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सुप्रीम कोर्ट: आरोपी ने कोरे कागज पर छात्रा से जबरन हस्ताक्षर लेकर बनाया निकाहनामा, मिली जमानत
Thu, 08 Jul 2021 02:49 AM IST
Jeet Kumar
राजीव सिन्हा, नई दिल्ली।
राजीव सिन्हा, नई दिल्ली।
Published by: Jeet Kumar
Updated Thu, 08 Jul 2021 02:49 AM IST
सार
- सुप्रीम कोर्ट ने दी ऐसी धोखाधड़ी करने वाले आरोपी को जमानत
- आरोपी ने निजी वीडियो लीक करने की दी थी धमकी
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Supreme Court
- फोटो : ANI
विस्तार
एमबीए की छात्रा को निजी वीडियो लीक करने की धमकी देकर कोरे कागजों पर जबरन हस्ताक्षर कराने वाले आरोपी को सुप्रीम कोर्ट ने जमानत पर रिहा कर दिया।
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हसीब खान नाम के इस शख्स पर छात्रा को अपनी बीवी बताने के लिए हस्ताक्षर वाले कोरे कागज का इस्तेमाल झूठा निकाहनामा तैयार करने का भी आरोप है।
जस्टिस संजय किशन कौल और जस्टिस हेमंत गुप्ता की खंडपीठ ने मामले के गुण-दोष पर ध्यान दिए बगैर कहा, चूंकि शिकायतकर्ता अदालत के समक्ष पेश नहीं हुई है और आरोपी खान पहले से ही दो साल से ज्यादा समय से हिरासत में काट चुका है। साथ ही मामले में आरोप पत्र भी दाखिल हो चुका है। ऐसे में आरोपी को जमानत दी जा सकती है।
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दरअसल शिकायकर्ता छात्रा का कहना है कि वह हसीब खान से कपड़े सिलवाती थी। एक बार किसी कपड़े की नाप सही करने को लेकर हसीब ने उसे अपनी दुकान ही पहनकर ट्रायल लेने की सलाह दी। दुकान में चूंकि ट्रायल रूम नहीं था, लेकिन शटर गिरा था, इसलिए उसने कपड़े को पहनकर देख लिया।
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आरोप है कि इसके बाद हसीब ने छात्रा को इस वाकये का वीडियो क्लिप होने की बात कहकर ब्लैकमेल करना शुरू कर दिया। वह क्लिप को वायरल करने की धमकी देता था। शिकायतकर्ता के मुताबिक, इसके बाद हसीब ने जबरन उससे कुछ कोरे कागज पर हस्ताक्षर करवा लिए और उससे उर्दू में इनाया खान लिखाया।
इसी कागज का इस्तेमाल उसने बाद में निकाहनामे के तौर पर किया। हालांकि आरोपी का कहना है कि शिकायतकर्ता और उसके बीच प्रेम संबंध था और बाद में उन्होंने शादी कर ली। लेकिन शिकायतकर्ता छात्रा ने इस दावे को गलत बताया है।
आरोपी ने परिवार न्यायालय में दर्ज कराया था मुकदमा
आरोपी हसीब खान ने सीआरपीसी की धारा-125 के तहत छात्रा को घर ले जाने के लिए मामला दर्ज कराया। लखनऊ स्थित पारिवारिक न्यायालय में आरोपी ने कागज पर लिए गए हस्ताक्षर के जरिये तैयार निकाहनामे के आधार पर शिकायतकर्ता छात्रा को अपनी पत्नी बताया।
इसके बाद वह वीडियो क्लिप के बहाने गलत हरकत करता था। आखिरकार शिकायतकर्ता ने अपनी आपबीती अपने माता-पिता को बताई और आरोपी हसीब के खिलाफ आईपीसी की धारा-506 और 376 के तहत एफआइआर दर्ज करा दी। इसके बाद पुलिस ने उसे गिरफ्तार कर लिया।
हाईकोर्ट ने दो बार नकार दी थी याचिका
हसीब ने दो बार इलाहाबाद हाईकोर्ट में जमानत याचिका दाखिल की थी। लेकिन दोनों बार हाईकोर्ट ने उसकी याचिका खारिज करते हुए जमानत देने से इंकार कर दिया। इसके बाद ही हसीब ने सुप्रीम कोर्ट का रुख किया था।