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Supreme Court: उच्च न्यायालयों को शीर्ष अदालत ने भेजा नोटिस, ग्राम न्यायालय की स्थापना वाली मांग पर जवाब तलब

Mon, 14 Nov 2022 01:25 PM IST
प्रांजुल श्रीवास्तव न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: प्रांजुल श्रीवास्तव Updated Mon, 14 Nov 2022 01:25 PM IST
सार

याचिकाकर्ता एनजीओ नेशनल फेडरेशन ऑफ सोसाइटीज फॉर फास्ट जस्टिस की ओर से पेश वरिष्ठ वकील प्रशांत भूषण ने कहा, 2020 में शीर्ष अदालत के निर्देश के बावजूद कई राज्यों ने अभी तक इस मामले में कोई कार्रवाई नहीं की है।

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Supreme Court issues notice to High Court on plea for setting  Gram Nyayalayas News in Hindi
सुप्रीम कोर्ट - फोटो : Social Media

विस्तार

सभी राज्यों में ग्राम न्यायालय की स्थापना को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने उच्च न्यायालयों को नोटिस जारी किया है। कोर्ट ने इस मामले में उच्च न्यायालयों को पार्टी बनाते हुए उनसे जवाब तलब किया है। दरअसल, 2019 में सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर कर उसकी देखरेख में ग्राम न्यायालय की स्थापना को लेकर केंद्र व राज्य सरकारों को निर्देश देने की मांग की गई थी। 

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इस मामले में सोमवार को सुनवाई करते हुए न्यायमूर्ति एसए नजीर और न्यायमूर्ति वी रामसुब्रमण्यम की पीठ ने कहा, उच्च न्यायालयों के रजिस्ट्राट जनरल को पक्षकार बनाया जाना चाहिए, क्योंकि सभी हाईकोर्ट पर्यवेक्षी प्राधिकरण हैं। अब मामले की अगली सुनवाई पांच दिसंबर को होगी। 
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बिना वकील शिकायत कर सकें फरियादी 
वहीं, याचिकाकर्ता एनजीओ नेशनल फेडरेशन ऑफ सोसाइटीज फॉर फास्ट जस्टिस की ओर से पेश वरिष्ठ वकील प्रशांत भूषण ने कहा, 2020 में शीर्ष अदालत के निर्देश के बावजूद कई राज्यों ने अभी तक इस मामले में कोई कार्रवाई नहीं की है। उन्होंने कहा, ग्राम न्यायालय ऐसे होने चाहिए, जहां फरियादी बिना वकील भी अपनी शिकायत कर सकें। उन्होंने कहा, शीर्ष अदालत ने 2020 में राज्यों को निर्देश दिया था कि वे चार सप्ताह के भीतर ग्राम न्यायालयों की स्थापना के लिए अधिसूचना जारी करें और उच्च न्यायालयों को इस मुद्दे पर राज्य सरकारों के साथ परामर्श की प्रक्रिया में तेजी लाने के लिए कहा था।
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2008 में पारित हुआ था अधिनियम 
2008 में संसद में पारित हुए अधिनियम के तहत नागरिकों को  न्याय दिलाने के लिए जमीनी स्तर पर ग्राम न्यायालयों की स्थापना का प्रावधान किया गया था। कहा गया था कि ग्राम न्यायालयों की स्थापना से यह सुनिश्चित किया जाएगा कि सामाजिक, आर्थिक व अन्य कारणों से किसी को न्याय हासिल करने से वंचित नहीं किया जा सकता। 

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