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सुप्रीम कोर्ट: चीन की सीमा पर भारतीय इलाके में अतिक्रमण की जानकारी देने की मांग, SC ने खारिज की याचिका

Mon, 05 Sep 2022 08:39 PM IST
Amit Mandal न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: Amit Mandal Updated Mon, 05 Sep 2022 08:39 PM IST
सार

याचिकाकर्ता की ओर से पेश वकील ने भारत संघ से क्षेत्र के नुकसान की सीमा के बारे में सही जानकारी देने का निर्देश देने का अनुरोध किया था। लेकिन अदालत ने इसे खारिज कर दिया। 

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Supreme Court Dismisses Plea To Direct UOI To Put Out Information Regarding Loss Of Territory Along China Bord
सुप्रीम कोर्ट - फोटो : Social media

विस्तार

सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को एक याचिका को खारिज कर दिया जिसमें अदालत से भारत संघ को चीन की सीमा के साथ क्षेत्र के नुकसान की सीमा के बारे में जानकारी देने का निर्देश देने का अनुरोध किया गया था। मामले की सुनवाई मुख्य न्यायाधीश यू.यू. ललित और न्यायमूर्ति रवींद्र भट ने की।

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गलवान घाटी में झड़प का दिया हवाला 
शुरुआत में याचिकाकर्ता के वकील ने कहा कि 14 और 15 जून, 2020 की रात को गलवान घाटी में झड़प हुई थी और संघर्ष के बाद भारतीय आधिकारिक रुख यह था कि भारत ने कोई क्षेत्र नहीं खोया। याचिकाकर्ता ने कहा कि यह आधिकारिक रुख भारत के नागरिकों को गुमराह कर रहा है।
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मुख्य न्यायाधीश यूयू ललित ने तुरंत ध्यान दिया कि मामला राज्य की नीति से संबंधित है और अदालत के लिए इसमें दखल देने लायक कुछ नहीं है। उन्होंने कहा कि ये राज्य का मामला है। इस तरह के मुद्दे हो सकते हैं। क्षेत्र की सीमा पर झड़पें हो सकती हैं। चाहे क्षेत्र का नुकसान हुआ हो, चाहे दूसरी तरफ से अतिक्रमण गया हो या हम आगे बढ़े हो या नहीं, ये अदालत का मामला नहीं है।
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याचिकाकर्ता की ओर से पेश वकील ने भारत संघ से क्षेत्र के नुकसान की सीमा के बारे में सही जानकारी देने का निर्देश देने का अनुरोध किया था और तर्क दिया था कि भारत संघ का आधिकारिक रुख यह है कि हमने कोई क्षेत्र नहीं खोया है। यह न केवल भारत की जनता को गुमराह करता है बल्कि यह जनता को अंधेरे में भी रखता है जबकि दुश्मन सीमा पर सुरक्षा का निर्माण कर रहा है। यह भारत की आने वाली पीढ़ियों के लिए खतरा पैदा करता है। हालांकि याचिका खारिज कर दी गई। 


रिजिजू ने फैसले का स्वागत किया
कानून मंत्री किरेन रीजीजू ने फैसले का स्वागत किया। रीजीजू ने ट्विटर पर लिखा कि सुप्रीम कोर्ट बिल्कुल सही है। ऐसे मामलों को कोर्ट में नहीं लाया जाना चाहिए। सरकार को ऐसे मामलों से निपटना है। नागरिकों को संवेदनशील जमीनी हकीकत के बारे में भारतीय सेना पर भरोसा करना चाहिए।

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