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SC Updates: सुप्रीम कोर्ट बार एसोसिएशन ने उठाया ऐतिहासिक कदम, छह स्थानीय भाषाओं में किया परिपत्र जारी

Wed, 28 Feb 2024 01:41 PM IST
काव्या मिश्रा न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: काव्या मिश्रा Updated Wed, 28 Feb 2024 01:41 PM IST
सार

एससीबीए ने अंग्रेजी के अलावा छह भाषाओं में एक परिपत्र जारी किया है। यह परिपत्र बुधवार शाम को सुप्रीम कोर्ट के न्यायाधीशों के सम्मान में होने वाले समारोह से संबंधित है।

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Supreme Court News and Update today, SC Bar Association to issue communication in vernacular languages
सुप्रीम कोर्ट - फोटो : ANI

विस्तार

सुप्रीम कोर्ट बार एसोसिएशन ने एक बड़ा कदम उठाया है। उसने अंग्रेजी के अलावा हिंदी और उर्दू सहित स्थानीय भाषाओं में अपने संचार और परिपत्र जारी करने का फैसला लिया है।

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सुप्रीम कोर्ट बार एसोसिएशन (एससीबीए) के सचिव रोहित पांडे ने कहा, 'शीर्ष अदालत के इतिहास में पहली बार हमने हिंदी, उर्दू, कन्नड़, बंगाली, मराठी और असमिया में भी परिपत्र जारी करने का फैसला किया है। सुप्रीम कोर्ट एक मिनी इंडिया यानी छोटा भारत है।'
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बार सचिव ने कहा, 'जल्द ही और भाषाओं में सर्कुलर जारी किया जाएगा।'

बता दें, एससीबीए ने अंग्रेजी के अलावा छह भाषाओं में एक परिपत्र जारी किया है। यह परिपत्र बुधवार शाम को सुप्रीम कोर्ट के न्यायाधीशों न्यायमूर्ति सतीश चंद्र शर्मा, न्यायमूर्ति ऑगस्टाइन जॉर्ज मसीह, न्यायमूर्ति संदीप मेहता और प्रसन्ना भालचंद्र वराले के सम्मान में होने वाले समारोह से संबंधित है।
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एससीबीए ने कहा कि प्रधान न्यायाधीश डी वाई चंद्रचूड़ समारोह की अध्यक्षता करेंगे। इससे पहले, सुप्रीम कोर्ट ने कुछ क्षेत्रीय भाषाओं में अपने फैसले देने का निर्णय लिया था।

बीआरएस नेता के कविता की राहत बढ़ी
सुप्रीम कोर्ट ने कथित दिल्ली त्पाद शुल्क नीति घोटाले के संबंध में प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) द्वारा दर्ज धन शोधन मामले में बीआरएस नेता के कविता को किसी भी दंडात्मक कार्रवाई से दी गई सुरक्षा बुधवार को 13 मार्च तक बढ़ा दी। न्यायमूर्ति बेला एम त्रिवेदी और न्यायमूर्ति पंकज मिथल की पीठ ने अपने पहले के आदेश की अवधि बढ़ा दी और कहा कि मामले की आगे की सुनवाई अब 13 मार्च को होगी। ईडी ने 21 फरवरी को भारत राष्ट्र समिति (बीआरएस) नेता को समन जारी कर 26 फरवरी को उपस्थित होने के लिए कहा था। हालांकि, कविता केंद्रीय जांच एजेंसी के सामने पेश नहीं हुईं।

अमरावती सांसद की जाति प्रमाण पत्र रद्द करने के खिलाफ याचिका पर फैसला सुरक्षित
उच्चतम न्यायालय ने लोकसभा सांसद नवनीत कौर राणा का जाति प्रमाणपत्र रद्द करने के बंबई उच्च न्यायालय के फैसले को चुनौती देने वाली उनकी याचिका पर बुधवार को अपना फैसला सुरक्षित रख लिया। 8 जून, 2021 को उच्च न्यायालय ने कहा था कि 'मोची' जाति प्रमाण पत्र फर्जी दस्तावेजों का उपयोग करके धोखाधड़ी से प्राप्त किया गया था। इसने अमरावती सांसद पर 2 लाख रुपये का जुर्माना भी लगाया था।

