{"_id":"605fa33b8ebc3e8c911c837f","slug":"supreme-court-issues-notice-to-central-government-and-states-on-demand-to-send-back-infiltrators","type":"story","status":"publish","title_hn":"सुप्रीम कोर्ट : घुसपैठियों को एक वर्ष के भीतर वापस भेजने की मांग वाली याचिका पर केंद्र, राज्यों को नोटिस","category":{"title":"India News","title_hn":"देश","slug":"india-news"}}
सुप्रीम कोर्ट : घुसपैठियों को एक वर्ष के भीतर वापस भेजने की मांग वाली याचिका पर केंद्र, राज्यों को नोटिस
Sun, 28 Mar 2021 02:58 AM IST
Jeet Kumar
अमर उजाला ब्यूरो, नई दिल्ली।
अमर उजाला ब्यूरो, नई दिल्ली।
Published by: Jeet Kumar
Updated Sun, 28 Mar 2021 02:58 AM IST
सार
याचिका भाजपा नेता अश्विनी कुमार उपाध्याय ने दायर की है। उन्होंने याचिका में कहा कि केंद्र व सभी राज्य सरकारों को एक वर्ष के भीतर बांग्लादेशियों, रोहिंग्या समेत सभी अवैध घुसपैठियों की पहचान कर उनके देश भेजने का निर्देश दिया जाए।
विज्ञापन
सर्वोच्च न्यायालय
- फोटो : पीटीआई
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
विस्तार
बांग्लादेशी, रोहिंग्या समेत सभी अवैध घुसपैठियों को एक वर्ष के अंदर उनके देश वापस भेजने की मांग वाली जनहित याचिका पर सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार व सभी राज्यों के मुख्य सचिवों को नोटिस जारी किया है। यह याचिका भाजपा नेता अश्विनी कुमार उपाध्याय ने दायर की है।
विज्ञापन
चीफ जस्टिस एसए बोबडे की अध्यक्षता वाली तीन सदस्यीय पीठ ने याचिका को मोहम्मद सलामुल्ला द्वारा दायर उस याचिका के साथ जोड़ दिया जिसमें जम्मू के कैंप में रखे गए रोहिंग्या मुसलमानों को म्यांमार न भेजने करने की अपील की गई है। शुक्रवार को सुप्रीम कोर्ट ने सलामुल्ला की याचिका पर अपना फैसला सुरक्षित रख लिया था।
विज्ञापन
उपाध्याय ने याचिका में कहा कि केंद्र व सभी राज्य सरकारों को एक वर्ष के भीतर बांग्लादेशियों, रोहिंग्या समेत सभी अवैध घुसपैठियों की पहचान कर उनके देश भेजने का निर्देश दिया जाए।
विज्ञापन
याचिका में कहा गया है कि फॉरेनर्स एक्ट 1946 में केंद्र व सभी राज्य सरकारों को घुसपैठियों की पहचान करने और उन्हें उनके देश भेजने के लिए प्रभावी कदम उठाने की बात कही गई है।
याचिका में कहा गया है कि अवैध घुसपैठियों के कारण सीमा से सटे इलाकों की जनसांख्यिकी स्थिति बदल गई है। साथ ही इससे देश के समक्ष सुरक्षा का मसला भी खड़ा हो गया है।
याचिका में दावा किया गया है कि भारत में कम से कम चार करोड़ घुसपैठिये रह रहे हैं। इनमें से कई लोगों ने तो अवैध तरीके से आधार कार्ड, पहचान पत्र आदि भी बनवा लिए हैं।