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SC: केंद्र बनाम दिल्ली विवाद पर सुनवाई करेगी जस्टिस चंद्रचूड़ की अध्यक्षता वाली पीठ, जानें पूरा मामला
Mon, 22 Aug 2022 07:54 PM IST
कीर्तिवर्धन मिश्र
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: कीर्तिवर्धन मिश्र
Updated Mon, 22 Aug 2022 07:54 PM IST
सार
सीजेआई ने कहा, इस मामले की सुनवाई जस्टिस चंद्रचूड़ की अध्यक्षता वाली पीठ करेगी। इस साल छह मई में तीन जजों की पीठ ने केंद्र सरकार के अनुरोध पर मामले को बड़ी पीठ के पास भेज दिया था।
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विस्तार
सुप्रीम कोर्ट में जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़ की अध्यक्षता वाली संविधान पीठ राष्ट्रीय राजधानी में प्रशासनिक सेवाओं पर नियंत्रण को लेकर केंद्र बनाम दिल्ली सरकार विवाद की सुनवाई करेगी। सोमवार को इस मामले का उल्लेख सीजेआई एनवी रमण की पीठ के समक्ष किया गया।
सीजेआई ने कहा, इस मामले की सुनवाई जस्टिस चंद्रचूड़ की अध्यक्षता वाली पीठ करेगी। इस साल छह मई में तीन जजों की पीठ ने केंद्र सरकार के अनुरोध पर मामले को बड़ी पीठ के पास भेज दिया था। दिल्ली सरकार का मामला यह है कि चुनी हुई सरकार को केंद्र सरकार ने महत्वपूर्ण नौकरशाहों और अधिकारियों पर किसी भी तरह के प्रशासनिक नियंत्रण से बाहर कर दिया है। अधिकारी केंद्र सरकार के आदेश पर उपराज्यपाल (एलजी) के माध्यम से कार्य करना जारी रखे हुए हैं।
14 अप्रैल, 2019 में जस्टिस एके सीकरी और जस्टिस अशोक भूषण (अब दोनों सेवानिवृत्त) की पीठ ने इस मुद्दे पर खंडित फैसला दिया था। जस्टिस सीकरी ने कहा था कि संयुक्त सचिव व उससे ऊपर के रैंक के अधिकारियों के स्थानांतरण व पोस्टिंग दिल्ली के उपराज्यपाल की शक्तियों के अधीन हैं जबकि अन्य अधिकारी दिल्ली सरकार के नियंत्रण में हैं। वहीं जस्टिस भूषण की राय अलग थी। उनका मानना था कि ‘सेवाएं’ पूरी तरह से दिल्ली सरकार के दायरे से बाहर हैं। खंडित फैसला होने के कारण मामले को तीन सदस्यीय पीठ के पास भेज दिया गया था।
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सीजेआई ने कहा, इस मामले की सुनवाई जस्टिस चंद्रचूड़ की अध्यक्षता वाली पीठ करेगी। इस साल छह मई में तीन जजों की पीठ ने केंद्र सरकार के अनुरोध पर मामले को बड़ी पीठ के पास भेज दिया था। दिल्ली सरकार का मामला यह है कि चुनी हुई सरकार को केंद्र सरकार ने महत्वपूर्ण नौकरशाहों और अधिकारियों पर किसी भी तरह के प्रशासनिक नियंत्रण से बाहर कर दिया है। अधिकारी केंद्र सरकार के आदेश पर उपराज्यपाल (एलजी) के माध्यम से कार्य करना जारी रखे हुए हैं।
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14 अप्रैल, 2019 में जस्टिस एके सीकरी और जस्टिस अशोक भूषण (अब दोनों सेवानिवृत्त) की पीठ ने इस मुद्दे पर खंडित फैसला दिया था। जस्टिस सीकरी ने कहा था कि संयुक्त सचिव व उससे ऊपर के रैंक के अधिकारियों के स्थानांतरण व पोस्टिंग दिल्ली के उपराज्यपाल की शक्तियों के अधीन हैं जबकि अन्य अधिकारी दिल्ली सरकार के नियंत्रण में हैं। वहीं जस्टिस भूषण की राय अलग थी। उनका मानना था कि ‘सेवाएं’ पूरी तरह से दिल्ली सरकार के दायरे से बाहर हैं। खंडित फैसला होने के कारण मामले को तीन सदस्यीय पीठ के पास भेज दिया गया था।
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