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Supreme Court: तेलंगाना में ओबीसी कोटा बढ़ाने के खिलाफ याचिका पर सुनवाई आज, राष्ट्रपति के पास अटका है बिल
Mon, 06 Oct 2025 10:16 AM IST
नितिन गौतम
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: नितिन गौतम
Updated Mon, 06 Oct 2025 10:16 AM IST
सार
तेलंगाना के मंत्री ने कहा कि 'कुछ लोग सर्वोच्च न्यायालय का दरवाजा खटखटाकर इसके खिलाफ काम करने की कोशिश कर रहे हैं। हमें सर्वोच्च न्यायालय, उच्च न्यायालय से न्याय मिलेगा, और हमें उम्मीद है कि चुनाव 42 प्रतिशत आरक्षण के साथ ही होंगे।'
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सुप्रीम कोर्ट
- फोटो : एएनआई
विस्तार
तेलंगाना में ओबीसी आरक्षण बढ़ाने के खिलाफ दायर हुई याचिका पर सुप्रीम कोर्ट आज सुनवाई करेगा। तेलंगाना सरकार ने निकाय चुनाव में ओबीसी कोटा बढ़ाकर 42 प्रतिशत कर दिया है। हालांकि अभी तक इस विधेयक को राज्यपाल की मंजूरी नहीं मिली है। अब इस विधेयक को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी गई है।
तेलंगाना के मंत्री बोले- उम्मीद है 42 प्रतिशत आरक्षण के साथ होंगे चुनाव
तेलंगाना सरकार के मंत्री पोन्नम प्रभाकर ने कहा कि, 'ओबीसी कोटा बढ़ाने से पहले हमने सर्वेक्षण कराया और सर्वेक्षण के बाद, हमने कैबिनेट की मंजूरी ली। इसके बाद इसे सदन में पेश किया और फिर एक विधेयक का मसौदा तैयार किया। हमने इसे एक अधिनियम बनाया और राज्यपाल के पास भेजा। राज्यपाल ने इसे राष्ट्रपति के पास भेजा। अब चार-पांच महीने हो गए हैं। यह राज्यपाल या राष्ट्रपति के पास लंबित है। हमने एक जाति सर्वेक्षण कराया है। सभी राजनीतिक दलों ने इसे विधानसभा में सर्वसम्मति से पारित किया है। कुछ लोगों ने इसे रोकने के लिए उच्च न्यायालय में मामला दायर किया। उच्च न्यायालय में सुनवाई हुई और सुनवाई 8 तारीख तक के लिए स्थगित कर दी गई। कुछ लोग सर्वोच्च न्यायालय का दरवाजा खटखटाकर इसके खिलाफ काम करने की कोशिश कर रहे हैं। हमें सर्वोच्च न्यायालय, उच्च न्यायालय से न्याय मिलेगा, और हमें उम्मीद है कि चुनाव 42 प्रतिशत आरक्षण के साथ ही होंगे।'
ये भी पढ़ें- Leh Violence: सुप्रीम कोर्ट में आज होगी सोनम वांगचुक की गिरफ्तारी के मामले में सुनवाई, पत्नी ने दायर की थी याचिका
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सुप्रीम कोर्ट में अटक सकता है बिल
तेलंगाना में हुए सर्वे के आधार पर ओबीसी को शैक्षणिक संस्थानों और स्थानीय निकाय चुनावों में 42 फीसदी आरक्षण देने की सिफारिश की गई है। अब यह प्रस्ताव राष्ट्रपति की मंजूरी का इंतजार कर रहा है। अगर यह बिल लागू हो जाता है, तो तेलंगाना में आरक्षण की कुल सीमा बढ़कर 62% हो जाएगी। लेकिन भारत में आरक्षण की अधिकतम सीमा 50 प्रतिशत तय की गई है। ऐसे में इस बिल को लागू करन के लिए संसद की मंजूरी जरूरी है। इससे पहले बिहार में भी आरक्षण संशोधन विधेयक 2023 लाया गया था, जिसमें आरक्षण की सीमा बढ़ाकर 65 प्रतिशत की गई थी, लेकिन सुप्रीम कोर्ट ने उस पर रोक लगा दी थी।
'हमारे रास्ते में न आए न्यायपालिका'
