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Delhi: बढ़ती आबादी देश की आधी परेशानियों के लिए जिम्मेदार, जनसंख्या नियंत्रण पर SC का केंद्र को नोटिस
Fri, 02 Sep 2022 04:22 PM IST
वीरेंद्र शर्मा
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: वीरेंद्र शर्मा
Updated Fri, 02 Sep 2022 04:22 PM IST
सार
अखिल भारतीय संत समिति के महासचिव दांडी स्वामी जितेंद्रानंद सरस्वती द्वारा दाखिल याचिका में कहा गया कि जनसंख्या नियंत्रण के लिए कानून लाना चाहिए। बढ़ती जनसंख्या ही देश की आधी परेशानियों के लिए जिम्मेदार है।
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सुप्रीम कोर्ट
- फोटो : सोशल मीडिया
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विस्तार
सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को जनसंख्या नियंत्रण के लिए कानून बनाने की मांग को लेकर दायर याचिका पर केंद्र सरकार को नोटिस जारी किया है। यह याचिका कोर्ट में अखिल भारतीय संत समिति के महासचिव दांडी स्वामी जितेंद्रानंद सरस्वती द्वारा दाखिल की गई। जितेंद्रानंद सरस्वती ने 13 अप्रैल को सुप्रीम कोर्ट में दाखिल अपनी याचिका में कहा कि जनसंख्या नियंत्रण के लिए कानून लाना चाहिए। बढ़ती जनसंख्या ही देश की आधी परेशानियों के लिए जिम्मेदार है।
जस्टिस केएम जोसेफ और हृषिकेश रॉय की पीठ ने सरकार से जवाब मांगा और मामले को इसी तरह की लंबित याचिकाओं के साथ टैग किया। सरस्वती द्वारा दायर याचिका में कहा गया है कि हर साल जनसंख्या बढ़ रही है, लेकिन प्राकृतिक संसाधन सीमित हैं। याचिका में कहा गया है कि जब बेरोजगारी और गरीबी, खाद्य आपूर्ति की सीमा, स्वास्थ्य देखभाल सुविधाओं आदि में भारी बढ़ोत्तरी होती है। याचिका में अधिक जनसंख्या की समस्या के कारण भारत के लाखों नागरिकों के मौलिक अधिकारों की रक्षा के लिए प्रभावी नियम, विनियम और दिशानिर्देश तैयार करने के लिए केंद्र सरकार से गाइडलाइन मांगी है।
याचिका में सरकार को हर महीने के पहले रविवार को स्वास्थ्य दिवस के रूप में घोषित करने के लिए कहा गया है। ताकि ईडब्ल्यूएस और बीपीएल परिवारों को पोलियो टीके के साथ अधिक जनसंख्या के बारे में जागरूकता फैलाने, टीके, गर्भनिरोधक गोलियां, कंडोम आदि का वितरण हो सके। साथ ही भारत के विधि आयोग को तीन महीने के भीतर जनसंख्या नियंत्रण उपायों पर एक व्यापक रिपोर्ट तैयार करने और प्रतिवादी (सरकार) को उचित विचार के लिए प्रस्तुत करने का निर्देश दें। याचिकाकर्ता ने कहा कि हर व्यक्ति को स्वच्छ हवा, पीने के पानी, स्वास्थ्य सुविधा, रहने, आजीविका चलाने और शिक्षा का अधिकार जैसी बुनियादी मौलिक अधिकार संविधान के तहत गारंटीकृत हैं।
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वर्तमान में भारत की जनसंख्या 1.39 बिलियन के करीब है जो विश्व की लगभग 17.8 प्रतिशत जनसंख्या है, लेकिन भारत के पास विश्व की केवल 2% कृषि योग्य भूमि और केवल 4% पेयजल है। याचिका में दावा किया गया है कि अमेरिका में हर दिन 10,000 बच्चे पैदा होते हैं, जबकि भारत में हर दिन 70,000 बच्चे पैदा होते हैं।
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जस्टिस केएम जोसेफ और हृषिकेश रॉय की पीठ ने सरकार से जवाब मांगा और मामले को इसी तरह की लंबित याचिकाओं के साथ टैग किया। सरस्वती द्वारा दायर याचिका में कहा गया है कि हर साल जनसंख्या बढ़ रही है, लेकिन प्राकृतिक संसाधन सीमित हैं। याचिका में कहा गया है कि जब बेरोजगारी और गरीबी, खाद्य आपूर्ति की सीमा, स्वास्थ्य देखभाल सुविधाओं आदि में भारी बढ़ोत्तरी होती है। याचिका में अधिक जनसंख्या की समस्या के कारण भारत के लाखों नागरिकों के मौलिक अधिकारों की रक्षा के लिए प्रभावी नियम, विनियम और दिशानिर्देश तैयार करने के लिए केंद्र सरकार से गाइडलाइन मांगी है।
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याचिका में सरकार को हर महीने के पहले रविवार को स्वास्थ्य दिवस के रूप में घोषित करने के लिए कहा गया है। ताकि ईडब्ल्यूएस और बीपीएल परिवारों को पोलियो टीके के साथ अधिक जनसंख्या के बारे में जागरूकता फैलाने, टीके, गर्भनिरोधक गोलियां, कंडोम आदि का वितरण हो सके। साथ ही भारत के विधि आयोग को तीन महीने के भीतर जनसंख्या नियंत्रण उपायों पर एक व्यापक रिपोर्ट तैयार करने और प्रतिवादी (सरकार) को उचित विचार के लिए प्रस्तुत करने का निर्देश दें। याचिकाकर्ता ने कहा कि हर व्यक्ति को स्वच्छ हवा, पीने के पानी, स्वास्थ्य सुविधा, रहने, आजीविका चलाने और शिक्षा का अधिकार जैसी बुनियादी मौलिक अधिकार संविधान के तहत गारंटीकृत हैं।
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वर्तमान में भारत की जनसंख्या 1.39 बिलियन के करीब है जो विश्व की लगभग 17.8 प्रतिशत जनसंख्या है, लेकिन भारत के पास विश्व की केवल 2% कृषि योग्य भूमि और केवल 4% पेयजल है। याचिका में दावा किया गया है कि अमेरिका में हर दिन 10,000 बच्चे पैदा होते हैं, जबकि भारत में हर दिन 70,000 बच्चे पैदा होते हैं।