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Supreme Court: KCC के कामकाज में धोखाधड़ी की जांच की मांग से 'सुप्रीम' इनकार, अदालत ने RBI के पास जाने को कहा

Mon, 03 Apr 2023 04:22 PM IST
शिव शरण शुक्ला न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: शिव शरण शुक्ला Updated Mon, 03 Apr 2023 04:22 PM IST
सार

शीर्ष अदालत अधिवक्ता चंद्र शेखर मणि द्वारा दायर एक याचिका पर सुनवाई कर रही थी। इसमें उन्होंने कहा था कि केंद्र किसानों के अधिकारों की रक्षा करने में विफल रहा है। उन्होंने आरोप लगाया था कि किसान क्रेडिट कार्ड प्रणाली में घोटालेबाजों की मिलीभगत से बैंक अधिकारियों द्वारा वित्तीय धोखाधड़ी की गई है।

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Supreme Court junks plea seeking enquiry into financial frauds in working of KCC system today update news
सुप्रीम कोर्ट - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

सुप्रीम कोर्ट ने बैंक अधिकारियों की मिलीभगत से किसान क्रेडिट कार्ड प्रणाली के कामकाज में कथित वित्तीय धोखाधड़ी की अखिल भारतीय जांच की मांग वाली याचिका खारिज कर दी है। साथ ही यह भी कहा है कि याचिकाकर्ता द्वारा लगाए गए सामान्य आरोपों के आधार पर इस तरह की जांच नहीं की जा सकती। 

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न्यायमूर्ति एसके कौल और न्यायमूर्ति अरविंद कुमार की पीठ ने इस मामले में सुनवाई की। याचिका खारिज करते हुए पीठ ने याचिकाकर्ता को अपनी शिकायतों के साथ भारतीय रिजर्व बैंक से संपर्क करने के लिए स्वतंत्रता दी है। पीठ ने कहा कि भारत के संविधान के अनुच्छेद 32 के तहत याचिकाकर्ता द्वारा लगाए गए सामान्य आरोपों पर किसी प्रकार की जांच करना संभव नहीं है।  
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पीठ ने आगे कहा कि हम इस प्रकार भारत के संविधान के अनुच्छेद 32 के तहत अधिकार क्षेत्र का उपयोग करने के लिए इच्छुक नहीं हैं। हालांकि याचिकाकर्ता के लिए यह विकल्प खुला है कि संबंधित मंत्रालय के साथ संपर्क कर सकता है और अपने  किसान क्रेडिट कार्ड प्रणाली के जरिए हुई वित्तीय धोखाधड़ी की शिकायत कर सकता है।  
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बता दें कि संविधान का अनुच्छेद 32 संवैधानिक उपायों से संबंधित है। इसके तहत भारतीय नागरिक अपने मौलिक अधिकारों के उल्लंघन के खिलाफ सर्वोच्च न्यायालय से मांग सकते हैं।

गौरतलब है कि शीर्ष अदालत अधिवक्ता चंद्र शेखर मणि द्वारा दायर एक याचिका पर सुनवाई कर रही थी। इसमें उन्होंने कहा था कि केंद्र किसानों के अधिकारों की रक्षा करने में विफल रहा है। उन्होंने आरोप लगाया था कि किसान क्रेडिट कार्ड प्रणाली में घोटालेबाजों की मिलीभगत से बैंक अधिकारियों द्वारा वित्तीय धोखाधड़ी की गई है। उन्होंने कहा कि इस तरह के भ्रष्ट आचरण के खिलाफ देश के विभिन्न क्षेत्रों में कई प्राथमिकी दर्ज की गई हैं।

डकैती के 28 साल पुराने मामले में सुप्रीम कोर्ट ने दोषी को किया बरी

सुप्रीम कोर्ट ने 28 साल तक कानूनी लड़ाई के बाद डकैती के मामले में दोषी ठहराए गए व्यक्ति को रिहा कर दिया। शीर्ष अदालत ने पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट के आदेश को रद्द करते हुए कहा, अभियोजन पक्ष के मामले पर संदेह है।

जस्टिस अभय एस ओका और जस्टिस राजेश बिंदल की पीठ ने अनवर उर्फ भुगरा को 1994 के मामले में बरी कर दिया। पीठ ने कहा, हमारे सामने रखी गई सामग्री में अपराध स्थल पर अपीलकर्ता की उपस्थिति और उसके पास से पिस्तौल की बरामदगी अत्यधिक संदिग्ध हो जाती है। उचित संदेह से परे अपीलकर्ता का दोष साबित नहीं होता है और इस कारण सजा को बरकरार नहीं रखा जा सकता। पंजाब हरियाणा हाईकोर्ट व निचली अदालत के आदेश को दरकिनार किया जाता है।

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