनुच्छेद 21 (जीवन और स्वतंत्रता की सुरक्षा) के तहत स्वास्थ्य के अधिकार का एक हिस्सा घोषित किया जाना चाहिए। सीजेआई ने कहा, आप यह कहते हुए परमादेश (रिट) चाहते हैं कि पैलियेटिव केयर अनुच्छेद 21 के अंतर्गत आती है। मुझे नहीं लगता कि आपको इस प्रार्थना को आगे बढ़ाने की आवश्यकता है। पैलियेटिव केयर का अधिकार स्वास्थ्य और जीवन के अधिकार का हिस्सा है। अनुच्छेद 21 मानव अस्तित्व के सभी पहलुओं को शामिल करता है। जनहित याचिका को ‘वास्तविक’ बताते हुए पीठ ने केंद्र से आठ सप्ताह में जवाब मांगा और देश में पैलियेटिव केयर पर मौजूदा नीति बताते हुए एक व्यापक जवाब दाखिल करने को कहा। कोठारी ने अदालत को बताया कि वर्तमान में, देश में एक से दो प्रतिशत रोगियों को पैलियेटिव केयर मिलती है। जनहित याचिका में केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय और सभी राज्यों व केंद्र शासित प्रदेशों को प्रतिवादी बनाया है।
न्यायिक सेवा से दृष्टिबाधितों को बाहर करने पर केंद्र और एमपी से सुप्रीम कोर्ट ने मांगा जवाब
सुप्रीम कोर्ट ने एक पत्र पर संज्ञान लेते हुए गुरुवार को केंद्र और एमपी से जवाब मांगा है। शीर्ष कोर्ट की मुख्य न्यायाधीश डी वाई चंद्रचूड़ और न्यायमूर्ति जेबी पारदीवाला और न्यायमूर्ति मनोज मिश्रा की पीठ ने यह कार्रवाई एक पत्र का स्वत: संज्ञान लेते हुए की। अदालत ने इस मामले में अपनी सहायता के लिए वरिष्ठ वकील गौरव अग्रवाल को न्याय मित्र नियुक्त किया। सीजेआई ने कहा कि उन्हें राज्य में जिला न्यायपालिका से दृष्टिबाधित उम्मीदवारों को बाहर करने पर एक पत्र मिला है।