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सुप्रीम कोर्ट: उपभोक्ता अदालतों में रिक्त पदों की रिपोर्ट देने में आनाकानी पर जताई नाराजगी, राज्यों पर लगेगा जुर्माना 

Wed, 10 Nov 2021 10:37 PM IST
सुरेंद्र जोशी अमर उजाला ब्यूरो, नई दिल्ली
अमर उजाला ब्यूरो, नई दिल्ली Published by: सुरेंद्र जोशी Updated Wed, 10 Nov 2021 10:37 PM IST
सार

सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि न्यायिक समय की बर्बादी की सराहना नहीं कर सकते। दिल्ली, राजस्थान, केरल और पंजाब सहित कई राज्यों ने उपभोक्ता आयोग में कर्मचारियों के बारे में जानकारी नहीं दी। 
 

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Supreme Court: Expressed displeasure over inability to report vacant posts in consumer courts,  fine would be impose
सुप्रीम कोर्ट - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

सुप्रीम कोर्ट ने उपभोक्ता अदालतों में रिक्त पदों और बुनियादी ढांचे की रिपोर्ट देने में आनाकानी करने वाले राज्यों से नाराजगी जताई है। 

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जस्टिस संजय किशन कौल की अध्यक्षता वाली पीठ ने कहा, हम पक्षकारों द्वारा इस तरह से न्यायिक समय की बर्बादी की सराहना नहीं कर सकते। ऐसे राज्यों पर जुर्माना लगाएंगे और  संबंधित अधिकारियों से एक से दो लाख रुपये जुर्माना वसूलने के लिए कहेंगे।
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शीर्ष अदालत ने यह चेतावनी तब दी, जब न्यायमित्र वरिष्ठ वकील गोपाल शंकरनारायणन ने कहा कि गोवा, दिल्ली, राजस्थान, केरल और पंजाब सहित कई राज्यों ने आयोगों में कर्मचारियों की सूचना नहीं दी है। बिहार ने उपभोक्ता आयोग के बुनियादी ढांचे पर स्टेटस रिपोर्ट दाखिल की है। 
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स्वत: संज्ञान लेकर कर रही सुनवाई
देशभर की उपभोक्ता अदालतों में रिक्तियों और बुनियादी ढांचे से संबंधित एक स्वत: संज्ञान मामले का परीक्षण कर रही पीठ ने कहा, समय का सम्मान नहीं किया जाता है। इस कारण से सुनवाई प्रभावित होती है। इसका कारण यह है कि हम समय को लेकर अनुशासित नहीं हैं। 

अदालत ने राज्यों को याद दिलाया कि रिक्तियों को भरना और पर्याप्त बुनियादी ढांचा प्रदान करना प्रभावी रूप से उनका काम है। हीलाहवाली के कारण ही न्यायिक हस्तक्षेप के जरिये राज्यों को कानून के तहत अपने दायित्व को निभाने के लिए कहना पड़ता है। पीठ ने कहा, कृपया उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम के दायरे की सराहना करें। यह उपभोक्ताओं के दैनिक जीवन के छोटे पहलू का निवारण करता है। पीठ ने कहा कि विस्तृत रिपोर्ट के अभाव में यह अंधेरे में ठोकर खाने जैसा है। 


अगस्त में दिया था 800 रिक्त पद भरने का आदेश
शीर्ष अदालत अब इस मामले पर एक दिसंबर को सुनवाई करेगी। 11 अगस्त को शीर्ष अदालत ने लोगों के लाभ के लिए बनाए गए कानूनों को परास्त करने पर राज्यों की खिंचाई की थी। अदालत ने आठ सप्ताह के भीतर देश भर के उपभोक्ता अदालतों में लगभग 800 रिक्त पद भरने का आदेश दिया था।  

22 अक्तूबर को सुप्रीम कोर्ट ने राज्यों से एक सप्ताह के भीतर उपभोक्ता फोरम के लिए उपलब्ध बुनियादी ढांचे का विवरण न्याय मित्र को उपलब्ध कराने को कहा था। कोर्ट ने कहा था कि इसमें विफल रहने वाले राज्यों के सचिव व्यक्तिगत रूप से अदालत में उपस्थित होंगे।

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