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लव जिहाद रोकने के लिए लाए गए कानून की समीक्षा करेगा सुप्रीम कोर्ट, तत्काल रोक लगाने से इनकार

Wed, 06 Jan 2021 01:02 PM IST
दीप्ति मिश्रा न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: दीप्ति मिश्रा Updated Wed, 06 Jan 2021 01:02 PM IST
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Supreme Court issues notice to Uttar Pradesh and Uttarakhand love jihad petition religious conversion
सर्वोच्च न्यायालय - फोटो : पीटीआई

सुप्रीम कोर्ट में बुधवार को लव जिहाद को रोकने के लिए बनाए गए कानून को रद करने की मांग करने वाली याचिकाओं पर सुनवाई हुई। इस दौरान सुप्रीम कोर्ट उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड में अंतरधार्मिक विवाह के नाम पर धर्मांतरण को रोकने के लिए लाए गए विवादास्पद कानूनों की समीक्षा करने पर राजी हो गया है।

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हालांकि, सर्वोच्च न्यायालय ने उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड में धर्मांतरण को रोकने के लिए लागू कानूनों के विवादास्पद प्रावधानों पर रोक तुरंत रोक लगाने से इनकार कर दिया है। न्यायालय ने लव जिहाद से जुड़े अध्यादेश को लेकर उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड की सरकार को नोटिस जारी कर उनसे पक्ष रखने को कहा है। 
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उच्चतम न्यायालय में बुधवार को सुनवाई के दौरान सॉलिसिटर जनरल ने कहा कि पहले ही इस मामले में उच्च न्यायालय सुनवाई कर रहा है। इस पर शीर्ष अदालत ने याचिकाकर्ता से उच्च न्यायालय नहीं जाकर सीधे सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर करने पर आपत्ति जताई और इसका कारण भी पूछा।


याचिकाकर्ता ने सुप्रीम कोर्ट में दायर अपनी याचिका में कहा कि इस अध्यादेश पर तुरंत रोक लगा दी जाए। इसकी आड़ में अंतरधार्मिक विवाह करने वाले लोगों को परेशान किया जा रहा है। लोगों को शादियों से ही उठा लिया जा रहा है।  


क्या है मामला 
बता दें कि कुछ दिन पहले ही उत्तर प्रदेश सरकार ने धर्म परिवर्तन से जुड़े एक अध्यादेश को मंजूरी दी थी। इसके तहत जबरन धर्म परिवर्तन कराने, लालच देकर या शादी का झांसा देकर धर्म बदलवाने वालों को कड़ी सजा और जुर्माने का प्रावधान किया गया है। उत्तर प्रदेश के बाद मध्य प्रदेश ने भी ऐसा ही एक अध्यादेश लागू किया था और अपने यहां पांच लाख के जुर्माने, दस साल तक की सजा का प्रावधान रखा था। उत्तराखंड समेत कई अन्य भाजपा शासित राज्यों में इस तरह के कानून लाए जाने को लेकर चर्चा जोरों पर हैं। हालांकि, कई विपक्षी पार्टियों, समाज के अलग-अलग तबकों ने इसपर आपत्ति जाहिर की है।

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