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Supreme Court: छात्रसंघ चुनाव से जुड़ी PIL खारिज, लिंगदोह समिति के मानदंड लागू करने पर अदालत ने की अहम टिप्पणी
Tue, 06 Jan 2026 12:16 PM IST
अमन तिवारी
अमर उजाला नेटवर्क, नई दिल्ली
अमर उजाला नेटवर्क, नई दिल्ली
Published by: अमन तिवारी
Updated Tue, 06 Jan 2026 12:16 PM IST
सार
सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को कॉलेजों और विश्वविद्यालयों में लिंगदोह कमेटी रिपोर्ट को लागू कराने की मांग वाली याचिका खारिज कर दी। कोर्ट ने कहा कि याचिका में कोई ठोस आधार नहीं है और इसे केवल पब्लिसिटी के लिए दायर किया गया है।
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सुप्रीम कोर्ट
- फोटो : पीटीआई
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विस्तार
सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को छात्रसंघ चुनाव से जुड़ी याचिका को खारिज कर दिया। इस याचिका में देश भर के कॉलेजों और विश्वविद्यालयों में छात्र संघ चुनावों के लिए लिंगदोह समिति (2006) की रिपोर्ट को लागू करने की मांग की गई थी। यह वहीं रिपोर्ट है, जिसमें देश के कॉलेजों और विश्वविद्यालयों में छात्र संघ चुनावों के लिए नियम बताए गए हैं। इस समिति का गठन सुप्रीम कोर्ट के निर्देश पर केंद्र सरकार ने किया था। इसका उद्देश्य कैंपस की राजनीति से धनबल और बाहुबल को समाप्त करना और साथ ही शैक्षणिक स्तर को बनाए रखना था।
याचिका हुई खारिज
मुख्य न्यायाधीश (सीजेआई) सूर्यकांत और न्यायमूर्ति जॉयमाल्य बागची की पीठ ने शिव कुमार त्रिपाठी के दायर याचिका पर सुनवाई करने से इनकार करते हुए कहा कि इसमें कोई ठोस आधार नहीं है। संक्षिप्त सुनवाई के दौरान, याचिकाकर्ता के वकील ने तर्क दिया कि कॉलेजों और विश्वविद्यालयों में निष्पक्ष छात्र संघ चुनाव सुनिश्चित करने के लिए समिति की सिफारिशों को लागू करना आवश्यक है।
ये भी पढ़ें: 2020 Delhi Riots: BJP बोली- कांग्रेस माफी मांगे, आरोपियों के परिजनों की भी प्रतिक्रिया; जानिए किसने क्या कहा?
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सीजेआई ने क्या कहा?
हालांकि, सीजेआई ने इस याचिका को केवल प्रचार पाने का एक माध्यम करार दिया। याचिका खारिज करते हुए सीजेआई ने टिप्पणी की, "आप बस बाहर जाकर मीडिया को संबोधित करना चाहते हैं। यह सिर्फ पब्लिसिटी के लिए है।"
लिंगदोह समिति रिपोर्ट में क्या?
बता दें कि सुप्रीम कोर्ट ने पहले कमेटी की सिफारिशों को स्वीकार कर लिया था, जिससे वे देश के सभी विश्वविद्यालयों और कॉलेजों के लिए अनिवार्य हो गए थे। लिंगदोह समिति ने अपनी रिपोर्ट में स्नातक (अंडरग्रेजुएट) छात्रों के लिए चुनाव लड़ने की आयु सीमा 17 से 22 वर्ष और स्नातकोत्तर (पोस्टग्रेजुएट) छात्रों के लिए 24 से 25 वर्ष निर्धारित की थी। इसके अलावा, समिति ने चुनावों के लिए कई अन्य नियामक उपायों का भी सुझाव दिया था।
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याचिका हुई खारिज
मुख्य न्यायाधीश (सीजेआई) सूर्यकांत और न्यायमूर्ति जॉयमाल्य बागची की पीठ ने शिव कुमार त्रिपाठी के दायर याचिका पर सुनवाई करने से इनकार करते हुए कहा कि इसमें कोई ठोस आधार नहीं है। संक्षिप्त सुनवाई के दौरान, याचिकाकर्ता के वकील ने तर्क दिया कि कॉलेजों और विश्वविद्यालयों में निष्पक्ष छात्र संघ चुनाव सुनिश्चित करने के लिए समिति की सिफारिशों को लागू करना आवश्यक है।
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सीजेआई ने क्या कहा?
हालांकि, सीजेआई ने इस याचिका को केवल प्रचार पाने का एक माध्यम करार दिया। याचिका खारिज करते हुए सीजेआई ने टिप्पणी की, "आप बस बाहर जाकर मीडिया को संबोधित करना चाहते हैं। यह सिर्फ पब्लिसिटी के लिए है।"
लिंगदोह समिति रिपोर्ट में क्या?
बता दें कि सुप्रीम कोर्ट ने पहले कमेटी की सिफारिशों को स्वीकार कर लिया था, जिससे वे देश के सभी विश्वविद्यालयों और कॉलेजों के लिए अनिवार्य हो गए थे। लिंगदोह समिति ने अपनी रिपोर्ट में स्नातक (अंडरग्रेजुएट) छात्रों के लिए चुनाव लड़ने की आयु सीमा 17 से 22 वर्ष और स्नातकोत्तर (पोस्टग्रेजुएट) छात्रों के लिए 24 से 25 वर्ष निर्धारित की थी। इसके अलावा, समिति ने चुनावों के लिए कई अन्य नियामक उपायों का भी सुझाव दिया था।
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