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Supreme Court: नए आपराधिक कानूनों के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट करेगा सुनवाई, कई खामियां होने का दावा

Sun, 19 May 2024 06:14 PM IST
नितिन गौतम न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: नितिन गौतम Updated Sun, 19 May 2024 06:14 PM IST
सार

याचिका में आरोप लगाया गया है कि नए आपराधिक कानून कहीं अधिक कठोर हैं और इससे देश में पुलिस का राज स्थापित हो जाएगा। ये कानून देश के लोगों के मौलिक अधिकारों का उल्लंघन करते हैं। 

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supreme court hear plea against new criminal laws claim defects and discrepancies
सुप्रीम कोर्ट - फोटो : ANI

विस्तार

तीन नए आपराधिक कानूनों के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की गई है। सुप्रीम कोर्ट सोमवार को इस याचिका पर सुनवाई करेगा। याचिका में दावा किया गया है कि नए आपराधिक कानूनों में कई विसंगतियां हैं। जस्टिस बेला एम त्रिवेदी और जस्टिस पंकज मित्तल की अवकाश पीठ याचिका पर सुनवाई करेगी। 
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याचिका में उठाए गए सवाल
सुप्रीम कोर्ट में तीन नए आपराधिक कानूनों के खिलाफ वकील विशाल तिवारी ने याचिका दायर की है। याचिका में कहा गया है कि नए आपराधिक कानूनों को लागू करने से रोक की मांग की गई है। आरोप है कि इन कानूनों पर संसद में बहस नहीं हुई और जब विपक्षी सांसद निलंबित थे, तब इन कानूनों को संसद से पास करा लिया गया था। याचिका में मांग की गई है कि विशेषज्ञों की एक समिति गठित की जाए, जो आपराधिक कानूनों की व्यावहारिकता की जांच करे। याचिका में आरोप लगाया गया है कि नए आपराधिक कानून कहीं अधिक कठोर हैं और इससे देश में पुलिस का राज स्थापित हो जाएगा। ये कानून देश के लोगों के मौलिक अधिकारों का उल्लंघन करते हैं। ये कानून अंग्रेजी कानूनों से भी ज्यादा कठोर हैं। पुराने कानूनों में किसी व्यक्ति को 15 दिनों तक पुलिस हिरासत में रखने का प्रावधान है, लेकिन नए कानूनों में यह सीमा बढ़ाकर 90 दिन कर दी गई है। 
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बीते साल मिली थी मंजूरी
नए कानूनों में देशद्रोह कानून को नए अवतार में लाया जा रहा है और इसके दोषी को उम्रकैद तक की सजा का प्रावधान है। लोकसभा में बीती 21 दिसंबर को तीन नए आपराधिक कानूनों- भारतीय न्याय संहिता, भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता और भारतीय साक्ष्य विधेयक को मंजूरी मिली थी। ये कानून मौजूदा कानूनों इंडियन पीनल कोड (आईपीसी), सीआरपीसी और इंडियन एविडेंस एक्ट की जगह लेंगे। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने 25 दिसंबर को इन कानूनों को मंजूरी दे दी थी। 
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