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तलाक के लिए सुप्रीम कोर्ट पहुंचे दंपती को कुछ हफ्ते साथ रहने का निर्देश
अमर उजाला ब्यूरो / नई दिल्ली
Updated Thu, 07 Dec 2017 05:36 AM IST
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प्रतीकात्मक तस्वीर
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तलाक के लिए सुप्रीम कोर्ट पहुंचे एक पति को फिलहाल पत्नी के साथ ही रहना होगा। कोर्ट ने एक अनूठे आदेश में दंपती को कुछ हफ्ते साथ बिताने के लिए कहा है और पत्नी को बिना कोर्ट की अनुमति के पति का साथ नहीं छोड़ने का निर्देश दिया। फैमिली कोर्ट और पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट से तलाक नहीं मिलने पर पति ने सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया था।
जस्टिस कुरियन जोसफ और जस्टिस दीपक गुप्ता की पीठ ने पति और पत्नी से बातचीत करने के बाद कहा कि हमें लगता है, अभी सब कुछ खत्म नहीं हुआ है। पति विनम्र है, उसने अपनी बातें बहुत ईमानदारी से रखी हैं। पत्नी ने गुजारा भत्ते के अलावा किसी और मुकदमे की शुरूआत नहीं की है। पीठ ने कहा कि हमें ऐसा लगता है कि दोनों पक्षों को कुछ हफ्ते साथ रहने का एक और मौका मिलना चाहिए। आदेश में दिलचस्प बात यह है कि पीठ ने पति को अदालत से ही पत्नी के साथ जाने के लिए कहा।
पढ़ें- तलाक दिए बिना दूसरी शादी रचा रहा पति, पत्नी ने लगाई गुहार
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जस्टिस कुरियन जोसफ और जस्टिस दीपक गुप्ता की पीठ ने पति और पत्नी से बातचीत करने के बाद कहा कि हमें लगता है, अभी सब कुछ खत्म नहीं हुआ है। पति विनम्र है, उसने अपनी बातें बहुत ईमानदारी से रखी हैं। पत्नी ने गुजारा भत्ते के अलावा किसी और मुकदमे की शुरूआत नहीं की है। पीठ ने कहा कि हमें ऐसा लगता है कि दोनों पक्षों को कुछ हफ्ते साथ रहने का एक और मौका मिलना चाहिए। आदेश में दिलचस्प बात यह है कि पीठ ने पति को अदालत से ही पत्नी के साथ जाने के लिए कहा।
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पीठ ने पत्नी को अच्छा बर्ताव करने का दिया निर्देश
सुप्रीम कोर्ट
- फोटो : SOCIAL MEDIA
पीठ ने पत्नी को अच्छा बर्ताव करने का निर्देश दिया और उसे पति, बुजुर्ग सास की उचित देखभाल करने के लिए भी कहा। पीठ ने साफ किया कि पत्नी के परिजन उनके शांतिपूर्ण जीवन में किसी तरह का दखल नहीं देंगे। पीठ ने पत्नी को बिना अदालत की अनुमति के पति का साथ नहीं छोड़ने का निर्देश दिया।
पति ने क्रूरता और परित्याग के आधार पर तलाक मांगा था लेकिन फैमिली कोर्ट ने अर्जी ठुकरा दी। हाईकोर्ट से भी याचिकाकर्ता को राहत नहीं मिली। हाईकोर्ट ने अपने आदेश में कहा था कि हमारे समाज में विवाह एक पवित्र संस्कार है, इसे हमेशा जारी रखने का प्रयास करना चाहिए। इस पवित्र बंधन को तब तक नहीं तोड़ा जाना चाहिए जब तक कोई और विकल्प न बचे।
पति ने क्रूरता और परित्याग के आधार पर तलाक मांगा था लेकिन फैमिली कोर्ट ने अर्जी ठुकरा दी। हाईकोर्ट से भी याचिकाकर्ता को राहत नहीं मिली। हाईकोर्ट ने अपने आदेश में कहा था कि हमारे समाज में विवाह एक पवित्र संस्कार है, इसे हमेशा जारी रखने का प्रयास करना चाहिए। इस पवित्र बंधन को तब तक नहीं तोड़ा जाना चाहिए जब तक कोई और विकल्प न बचे।