फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   India News ›   Supreme Court grants anticipatory bail to Canadian citizen in 2025 molestation case

Supreme Court: दुष्कर्म के आरोपी कनाडाई नागरिक को सुप्रीम कोर्ट से मिली बड़ी राहत, मंजूर की अग्रिम जमानत

Mon, 11 May 2026 04:53 PM IST
Devesh Tripathi न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: Devesh Tripathi Updated Mon, 11 May 2026 04:53 PM IST
सार

साल 2025 में एक महिला ने कनाडाई नागरिक के खिलाफ दुष्कर्म का मामला दर्ज कराया था। महिला ने आरोप लगाया था कि आरोपी ने महिला को अपने वैवाहिक स्थिति के बारे में गुमराह कर उनके साथ संबंध बनाए थे। 

विज्ञापन
Supreme Court grants anticipatory bail to Canadian citizen in 2025 molestation case
सुप्रीम कोर्ट - फोटो : ANI

विस्तार

सुप्रीम कोर्ट ने दुष्कर्म के एक मामले में कनाडाई नागरिक को अग्रिम जमानत दे दी है। अदालत ने कहा कि असत्यापित आरोपों के आधार पर यह नहीं कहा जा सकता कि आरोपी को नैतिक रूप से निंदनीय ठहराया जाए।
विज्ञापन


न्यायमूर्ति अरविंद कुमार और न्यायमूर्ति पी.बी. वराले की पीठ ने मनप्रीत सिंह गिल, जो एक कनाडाई नागरिक है, को यह राहत दी। पंजाब पुलिस ने एक महिला की शिकायत पर उनके खिलाफ दुष्कर्म का मामला दर्ज किया था।
विज्ञापन


क्या है पूरा मामला?
महिला ने 11 नवंबर, 2025 को पुलिस में शिकायत दर्ज कराई थी। आरोप है कि गिल ने महिला को अपने वैवाहिक स्थिति के बारे में गुमराह किया और दोनों के बीच संबंध आगे तक बढ़े। महिला का आरोप है कि गिल ने उसे एक पुरानी शिकायत वापस लेने की धमकी दी और 9-10 नवंबर, 2025 की मध्य रात्रि को शराब पिलाकर और धमकाकर उसके साथ यौन संबंध बनाए।
विज्ञापन
विज्ञापन


ये भी पढ़ें: Tamil Nadu Transformer Scam: पूर्व मंत्री सेंथिल बालाजी को झटका, सुप्रीम कोर्ट का CBI जांच पर रोक से इनकार

आरोपी ने सुप्रीम कोर्ट में दी क्या दलीलें?
गिल ने पंजाब और हरियाणा उच्च न्यायालय के उस आदेश को चुनौती दी थी, जिसने उन्हें गिरफ्तारी पूर्व जमानत देने से इनकार कर दिया था। उनकी वकील अधिवक्ता सना रईस खान ने तर्क दिया कि दोनों के बीच संबंध आपसी सहमति से थे।

खान ने यह भी दलील दी कि एफआईआर (प्रथम सूचना रिपोर्ट) को जबरन वसूली के इरादे से दर्ज कराया गया था। उन्होंने कहा कि शिकायतकर्ता को रिश्ते की शुरुआत से ही गिल की वैवाहिक स्थिति के बारे में पूरी जानकारी थी। वकील ने महत्वपूर्ण विसंगतियों पर भी प्रकाश डाला, जैसे कि कथित वीडियो 2 नवंबर, 2025 को प्राप्त हुआ था, लेकिन 11 नवंबर, 2025 को दर्ज एफआईआर में इस महत्वपूर्ण आरोप का कोई उल्लेख नहीं था।

सुप्रीम कोर्ट का फैसला
पीठ ने 20 अप्रैल के एक आदेश में कहा कि अदालत ने पहले गिल को अंतरिम सुरक्षा प्रदान की थी, जिसके बाद वह जांच अधिकारी के समक्ष पेश हुए थे। अदालत ने कहा, "शिकायतकर्ता के अनुसार भी, दोनों पक्षों के बीच संबंध सहमति से थे। जहां तक किसी धमकी का सवाल है, जैसा कि आरोप लगाया गया है, यह साक्ष्य का विषय है। असत्यापित आरोपों के आधार पर, यह नहीं कहा जा सकता कि आरोपी को नैतिक रूप से निंदनीय ठहराया जाए। इसलिए, हमारा विचार है कि आरोपी अग्रिम जमानत पर रिहा होने का हकदार है।"

पीठ ने गिल की याचिका स्वीकार करते हुए आदेश दिया कि उन्हें अग्रिम जमानत पर रिहा किया जाए। यह जमानत उन नियमों और शर्तों पर होगी जो संबंधित जांच अधिकारी उचित समझें। इसके अलावा, उन्हें हर सुनवाई की तारीख पर संबंधित अदालत में पेश होना होगा, जब तक कि किसी विशेष कारण से उन्हें छूट न दी जाए।

पूर्व में खारिज हो चुकी थी याचिकाएं
इससे पहले, निचली अदालत ने 1 दिसंबर को गिल की अग्रिम जमानत याचिका खारिज कर दी थी। इसके बाद गिल उच्च न्यायालय पहुंचे, लेकिन वहां भी 24 दिसंबर को उनकी याचिका खारिज हो गई थी।


उच्च न्यायालय के समक्ष अपनी याचिका में गिल ने कहा था कि पारित आदेशों में तर्क का अभाव है और वे मनमाने हैं। उन्होंने दावा किया कि उच्च न्यायालय और सत्र न्यायालय ने एफआईआर के आरोपों पर यांत्रिक रूप से भरोसा किया और याचिकाकर्ता द्वारा प्रस्तुत स्पष्ट विसंगतियों, चूक और सुधारों को नजरअंदाज किया। गिल का कहना था कि अग्रिम जमानत के कानून में एक संक्षिप्त सुनवाई से बचा जाता है, लेकिन इसके लिए प्रथम दृष्टया विश्वसनीयता का मूल्यांकन आवश्यक है, जिसे इन अदालतों ने पूरी तरह से नजरअंदाज कर दिया।

ये भी पढ़ें: High Court: बलिदानी अग्निवीरों के परिवारों को नियमित सैनिकों जैसी पेंशन नहीं, केंद्र ने अदालत को बताया कारण

गिल ने दावा किया कि उन्हें इस मामले में झूठा फंसाया गया है। उन्होंने कहा कि उन्हें केवल जबरन वसूली के लिए फंसाया गया है, क्योंकि शिकायतकर्ता उनके घर आकर 50 लाख रुपये की मांग कर रही थी और भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता, 2023 की धारा 183 के तहत अपने बयान में पलटने की धमकी दे रही थी।

अन्य वीडियो
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News apps, iOS Hindi News apps और Amarujala Hindi News apps अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed