फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   India News ›   Supreme Court Gauhati High Court 2017 Verdict adverse remark Trial Judge

Supreme Court: 'गौहाटी हाईकोर्ट से पारित 2017 के फैसले का अंश हटाया गया', ट्रायल जज पर अदालत ने कही यह बात

Mon, 13 Nov 2023 03:51 PM IST
ज्योति भास्कर न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: ज्योति भास्कर Updated Mon, 13 Nov 2023 03:51 PM IST
सार

सुप्रीम कोर्ट ने एक अहम फैसले में करीब छह साल पहले की गई टिप्पणी को अदालत के फैसले से हटा दिया है। गौहाटी हाईकोर्ट के फैसले का अंश हटाने का निर्णय सुप्रीम कोर्ट में दो जजों की पीठ ने सुनाया। मामला आतंकवाद से संबंधित है।

विज्ञापन
Supreme Court Gauhati High Court 2017 Verdict adverse remark Trial Judge
सुप्रीम कोर्ट - फोटो : ANI

विस्तार

सुप्रीम कोर्ट ने गौहाटी उच्च न्यायालय से पारित फैसले के कुछ अंश हटाने का निर्णय सुनाया है। हाईकोर्ट के एक मौजूदा न्यायाधीश ने 2017 में पारित फैसले में कुछ सख्त और प्रतिकूल टिप्पणियां की थीं। इसके खिलाफ अपील पर सुनवाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने उच्च न्यायालय की प्रतिकूल टिप्पणियों को फैसले से हटा दिया। टिप्पणी उस समय से जुड़ी है जब एनआईए की विशेष अदालत के न्यायाधीश ने आतंकवाद से संबंधित मामले की सुनवाई के दौरान सख्त टिप्पणी की थी।
विज्ञापन


सुप्रीम कोर्ट ने अपने फैसले में क्या कहा?
हाईकोर्ट के फैसले का अंश हटाने का निर्णय उच्चतम न्यायालय की पीठ में न्यायमूर्ति एएस बोपन्ना और पीएस नरसिम्हा की पीठ ने सुनाया। सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया कि उच्च न्यायालय के बाकी फैसले लागू रहेंगे। पीठ ने कहा, "हमारी राय है कि पैराग्राफ 130, 190,191, 192, 193,194 और 233 और आदेश के किसी भी अन्य प्रासंगिक हिस्से में याचिकाकर्ता के खिलाफ प्रतिकूल टिप्पणियों को समाप्त माना जाएगा। फैसले के इन अंशों को किसी भी तरह से याचिकाकर्ता के खिलाफ नहीं माना जाएगा।
विज्ञापन


भविष्य में फैसले को चुनौती देने का रास्ता खुला रहेगा
अदालत ने कहा, हाईकोर्ट की अपमानजनक टिप्पणी को छोड़कर (Dehors) उच्च न्यायालय का उक्त आदेश/ निर्णय लागू रहेगा। सुप्रीम कोर्ट ने साफ किया कि यदि बाद में किसी अन्य मामले में गौहाटी उच्च न्यायालय के फैसले को चुनौती दी जाती है तो याचिका की योग्यता के आधार पर विचार किया जाएगा।
विज्ञापन
विज्ञापन


एनआईए की विशेष अदालत की अपील पर फैसला
शीर्ष अदालत ने पहले राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) को नोटिस जारी किया था। सुप्रीम कोर्ट ने "याचिकाकर्ता की पहचान का खुलासा किए बिना" मामले को सूचीबद्ध करने की अनुमति दी थी। अपनी याचिका में, एनआईए कोर्ट के न्यायाधीश ने 11 अगस्त के उच्च न्यायालय के फैसले का अंश हटाने की अपील की थी। उन्होंने उनके खिलाफ की गई "कुछ अपमानजनक टिप्पणियों" को हटाने की मांग की।
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News apps, iOS Hindi News apps और Amarujala Hindi News apps अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed