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सुप्रीम कोर्ट में वीडियो कांफ्रेंसिंग से सुनवाई के लिए नए दिशानिर्देश जारी  

Wed, 15 Apr 2020 11:16 PM IST
श्रीधर मिश्रा न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: श्रीधर मिश्रा Updated Wed, 15 Apr 2020 11:16 PM IST
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Supreme Court finishes hearing on better facilities for health workers
supreme court - फोटो : ANI

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कोरोना वायरस संक्रमण को फैलने से रोकने के लिए राष्ट्रव्यापी लॉकडाउन तीन मई तक बढ़ने के बाद उच्चतम न्यायालय ने अत्यंत तात्कालिक महत्व के विषयों की सुनवाई के दौरान वकीलों और वादियों के लिए बुधवार को नए दिशानिर्देश और मानक संचालन प्रकिया (एसओपी) जारी किए।

कोरोना वायरस संक्रमण को फैलने से रोकने के लिए शीर्ष न्यायालय ने 23 मार्च को अपने कामकाज को सीमित कर दिया था और शीर्ष न्यायालय वीडियो कांफ्रेंसिंग के जरिए सिर्फ बेहद जरूरी मामलों को ही सुनवाई के लिए ले रहा है।

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नए परिपत्र में कहा गया है कि प्रधान न्यायाधीश एस ए बोबडे अत्यंत तात्कालिक महत्व के विषयों की सुनवाई के लिये लॉकडाउन की अवधि के दौरान पीठें गठित करेंगे। नया परिपत्र 23 मार्च और 26 मार्च को जारी पुराने परिपत्रों का स्थान ले लेगा। शीर्ष न्यायालय ने कार्यवाही देखने के लिये वादियों को भी विकल्प मुहैया किया है।
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स्वास्थ्य कर्मचारियों के लिए हेल्पलाइन

वहीं, सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार को कोविड-19 संकट से निपटने के लिए बेहतर सुविधाएं देने के मामले में याचिकाओं का निपटारा किया। सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने सुप्रीम कोर्ट को बताया कि स्वास्थ्य कर्मचारियों की मदद के लिए एक हेल्पलाइन नंबर दिया जाएगा। इस हेल्पलाइन नंबर पर कोई भी परेशान स्वास्थ्य कर्मचारी कॉल कर सकता है।


स्वरोजगार जनित जनहित याचिका पर केंद्र की दलील

इसके अलावा कोविड-19 महामारी की वजह से लागू लॉकडाउन के दौरान गरीबों को राहत दिलाने के नाम पर दायर जनहित याचिका का बुधवार को सुप्रीम कोर्ट में सरकार ने विरोध किया। केंद्र ने इस दौरान कोर्ट से कहा कि स्वरोजगार जनित याचिकाओं पर उसे विचार नहीं करना चाहिए।

न्यायमूर्ति एन वी रमण की अध्यक्षता वाली तीन सदस्यीय पीठ के सामने केंद्र की ओर से सॉलिसीटर जनरल तुषार मेहता ने कहा कि ये स्वरोजगार जनित याचिकायें हैं। इस कोर्ट को ऐसी याचिकाओं पर विचार नहीं करना चाहिए। 

बता दें कि यह पीठ सामाजिक कार्यकर्ता स्वामी अग्निवेश की जनहित याचिका पर वीडियो कांफ्रेंसिंग के जरिए सुनवाई कर रही थी। याचिका में कोरोना वायरस महामारी के फैलाव को रोकने के लिये लागू लॉकडाउन के दौरान गरीबों, बेघरों और समाज के आर्थिक रूप से कमजोर वर्गों को तुरंत राहत दिलाने का अनुरोध किया गया था।

कोर्ट ने लॉकडाउन के दौरान गरीबों को राहत पहुंचाने और जरूरतमंदों की मदद के लिये केंद्र के उपायों के बारे में मेहता के तर्कों का संज्ञान लेने के बाद अग्निवेश की याचिका का निस्तारण कर दिया।

इससे पहले भी केंद्र ने हर्ष मंदर और अग्निवेश सरीखे कार्यकर्ताओं की तरफ से जनहित याचिकाएं दायर करने का विरोध किया था। केंद्र ने इस मामले पर कहा था कि देश कोरोना वायरस महामारी के संकट से लड़ रहा है। ऐसे में इस तरह की पेशेवर पीआईएल दुकानों पर ताला लगा दिया जाना चाहिए।


सरकार ने कहा था कि जमीनी हकीकत की जानकारी के बगैर ही वातानुकूलित कार्यालय में बैठकर जनहित याचिका तैयार करना जन सेवा नहीं है जो उन्हें (कार्यकर्ताओं) जनहित के मुकदमे में बहस करने का अधिकार देता है।
 

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