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Supreme Court: हरिद्वार धर्म संसद मामले में जितेंद्र नारायण त्यागी को मिली जमानत, पेश करना होगा हलफनामा

Mon, 12 Sep 2022 11:05 PM IST
शिव शरण शुक्ला न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: शिव शरण शुक्ला Updated Mon, 12 Sep 2022 11:05 PM IST
सार

शीर्ष अदालत ने 29 अगस्त को चिकित्सा आधार पर पहले दी गई अंतरिम जमानत को बढ़ाने से इनकार कर दिया था। साथ ही जितेंद्र नारायण त्यागी को आत्मसमर्पण करने का निर्देश दिया था। साथ ही अदालत ने कहा था कि वह अगली सुनवाई पर उनकी नियमित याचिका पर विचार करेगी।

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Supreme Court grants bail to hate speech accused Jitendra Narayan Tyagi in Haridwar Dharma Sansad case
जितेंद्र नारायण सिंह त्यागी। - फोटो : ANI

विस्तार

भड़काऊ भाषण से जुड़े हरिद्वार धर्म संसद मामले के आरोपी जितेंद्र नारायण त्यागी को सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को जमानत दे दी है। न्यायमूर्ति अजय रस्तोगी और न्यायमूर्ति बी वी नागरत्ना की पीठ ने उन्हें निचली अदालत के समक्ष एक हलफनामा दायर करने का निर्देश दिया है। पीठ ने कहा कि वह इस संबंध में कि जमानत के बाद इलेक्ट्रॉनिक मीडिया या सोशल मीडिया को संबोधित नहीं करेंगे साथ ही प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से इस तरह की कथित गतिविधियों में शामिल नहीं होंगे, अपना हलफनामा दायर करें। गौरतलब है कि जितेंद्र नारायण त्यागी को पूर्व में वसीम रिजवी के नाम से जाना जाता था। 

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पीठ ने कहा कि याचिकाकर्ता को तीन दिनों के भीतर ट्रायल कोर्ट के सामने पेश किया जा सकता है और गिरफ्तारी के बाद जमानत पर रिहा किया जाएगा। पीठ ने यह भी कहा कि अगर याचिकाकर्ता (जितेंद्र नारायण त्यागी) किसी भी शर्त का उल्लंघन करते है, जिस पर उसे जमानत दी गई है, तो प्रतिवादी/अभियोजन जमानत रद्द करने के लिए आवेदन करने के लिए स्वतंत्र हैं।
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गौरतलब है कि शीर्ष अदालत ने 29 अगस्त को चिकित्सा आधार पर पहले दी गई अंतरिम जमानत को बढ़ाने से इनकार कर दिया और त्यागी को आत्मसमर्पण करने का निर्देश दिया था। साथ ही अदालत ने कहा था कि वह अगली सुनवाई पर उनकी नियमित याचिका पर विचार करेगी। इससे पहले शीर्ष अदालत ने 17 मई को त्यागी को तीन महीने की अंतरिम जमानत दी थी। कोर्ट ने उनसे यह हलफनामा देने का निर्देश दिया था कि वह कोई भड़काऊ भाषण नहीं देंगे। इसके अलावा उन्हें इलेक्ट्रॉनिक, डिजिटल या सोशल मीडिया पर ऐसे बयानों से बचने को कहा गया था। मार्च में उत्तराखंड हाइकोर्ट से उनकी जमानत याचिका खारिज किए जाने के बाद त्यागी ने शीर्ष अदालत का दरवाजा खटखटाया था।
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ज्वालापुर-हरिद्वार निवासी नदीम अली की शिकायत पर इस साल दो जनवरी को हरिद्वार कोतवाली में त्यागी और अन्य के खिलाफ मामला दर्ज किया गया था। आरोप लगाया गया था कि पिछले साल 17 से 19 दिसंबर तक हिंदू संतों द्वारा हरिद्वार में आयोजित धर्म संसद में शामिल लोगों ने भउ़काऊ भाषण दिए थे।

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