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अनुच्छेद-370 मामले को सात सदस्यीय पीठ को सौंपने पर विचार कर सकता है सुप्रीम कोर्ट

Fri, 13 Dec 2019 05:28 AM IST
संजीव कुमार झा न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: संजीव कुमार झा Updated Fri, 13 Dec 2019 05:28 AM IST
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Supreme Court may consider handing over the case of Article 370 to a seven member bench
सुप्रीम कोर्ट - फोटो : social media

सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार को संकेत दिए कि वह अनुच्छेद-370 को हटाने को चुनौती देने के मुद्दे को सात सदस्यीय बड़ी पीठ को सौंपने पर विचार कर सकता है लेकिन इससे पहले वह इस मुद्दे पर सभी पक्षों की प्रारंभिक दावों को सुनेगा। अनुच्छेद-370 के तहत जम्मू-कश्मीर राज्य को विशेष दर्जा हासिल था लेकिन केंद्र सरकार ने 5 अगस्त को इसे खत्म कर दिया। उसके फैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी गई है।

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सुप्रीम कोर्ट की यह टिप्पणी सरकार के फैसले को चुनौती देने वाले याचिकाकर्ता प्रेम शंकर झा के वकील दिनेश द्विवेदी की उस दलील के बाद आई जिसमें उन्होंने कहा कि 1959 में प्रेम नाथ कौल बनाम जम्मू-कश्मीर राज्य और 1970 में संपत प्रकाश बनाम जम्मू-कश्मीर राज्य के मामलों में पांच सदस्यीय पीठ ने परस्पर विरोधी फैसले दिए थे। जस्टिस एनवी रमना की पांच सदस्यीय पीठ इस मामले की सुनवाई कर रही है।
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सुनवाई के दौरान कुछ याचिकाकर्ताओं के वरिष्ठ वकील राजीव धवन ने कहा कि पीठ को पहले अनुच्छेद-370 को हटाने की चुनौती देने वाले पक्षों को सुनना चाहिए और इसके बाद मामले को बड़ी पीठ को सौंपने की मांग करने वाले वकीलों को सुना जाना चाहिए।
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इस पर पीठ ने कहा कि मामले को सात सदस्यीय पीठ को सौंपने के सवाल पर बाद में विचार किया जाएगा। पीठ में जस्टिस संजय किशन कौल, जस्टिस आर सुभाष रेड्डी, जस्टिस बीआर गवई और जस्टिस सूर्य कांत भी शामिल हैं। मामले पर गुरुवार को सुनवाई अधूरी रही और मामले की अगली सुनवाई अगले साल 21 जनवरी को होगी।

संविधान सभा के पुनर्गठन को जम्मू-कश्मीर राज्य सक्षम प्राधिकारी

शाह फैसल और शेहला रशीद के वकील राजू रामचंद्रन ने गुरुवार को भी अपनी दलीलें रखीं। उन्होंने कहा कि अनुच्छेद 370 की स्कीम में लोकतांत्रिक शक्ति राज्य के पास है जबकि कार्यकारी शक्ति केंद्र सरकार के पास है। जम्मू-कश्मीर राज्य के पास अपने सांविधानिक ढांचे के साथ ही राज्य के केंद्र सरकार के साथ सांविधानिक संबंधों को निर्धारित करने की शक्ति है।



यह जम्मू-कश्मीर राज्य है जो लोकतांत्रिक तौर पर अपनी निर्वाचक शक्तियों के संविधान के अनुरूप इस्तेमाल पर फैसला कर सकता है। सुप्रीम कोर्ट के बुधवार को उठाए गए एक सवाल का जवाब देते हुए वरिष्ठ वकील ने कहा कि यह एकमात्र जम्मू-कश्मीर राज्य है जो यह तय कर सकता है कि राज्य की संविधान सभा का उत्तराधिकारी कौन होगा और भविष्य में कौन इसकी शक्तियों में बदलाव कर सकता है। मौजूदा समय में राज्य की बजाय राष्ट्रपति के माध्यम से केंद्र सरकार यह तय कर रहा है।

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