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गुजरात में ईवीएम कार्यप्रणाली की सुप्रीम कोर्ट जज करें जांच: कांग्रेस
ब्यूरो/ अमर उजाला, नई दिल्ली
Updated Fri, 24 Nov 2017 03:37 AM IST
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कांग्रेस को ईवीएम मशीन के साथ जोड़ी जाने वाली वीपीपैट मशीन पर भी भरोसा नहीं है। पार्टी का कहना है कि वीपीपैट को सौ फीसदी सही नहीं कहा जा सकता है। ये पूरा हल नहीं है सिर्फ दुबारा जांच के लिए है। वीवीपैट को लेकर भी शिकायतें आ रही है लिहाजा सुप्रीम कोर्ट के वर्तमान या सेवानिवृत्त जज की निगरानी में इसकी जांच कराई जाए।
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प्रवक्ता डा. अभिषेक मनु सिंघवी का कहना है कि ऐसा क्यों होता है कि हर बार ईवीएम में कोई भी बटन दबाओ भाजपा के कमल निशान पर वोट पड़ता है। इसके लिए आयोग का दरवाजा खटखटाएंगे। सिंघवी का कहना है कि गुजरात में भाजपा अपनी हार देख रही है। इसलिए गैरकानूनी तरीके अपनाकर खरीद-फरोख्त, लालच और लूट के माध्यम से भ्रष्टाचार को बढ़ावा दे रही है।
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खुले आरोपों के बाद भी कुछ नहीं हो रहा है। जो निगरानी संस्थाएं लोकतंत्र को मजबूत बनाती हैं उन्हें कमजोर किया जा रहा है। विधायकों के मामले में पुलिस के दुर्पयोग के आरोप लगे। सिंघवी ने प्रधानमंत्री से हाल में भाजपा नेताओं पर लगे भ्रष्टाचार और खरीद फरोख्त के ऑडियो-वीडियो टेप की जांच कराने की मांग की है।
उनका कहना है कि वे हमारे भी प्रधानमंत्री हैं और कहते हैं न खाऊंगा न खाने दूंगा। इस वाक्य की असलियत और आत्मा क्या है। तो क्या कारण है कि पिछले दिनों गुजरात में पाटीदार नेता की खरीद फरोख्त को लेकर ऑडियो सार्वजनिक हुआ लेकिन अभी तक एफआईआर तक नहीं हुई।
पाटीदार नेता हार्दिक पटेल ने राज्य के वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारी के.कैलाशनाथन पर 12 सौ करोड़ रुपए देने और खुद के बिकाऊ न होने की बात कही है। क्या आरोपों की सच्चाई के लिए जांच नहीं होनी चाहिए। ईडी, सीबीआई और जांच एजेंसियों की निगाह क्या भाजपा नेताओं पर नहीं पड़ती है। राज्यसभा चुनाव के दौरान भी कांग्रेस के कई विधायकों ने खरीद-फरोख्त का आरोप लगया था।
एनएचआरसी नोटिस पर कांग्रेस की चुटकी
कांग्रेस
- फोटो : FILE PHOTO
यूपी के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के बदमाशों को लेकर दिए गए विवादित बयान पर कांग्रेस ने चुटकी ली है। प्रवक्ता और सांसद डा. अभिषेक मनु सिंघवी का कहना है कि ये तो कहो सीएम खुद बदमाशों को शूट नहीं कर रहे हैं। वे भी ट्रंप बनना चाहते हैं।
ये अंहकार का परिणाम है उन्हें लगता है जो गोरखपुर में किया अब पूरे यूपी में कर सकते हैं। उन्हें अपनी संस्कृति सोच गणतांत्रिक और लोकतांत्रिक व्यवस्था में आदर विश्वास है कि नहीं। जहां तक एनएचआरसी के नोटिस का सवाल है ये अपना सुझाव सरकार को भेंजती है जिसका कोई आधार नहीं।
ये अंहकार का परिणाम है उन्हें लगता है जो गोरखपुर में किया अब पूरे यूपी में कर सकते हैं। उन्हें अपनी संस्कृति सोच गणतांत्रिक और लोकतांत्रिक व्यवस्था में आदर विश्वास है कि नहीं। जहां तक एनएचआरसी के नोटिस का सवाल है ये अपना सुझाव सरकार को भेंजती है जिसका कोई आधार नहीं।