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Supreme Court: विवाहित महिला का विवाह का वादा अवैध, सुप्रीम कोर्ट ने दुष्कर्म का केस किया खारिज

Wed, 06 Mar 2024 07:59 PM IST
Amit Sharma Digital अमित शर्मा
Updated Wed, 06 Mar 2024 07:59 PM IST
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सार
न्यायमूर्ति सीटी रवि कुमार और न्यायमूर्ति राजेश बिंदल की अदालत ने एक मामले की सुनवाई के बाद कहा कि महिला अपने पुरुष साथी से उम्र में दस वर्ष बड़ी थी। वह न केवल मानसिक तौर पर परिपक्व थी, बल्कि उसे किसी संबंध की नैतिकता-अनैतिकता के बारे में पूरी जानकारी थी...
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Supreme Court: Married woman's promise of marriage is illegal, Supreme Court dismisses rape case
Supreme Court - फोटो : ANI (File Photo)

विस्तार

सर्वोच्च न्यायालय ने कहा है कि एक विवाहित महिला के द्वारा किसी पुरुष से विवाह का वादा कर शारीरिक संबंध बनाने के मामले में पुरुष साथी पर दुष्कर्म का आरोप नहीं लगाया जा सकता। स्वयं विवाहित होने के बाद भी किसी पुरुष को विवाह का वादा करना अनैतिक है। ऐसे में विवाह संबंध न हो पाने की स्थिति में पुरुष साथी पर दुष्कर्म का मुकदमा नहीं चलाया जा सकता।     

न्यायमूर्ति सीटी रवि कुमार और न्यायमूर्ति राजेश बिंदल की अदालत ने एक मामले की सुनवाई के बाद कहा कि महिला अपने पुरुष साथी से उम्र में दस वर्ष बड़ी थी। वह न केवल मानसिक तौर पर परिपक्व थी, बल्कि उसे किसी संबंध की नैतिकता-अनैतिकता के बारे में पूरी जानकारी थी। ऐसे में किसी उसके द्वारा पुरुष साथी पर दुष्कर्म का आरोप लगाना सही नहीं है।   

क्या था मामला?

दरअसल, सुनीता (बदला हुआ नाम) का अपने पति से तलाक का मुकदमा चल रहा था। इसी दौरान वह राजेश (बदला हुआ नाम) नाम के युवक के संपर्क में आई। उसकी उससे दोस्ती हो गई और दोनों के बीच शारीरिक संबंध बन गए। लेकिन सुनीता ने सितंबर 2020 में यह कहते हुए दुष्कर्म का मामला दर्ज करा दिया कि राजेश ने उससे विवाह का वादा कर शारीरिक संबंध बनाए हैं।

उसने यह भी कहा कि उसने राजेश से विवाह का वादा होने के बाद ही अपने पति को तलाक देने के लिए मुकदमा दायर किया था, लेकिन बाद में राजेश उससे विवाह करने से मुकर गया और यह दुष्कर्म की श्रेणी में आता है। महिला के अनुसार, एक मंदिर में विवाह कर वह राजेश के साथ पत्नी की तरह रहने लगी थी। लेकिन बाद में राजेश ने उसे पत्नी के रूप में स्वीकार करने से इनकार कर दिया। इसके बाद उसने राजेश के खिलाफ दुष्कर्म और धोखाधड़ी की धाराओं में केस दर्ज कराया।

बचाव पक्ष के वकील ने बताया

बचाव पक्ष के वकील अश्विनी कुमार दुबे ने अमर उजाला से कहा कि अदालत ने सुनवाई के दौरान पाया कि महिला पहले से शादीशुदा थी। एक शादीशुदा महिला के द्वारा किसी से विवाह का वादा करना किसी भी तरह नैतिक नहीं है। चूंकि, महिला के तलाक का मामला अदालत में चल रहा था, लेकिन तलाक स्वीकृत नहीं हुआ था, इसलिए वाद दायर करने के समय वह विवाहित थी।

अदालत ने माना कि इसके बाद भी एक पुरुष से संबंध बनाकर उसने अपने पति को धोखा दिया है। इसके अलावा महिला अपने पुरुष साथी से दस साल बड़ी थी। ऐसे में अदालत ने उसे परिपक्व और समझदार माना। यही कारण है कि अदालत ने गलत आधार पर लगाए गए दुष्कर्म के आरोप को सही नहीं माना।  

अश्विनी कुमार दुबे ने कहा कि उक्त मामले में एफआईआर पहले की गई थी, जबकि महिला का तलाक उसके बाद में स्वीकार किया गया है। ऐसे में पूरे मामले के दौरान महिला विवाहित थी। यही कारण है कि अदालत ने एक विवाहित महिला के द्वारा दूसरे युवक को विवाह का वादा करना सही नहीं पाया।

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