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Supreme Court: 'सरकारी अधिकारियों को समन करने से बचना चाहिए'; कोर्ट आकर गवाही पर अदालत ने जारी की SOP
Wed, 03 Jan 2024 09:58 PM IST
ज्योति भास्कर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: ज्योति भास्कर
Updated Wed, 03 Jan 2024 09:58 PM IST
सार
Supreme Court, Supreme Court Govt Official Summon, Supreme Court Govt Official summon not first resort, Courts must refrain govt official summon, Supreme Court physical presence SOP
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सुप्रीम कोर्ट
- फोटो : ANI
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विस्तार
सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि अदालतों में सरकारी अधिकारियों को बुलाने से बचना चाहिए। अदालत ने साफ किया कि पहले उपाय के रूप में सरकारी अधिकारियों को समन करना आदर्श तरीका नहीं है। उन्हें बिना उचित कारण के बार-बार पेश होने के लिए कहना स्वीकार नहीं किया जा सकता। अदालत ने कहा कि सरकारी अधिकारियों को अदालत में पेश किए जाने के संबंध में पहले मानक संचालन प्रक्रिया (एसओपी) तैयार की गई है, जिसका पालन होना चाहिए। यह फैसला उत्तर प्रदेश सरकार की उस अपील पर आया। सरकार ने इलाहाबाद हाईकोर्ट के आदेश को चुनौती दी थी।
सरकारी वकीलों पर भरोसा करने के बदले समन ठीक नहीं
शीर्ष अदालत ने कहा कि देश भर की अदालतों के लिए सरकारी अधिकारियों को समन करने के संबंध में मानक संचालन प्रक्रिया (SOP) तैयार की गई है। अदालतों को इनका अनुसरण करना चाहिए। सुप्रीम कोर्ट में मुख्य न्यायाधीश डीवाई चंद्रचूड़, न्यायमूर्ति जेबी पारदीवाला और न्यायमूर्ति मनोज मिश्रा की पीठ ने कहा कि सरकार का प्रतिनिधित्व करने वाले वकीलों या लॉ ऑफिसर (law officers) पर भरोसा करने के बजाय अधिकारियों को समन करना या अदालत में सशरीर पेश होने का फरमान देश के संविधान में की गई कल्पना और निर्धारित योजना के खिलाफ है।
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सरकारी वकीलों पर भरोसा करने के बदले समन ठीक नहीं
शीर्ष अदालत ने कहा कि देश भर की अदालतों के लिए सरकारी अधिकारियों को समन करने के संबंध में मानक संचालन प्रक्रिया (SOP) तैयार की गई है। अदालतों को इनका अनुसरण करना चाहिए। सुप्रीम कोर्ट में मुख्य न्यायाधीश डीवाई चंद्रचूड़, न्यायमूर्ति जेबी पारदीवाला और न्यायमूर्ति मनोज मिश्रा की पीठ ने कहा कि सरकार का प्रतिनिधित्व करने वाले वकीलों या लॉ ऑफिसर (law officers) पर भरोसा करने के बजाय अधिकारियों को समन करना या अदालत में सशरीर पेश होने का फरमान देश के संविधान में की गई कल्पना और निर्धारित योजना के खिलाफ है।
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