स्थानीय निकाय चुनावों में 42 प्रतिशत अन्य पिछड़ा वर्ग आरक्षण को चुनौती देने वाली याचिका पर सुप्रीम कोर्ट में आज सुनवाई पर कांग्रेस नेता वी हनुमंत राव ने कहा, 'पहले भी, सरकार ने उच्च वर्ग के लोगों (ईडब्ल्यूईएस) के लिए आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग को 10 प्रतिशत आरक्षण दिया है, लेकिन हमने कभी आपत्ति नहीं की, अब वे आरक्षण के रास्ते में क्यों आ रहे हैं? अदालतें रास्ते में क्यों आ रही हैं? राहुल गांधी कह रहे हैं कि हमें 50% (आरक्षण) की सीमा हटा देनी चाहिए। मैं न्यायपालिका से अपील कर रहा हूं, हमारे रास्ते में मत आइए।'
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तेलंगाना के मंत्री बोले- उम्मीद है 42 प्रतिशत आरक्षण के साथ होंगे चुनाव
तेलंगाना सरकार के मंत्री पोन्नम प्रभाकर ने कहा कि, 'ओबीसी कोटा बढ़ाने से पहले हमने सर्वेक्षण कराया और सर्वेक्षण के बाद, हमने कैबिनेट की मंजूरी ली। इसके बाद इसे सदन में पेश किया और फिर एक विधेयक का मसौदा तैयार किया। हमने इसे एक अधिनियम बनाया और राज्यपाल के पास भेजा। राज्यपाल ने इसे राष्ट्रपति के पास भेजा। अब चार-पांच महीने हो गए हैं। यह राज्यपाल या राष्ट्रपति के पास लंबित है। हमने एक जाति सर्वेक्षण कराया है। सभी राजनीतिक दलों ने इसे विधानसभा में सर्वसम्मति से पारित किया है। कुछ लोगों ने इसे रोकने के लिए उच्च न्यायालय में मामला दायर किया। उच्च न्यायालय में सुनवाई हुई और सुनवाई 8 तारीख तक के लिए स्थगित कर दी गई। कुछ लोग सर्वोच्च न्यायालय का दरवाजा खटखटाकर इसके खिलाफ काम करने की कोशिश कर रहे हैं। हमें सर्वोच्च न्यायालय, उच्च न्यायालय से न्याय मिलेगा, और हमें उम्मीद है कि चुनाव 42 प्रतिशत आरक्षण के साथ ही होंगे।'
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सुप्रीम कोर्ट में अटक सकता है बिल
तेलंगाना में हुए सर्वे के आधार पर ओबीसी को शैक्षणिक संस्थानों और स्थानीय निकाय चुनावों में 42 फीसदी आरक्षण देने की सिफारिश की गई है। अब यह प्रस्ताव राष्ट्रपति की मंजूरी का इंतजार कर रहा है। अगर यह बिल लागू हो जाता है, तो तेलंगाना में आरक्षण की कुल सीमा बढ़कर 62% हो जाएगी। लेकिन भारत में आरक्षण की अधिकतम सीमा 50 प्रतिशत तय की गई है। ऐसे में इस बिल को लागू करन के लिए संसद की मंजूरी जरूरी है। इससे पहले बिहार में भी आरक्षण संशोधन विधेयक 2023 लाया गया था, जिसमें आरक्षण की सीमा बढ़ाकर 65 प्रतिशत की गई थी, लेकिन सुप्रीम कोर्ट ने उस पर रोक लगा दी थी।
#WATCH | Hyderabad, Telangana: On the Supreme Court hearing of the plea challenging the 42% BC (Backwards Classes) reservation in local body elections, Congress leader V Hanumantha Rao says, "...Previously also, this present government has given 10 % (reservation) to the… pic.twitter.com/PnOYFCcPvE
— ANI (@ANI) October 6, 2025
'हमारे रास्ते में न आए न्यायपालिका'
स्थानीय निकाय चुनावों में 42 प्रतिशत अन्य पिछड़ा वर्ग आरक्षण को चुनौती देने वाली याचिका पर सुप्रीम कोर्ट में आज सुनवाई पर कांग्रेस नेता वी हनुमंत राव ने कहा, 'पहले भी, सरकार ने उच्च वर्ग के लोगों (ईडब्ल्यूईएस) के लिए आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग को 10 प्रतिशत आरक्षण दिया है, लेकिन हमने कभी आपत्ति नहीं की, अब वे आरक्षण के रास्ते में क्यों आ रहे हैं? अदालतें रास्ते में क्यों आ रही हैं? राहुल गांधी कह रहे हैं कि हमें 50% (आरक्षण) की सीमा हटा देनी चाहिए। मैं न्यायपालिका से अपील कर रहा हूं, हमारे रास्ते में मत आइए।'
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