हमारी आपराधिक न्याय प्रणाली खुद ही सजा दे सकती है : सुप्रीम कोर्ट
सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि हमारी आपराधिक न्याय प्रणाली खुद ही सजा दे सकती है। पत्नी की आत्महत्या के 1993 के मामले में 30 वर्ष बाद पति को बरी करते हुए अदालत ने यह टिप्पणी की। पीठ ने कहा कि शादी के सात साल के भीतर किसी महिला को आत्महत्या के लिए उकसाने के मामलों में अदालतों को बहुत सावधान और सतर्क रहना चाहिए। ऐसा नहीं हुआ तो यह धरणा बन सकती है कि दोषसिद्धि कानूनी नहीं, बल्कि नैतिक है।

पीठ ने अपीलकर्ता नरेश कुमार को बरी करते हुए कहा कि सिर्फ इस तथ्य से कि मृतक ने अपनी शादी के सात साल की अवधि के भीतर आत्महत्या कर ली, साक्ष्य अधिनियम की धारा 113 ए स्वत: लागू नहीं होगी। पीठ ने कहा, अदालत को धारा 113ए के तहत सबूतों का आकलन करने में बेहद सावधानी बरतनी चाहिए। अदालत को यह आकलन करना चाहिए कि क्या क्रूरता बरती गई थी।

 महज उत्पीड़न आत्महत्या के लिए उकसाने का दोषी ठहराने के लिए पर्याप्त नहीं...पीठ ने कहा, महज उत्पीड़न किसी आरोपी को आत्महत्या के लिए उकसाने का दोषी ठहराने के लिए पर्याप्त नहीं है। इसके लिए एक सक्रिय कार्य या प्रत्यक्ष कार्य की भी आवश्यकता होती है, जिसकी वजह से मृतक ने आत्महत्या की। आपराधिक मनःस्थिति के घटक को स्पष्ट रूप से मौजूद नहीं माना जा सकता है लेकिन यह दृश्यमान और विशिष्ट होना चाहिए।

 हाईकोर्ट व ट्रायल कोर्ट सिर्फ तीन चीजों से प्रभावित हुईं पीठ ने कहा कि इस मामले में हाईकोर्ट के साथ-साथ ट्रायल कोर्ट सिर्फ तीन चीजों से प्रभावित हो गई। मृतक ने शादी के सात साल के भीतर आत्महत्या कर ली, आरोपी कुछ व्यवसाय शुरू करने के लिए मृतक के माता-पिता से पैसे की मांग कर रहा था और मृतक तनाव में रहती थी।

विवेक बिंद्रा के घोटालों की सीबीआई जांच की मांग पर नोटिस
सुप्रीम कोर्ट ने प्रेरक वक्ता विवेक बिंद्रा और उनकी कंपनी बड़ा बिजनेस प्राइवेट लिमिटेड के बड़े पैमाने पर देशव्यापी घोटाले की जांच के लिए सीबीआई की विशेष जांच टीम गठित करने की मांग पर नोटिस जारी किया। जस्टिस एमएम सुंदरेश और जस्टिस एसवीएन भट्टी की पीठ ने याचिका पर केंद्र और अन्य से छह हफ्ते में जवाब मांगा था। याचिकाकर्ता शुभम चौधरी व अन्य ने दावा किया है कि उन्होंने अपनी मेहनत की कमाई को बड़ा बिजनेस प्राइवेट लिमिटेड की मनी चेन जैसी योजना में जमा किया था। याचिका में इस मुद्दे को राष्ट्रीय प्रभाव वाला बताते हुए सीबीआई जांच की मांग की गई। इसमें कहा गया कि शिकायतकर्ता विभिन्न राज्यों से हैं और पहले ही स्थानीय पुलिस को लिखित शिकायतें दे चुके हैं, लेकिन पुलिस की ओर से कोई कार्रवाई नहीं की गई है। अब तक किसी की गिरफ्तारी भी नहीं हुई और न ही जांच की गई।  

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