{"_id":"69cc750eb6b4a6a8cb084e55","slug":"supreme-court-many-lawsuits-are-being-filed-not-for-justice-but-for-delay-and-pressure-news-in-hindi-2026-04-01","type":"story","status":"publish","title_hn":"Supreme Court: 'न्याय नहीं, देरी व दबाव के लिए हो रहे कई मुकदमे', मुकदमों की बढ़ती संख्या पर 'सुप्रीम' टिप्पणी","category":{"title":"India News","title_hn":"देश","slug":"india-news"}}
Supreme Court: 'न्याय नहीं, देरी व दबाव के लिए हो रहे कई मुकदमे', मुकदमों की बढ़ती संख्या पर 'सुप्रीम' टिप्पणी
Wed, 01 Apr 2026 06:59 AM IST
Shubham Kumar
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: Shubham Kumar
Updated Wed, 01 Apr 2026 06:59 AM IST
सार
देश भर में लगभग 5.5 करोड़ केस लंबित हैं, जिनमें ज्यादातर निचली अदालतों में हैं। सर्वोच्च न्यायालय में 10 वर्ष से ज्यादा समय से 698 से अधिक जनहित याचिकाएं लंबित हैं। वहीं कुल 3500 जनहित याचिकाएं आजतक सुनवाई का इंतजार कर रहीं हैं।
विज्ञापन
सुप्रीम कोर्ट
- फोटो : ANI
विस्तार
सुप्रीम कोर्ट ने देश में बढ़ते मुकदमों को लेकर कड़ी टिप्पणी करते हुए कहा है कि अदालतों में दाखिल हो रहे कई मामले न्याय पाने की वास्तविक इच्छा से कम और कार्यवाही में देरी करने, विरोधियों को परेशान करने तथा न्यायिक समय बर्बाद करने के उद्देश्य से अधिक प्रेरित दिखाई देते हैं। अदालत ने साफ किया कि न्यायिक व्यवस्था का दुरुपयोग बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। जस्टिस दीपांकर दत्ता और जस्टिस एजी मसीह की पीठ ने कहा कि न्यायिक प्रक्रिया का उद्देश्य केवल वास्तविक और गंभीर विवादों का समाधान करना है, न कि बार-बार या बेतुके दावों को बढ़ावा देना।
विज्ञापन
यदि कोई पक्ष जानबूझकर निरर्थक या परेशान करने वाले मुकदमे दायर करता है, तो अदालत ऐसे मामलों को खारिज करने के साथ-साथ जुर्माना भी लगा सकती है। पीठ ने स्पष्ट किया कि किसी एक विवाद को अलग-अलग तरीकों से बार-बार उठाने की अनुमति नहीं दी जा सकती। एक बार जब कोई मामला सक्षम अदालत में पूरी तरह सुना और तय हो जाता है, तो उसी मुद्दे को दोबारा उठाना न्यायिक व्यवस्था के खिलाफ है। इससे न केवल अदालतों पर अनावश्यक बोझ बढ़ता है, बल्कि अन्य मामलों में न्याय मिलने में भी देरी होती है।
विज्ञापन
लंबित मामले
बता दें देश भर में लगभग 5.5 करोड़ केस लंबित हैं, जिनमें ज्यादातर निचली अदालतों में हैं। सर्वोच्च न्यायालय में 10 वर्ष से ज्यादा समय से 698 से अधिक जनहित याचिकाएं लंबित हैं। वहीं कुल 3500 जनहित याचिकाएं आजतक सुनवाई का इंतजार कर रहीं हैं। जिन्हें पिछले 42 वर्षों में भी नहीं निपटाया जा सका।
विज्ञापन
संपत्ति विवाद पर सुनवाई के दौरान कोर्ट ने यह टिप्पणी की
शीर्ष अदालत की यह टिप्पणी एक सिविल अपील को खारिज करते हुए आई। मामला हैदराबाद के हिमायत नगर स्थित एक संपत्ति विवाद से जुड़ा था। सुप्रीम कोर्ट ने आंध्र प्रदेश हाईकोर्ट के फैसले को बरकरार रखा, हालांकि उसके कुछ तर्कों से असहमति भी जताई।